Breaking News

सूरजपुर@ मगरमच्छ वाला घोटाला,कछुए वाली जांच— शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र में नियम छुट्टी पर, माफिया ड्यूटी पर!

Share

  • निलंबन आदेश ‘अंडरग्राउंड’, एआई कैमरा ‘ऑन पेपर’, जिम्मेदार ‘ऑफ मोड’ — सवालों के बोझ तले पूरा सिस्टम
  • शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र में SOP भी फेल, एआई कैमरा भी मौन!
  • निलंबन आदेश दबा, स्टैकिंग नियम गायब, एआई रिपोर्ट में Quantity Differenc” — फिर भी फाइल में सब Resolved’
  • शिवप्रसादनगर धान खरीदी में SOP फेल,AI कैमरा भी ‘Resolved
  • निलंबन छुपा, स्टैकिंग गड़बड़,AI रिपोर्ट में फर्क — फिर भी सिस्टम बोले सब ठीक!
  • AI ने पकड़ा खेल, फाइलों ने किया ‘Resolved’ — शिवप्रसादनगर धान खरीदी पर बड़े सवाल
  • धान खरीदी या मैनेजमेंट मॉडल? SOP गायब, कैमरा खामोश, जिम्मेदार मौन
  • 350 मि्ंटल का गणित बिगड़ा, 875 बोरी का सवाल — शिवप्रसादनगर में जांच की धीमी चाल
  • आदेश कागजों में, खेल मैदान में — शिवप्रसादनगर धान खरीदी बना सिस्टम की परीक्षा


