नई दिल्ली,13 अप्रैल 2026। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का लागू होना 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। यह अधिनियम न केवल महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को भी नई मजबूती देगा। प्रधानमंत्री ने विज्ञान भवन में ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है, जो अतीत के सपनों को साकार करेगा और भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह निर्णय नारी शक्ति को समर्पित है और देश के विकास की यात्रा में महिलाओं की भूमिका अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के उदाहरण भी दिए। उन्होंने कहा कि आज देश में राष्ट्रपति से लेकर वित्त मंत्री तक महत्वपूर्ण पदों पर महिलाएं कार्यरत हैं और उन्होंने देश का गौरव बढ़ाया है। इसके साथ ही उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं को महिला नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि देश में 14 लाख से अधिक महिलाएं स्थानीय निकायों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं और लगभग 21 राज्यों में पंचायतों में उनकी भागीदारी 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने इसे भारत के लोकतंत्र की बड़ी उपलब्धि बताया। मोदी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे,तब उन्हें एक ऐसी ग्राम पंचायत की महिलाओं से मिलने का अवसर मिला, जहां सभी सदस्य महिलाएं थीं। एक साधारण शिक्षित महिला प्रधान का यह लक्ष्य कि गांव में कोई गरीब न रहे,आज भी उन्हें प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से निर्णय प्रक्रिया में संवेदनशीलता आई है और इससे प्रशासनिक व्यवस्थाएं अधिक प्रभावी हुई हैं। यही कारण है कि सरकार ने महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए अनेक योजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने बताया कि जनधन योजना के तहत 32 करोड़ से अधिक महिलाओं के बैंक खाते खोले गए,जिससे उन्हें वित्तीय प्रणाली से जोड़ा गया। इसके अलावा मुद्रा योजना के तहत 60 प्रतिशत से अधिक ऋण महिलाओं को दिए गए हैं, जिससे वे उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी महिलाओं की मजबूत भागीदारी है और 42 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक है।
उन्होंने इसे ‘वूमेन-लेड डेवलपमेंट’ की दिशा में बड़ी सफलता बताया। उन्होंने मातृत्व अवकाश को 26 सप्ताह तक बढ़ाने, स्किल इंडिया मिशन, ड्रोन दीदी पहल और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान में महिलाओं की भूमिका का भी उल्लेख किया।
सामाजिक न्याय सिर्फ नारा नहीं रहेगा : पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, ‘’यह एक ऐसे समतामूलक भारत के निर्माण का संकल्प है, जहां सामाजिक न्याय सिर्फ नारा नहीं हो। लेकिन हमारी कार्यसंस्कृति, हमारी निर्णय प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा हो। राज्यों की विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक दशकों की प्रतीक्षा के अंत का समय 16, 17 और 18 अप्रैल है।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘’2023 में नई संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप में प्रथम कदम उठाया था। वह समय से लागू हो सके, महिलाओं की भागीदारी हमारे लोकतंत्र को मजबूती दे, इसके लिए 16 अप्रैल से संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक का आयोजन होने जा रहा है।
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