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कोरिया/सोनहत (मेण्ड्रा)@ हसदो की पावन धारा पर आस्था और जनसरोकार का संगम…मेण्ड्रा में शिवरात्रि पर महंत दंपत्ति का जलाभिषेक,हवन और जनसंवाद

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कोरिया/सोनहत (मेण्ड्रा),15 फरवरी 2026 (घटती-घटना)।
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर वनांचल क्षेत्र मेण्ड्रा में आस्था,परंपरा और जनसरोकार का ऐसा समागम देखने को मिला,जिसने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया, छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत और कोरबा सांसद ज्योत्स्ना महंत ने हसदो नदी के उद्गम स्थल पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर में विधि-विधान से जलाभिषेक कर प्रदेश और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की, इस अवसर पर पूर्व विधायक गुलाब कमरो सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीण और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
शिव भक्ति से हुई दिन की मंगल शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत हसदो नदी के पवित्र उद्गम स्थल पर बने प्राचीन शिव मंदिर में जलाभिषेक से हुई, मंत्रोच्चार के बीच महंत दंपत्ति ने भगवान भोलेनाथ का पूजन-अर्चन किया, हसदो की शांत लहरों और वनांचल की हरितिमा के बीच गूंजते वैदिक मंत्रों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया,डॉ. चरणदास महंत ने पूजा के पश्चात कहा कि महाशिवरात्रि केवल धार्मिक पर्व नहीं,बल्कि आत्मचिंतन और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भी प्रतीक है,उन्होंने प्रदेश की शांति, समृद्धि और किसानों-युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
हसदोः आस्था के साथ जीवनरेखा
सांसद ज्योत्स्ना महंत ने हसदो नदी को क्षेत्र की जीवनरेखा बताते हुए इसके संरक्षण का संकल्प दोहराया,उन्होंने कहा कि नदी, जंगल और जमीन का संतुलन ही इस वनांचल की असली पहचान है, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संसाधनों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे,उन्होंने यह भी कहा कि मेण्ड्रा और सोनहत क्षेत्र उनके परिवार के समान हैं,और यहां के विकास तथा पर्यावरण संतुलन को बनाए रखना प्राथमिकता है। जनता से सीधा संवाद,समस्याओं पर मंथन- पूजा-अर्चना के पश्चात महंत दंपत्ति ने ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं से आत्मीय मुलाकात की,ग्रामीणों ने पेयजल संकट, सड़क निर्माण,शिक्षा सुविधाओं की कमी और वनाधिकार पट्टों से संबंधित मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, डॉ. महंत ने एक अभिभावक की भांति सभी समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल विधानमंडल तक सीमित नहीं, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचना है।
अन्नपूर्णा सेवाः जनसेवा का भावुक दृश्य
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब कथा के पश्चात आयोजित भंडारे में डॉ. चरणदास महंत ने स्वयं अपने हाथों से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को प्रसाद परोसा, उन्होंने लोगों के बीच बैठकर उनकी कुशलक्षेम पूछी और आत्मीय संवाद किया, ग्रामीणों ने इसे सच्ची जनसेवा का उदाहरण बताया, कई बुजुर्गों की आंखें नम दिखीं, जिन्होंने कहा कि ‘नेता जब हमारे बीच बैठता है, तभी भरोसा मजबूत होता है। ‘
लोक-कल्याण हेतु हवन
जलाभिषेक के पश्चात यज्ञशाला में विधि-विधान से हवन-पूजन संपन्न हुआ,‘स्वाहा’ के उद्घोष के साथ अग्निकुंड में आहुतियां अर्पित की गईं,लोककल्याण, क्षेत्र की समृद्धि और समाज में सद्भाव के लिए प्रार्थना की गई,हवन की पवित्र सुगंध और वैदिक मंत्रों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊंचाई का अनुभव कराया।
वनांचल में जनसेवा का संदेश
इस प्रवास ने यह स्पष्ट किया कि धार्मिक आस्था और जनसेवा एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं,मेण्ड्रा में आयोजित इस कार्यक्रम ने दिखाया कि शिवरात्रि का पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का अवसर भी है, हसदो की पावन धारा के तट पर हुआ यह आयोजन आस्था, संवेदना और जन प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गया,मेण्ड्रा से उठी यह आवाज यही कहती रही —भक्ति के साथ जनसेवा ही सच्चा संकल्प है।


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