-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,05 फरवरी 2026(घटती-घटना)।
शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र इन दिनों सिर्फ धान की तौल के लिए नहीं बल्कि सवालों के वजन के लिए भी चर्चा में है,आरोपों की परतें इतनी मोटी हैं कि अगर आधी भी सही साबित हुईं तो यह मामला साधारण लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, दिलचस्प बात यह है कि जहां घोटाले का आकार मगरमच्छ जैसा बताया जा रहा है, वहीं जांच की रफ्तार कछुए से भी धीमी नजर आ रही है।
बता दे की शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र का यह प्रकरण सिर्फ एक केंद्र की कहानी नहीं, बल्कि उस भरोसे की परीक्षा है जो किसान और जनता प्रशासन से रखते हैं, तकनीक, आदेश और नियम तभी मायने रखते हैं जब उन्हें लागू करने की इच्छा भी उतनी ही मजबूत हो, वरना मगरमच्छ के आकार के आरोपों के बीच कछुए की चाल वाली जांच जनता के मन में यही सवाल छोड़ जाती है- क्या सच में कोई सुन रहा है, या सिर्फ फाइलों में हरे रंग का टिक लगाकर सब कुछ ठीक मान लिया गया है?
निलंबन आदेश: कागज पर कार्रवाई, मैदान में पुरानी व्यवस्था- जानकारी के अनुसार 23 जनवरी को केंद्र प्रभारी साधना कुशवाहा को निलंबित किया गया, लेकिन आदेश सार्वजनिक नहीं हुआ, निलंबन की खबर बाजार में घूमती रही, पर आधिकारिक दस्तावेज जैसे किसी अलमारी में बंद रहे, आरोप है कि निलंबित होने के बाद भी 30 जनवरी तक खरीदी में उनके हस्ताक्षर चलते रहे, बीच में चार दिन के लिए नए प्रभारी के रूप में मन्नू लाल की नियुक्ति हुई, मगर यहां भी सवाल उठे की क्या जिम्मेदारी नियम से दी गई या नेटवर्क से तय हुई? स्थानीय चर्चाओं में दोनों नामों का पुराने विवादों से जुड़ना भी लोगों की जिज्ञासा बढ़ा रहा है, प्रशासन भले चुप हो, मगर जनता पूछ रही है कि क्या यही विकल्प बचे थे?
निलंबन भी ‘सीक्रेट मिशन’ जैसा!- 23 जनवरी को प्रभारी साधना कुशवाहा के निलंबन की खबर आई, मगर आदेश ऐसे गायब रहा जैसे सरकारी फाइलों में ईमानदारी, सवाल यह है कि जब प्रभारी निलंबित थीं तो 30 जनवरी तक धान खरीदी में उनके हस्ताक्षर कैसे चलते रहे? यहां तो हाल ऐसा दिखा मानो सिस्टम कह रहा हो — “निलंबन कागज पर, काम मैदान पर।” चार दिन के लिए बनाए गए नए प्रभारी मन्नू लाल भी वही निकले जिनका नाम पुराने विवादों में गूंज चुका है। जनता पूछ रही है — क्या यहां प्रभारी चयन योग्यता से होता है या पुराने ‘अनुभव’ से?
SOP का हाल: आदेश जारी, पालन गायब- धान खरीदी के अंतिम चरण में शासन ने स्पष्ट स्ह्रक्क जारी किया था — 23 जनवरी तक भौतिक सत्यापन, पंचनामा, फोटोग्राफी और क्रॉस वेरिफिकेशन अनिवार्य था, 27 जनवरी से नई स्टैकिंग अलग रखनी थी और परिवहन भी सत्यापित स्टॉक से ही होना था, लेकिन आरोप है कि शिवप्रसादनगर में स्ह्रक्क सिर्फ पोस्टर तक सीमित रहा, अलग स्टैकिंग नहीं हुई, पुराने और नए स्टॉक का मिश्रण बना रहा और परिवहन भी बिना पारदर्शी सत्यापन के चलता रहा, व्यंग्य यह है कि नियम इतने साफ थे कि समझाने की जरूरत नहीं थी, फिर भी पालन नहीं हुआ, यानी या तो आदेश को हल्के में लिया गया या फिर किसी ने जानबूझकर आंखें मूंद लीं।
एआई कैमरा: तकनीक जागी, जिम्मेदारी सोई?- सरकार ने धान खरीदी में पारदर्शिता के लिए एआई कैमरे लगाए थे ताकि हर गतिविधि पर नजर रहे, 4 जनवरी 2026 की एआई रिपोर्ट में दर्ज है कि शिवप्रसादनगर से 350 मि्ंटल धान लेकर एक गाड़ी महामाया राइस प्रोडक्ट्स गई, लेकिन फोटो एनालिसिस में संदेह जताया गया कि गाड़ी में लगभग 875 बोरी धान होना चाहिए था, जो नजर नहीं आया, सिस्टम ने साफ लिखा — “Quantity Difference”, और उपार्जन केंद्र व मिल का भौतिक सत्यापन करने की सिफारिश भी की, यहां से कहानी और दिलचस्प हो जाती है, रिपोर्ट में मामला बाद में “Resolved” दिखाया गया, अब सवाल है — क्या जांच सच में हुई या सिर्फ स्क्रीन पर हरे रंग का टिक लगाकर फाइल बंद कर दी गई? अगर PV हुआ तो उसका सार्वजनिक रिकॉर्ड कहां है?
सूरजपुर से विशेष व्यंग्यात्मक रिपोर्ट– शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र इन दिनों प्रशासनिक पारदर्शिता का नहीं बल्कि “व्यवस्थित अव्यवस्था” का मॉडल बन चुका है, यहां नियम-कायदे ऐसे गायब हैं जैसे बैठक में चाय खत्म होते ही नेता गायब हो जाते हैं, आरोप है कि घोटाला मगरमच्छ के आकार का है, लेकिन जांच कछुए की चाल से भी धीमी चल रही है — शायद इसलिए ताकि सच मंजिल तक पहुंचते-पहुंचते थक जाए।
माफिया राज का ‘लोकल मैनेजमेंट मॉडल’- स्थानीय चर्चाओं में कहा जा रहा है कि इस केंद्र में कौन प्रभारी बनेगा, यह फाइल नहीं बल्कि ‘नेटवर्क’ तय करता है, रात के अंधेरे में बारदाना बाहर निकलने की बातें हो रही हैं और कैमरे भी कथित तौर पर उतने ही सक्रिय हैं जितनी चुनाव के बाद जनता की समस्याएं।
एआई कैमरा: तकनीक हाईटेक, नतीजा लो बैटरी– सरकार ने पारदर्शिता के लिए एआई कैमरे लगाए, लेकिन यहां सवाल यह उठ रहा है कि कैमरे लगे हैं या सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए लगाए गए हैं? बताया जा रहा है कि कैमरों की कमान समिति के बजाय बाहर किसी कार्यालय के पास है — यानी निगरानी भी ‘आउटसोर्स’।
350 क्विंटल की गाड़ी और 875 बोरी का गणित- 4 जनवरी की एआई रिपोर्ट ने तो पूरा गणित ही बिगाड़ दिया, रिपोर्ट के अनुसार 350 मि्ंटल धान ले जाने वाली गाड़ी में करीब 875 बोरी होनी चाहिए थी, मगर कैमरा विश्लेषण ने संदेह जताया, भौतिक सत्यापन की सिफारिश भी हुई, पर जांच का हाल ऐसा है जैसे फाइलें योगा कर रही हों — एक जगह स्थिर।
राइस मिलार का नाम और दबाव की फुसफुसाहट- महामाया राइस मिल और उसके संचालक मनोज का नाम भी चर्चाओं में तैर रहा है, आरोप है कि ऊपर तक दबाव बनाकर मामले को ठंडा रखने की कोशिश हो रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी तक सामने नहीं आई है — यानी कहानी अभी “सूत्रों के हवाले” से ही चल रही है।
रात का खेल और कैमरों की खामोशी- स्थानीय लोगों के अनुसार रात के समय बारदाना बाहर ले जाने की चर्चाएं भी होती रही हैं, आरोप यह भी है कि कैमरों की निगरानी समिति के पास नहीं बल्कि बाहरी कार्यालय के पास है, अगर यह सही है तो पारदर्शिता का उद्देश्य ही उल्टा पड़ जाता है, क्योंकि कैमरा दिखेगा जरूर, मगर नियंत्रण कहीं और होगा।
राइस मिल का नाम और दबाव की चर्चा- एआई रिपोर्ट में महामाया राइस प्रोडक्ट्स का नाम आने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है, सूत्रों का दावा है कि मिलर स्तर से दबाव बनाकर जांच को धीमा करने की कोशिश की जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन चुप्पी ने संदेह को और गहरा कर दिया है, अगर आरोप गलत हैं तो प्रशासन को तुरंत स्पष्ट बयान देना चाहिए, और अगर सही हैं तो कार्रवाई में देरी खुद एक सवाल बन जाती है।
व्यंग्य का सच: सिस्टम या सर्कस?- पूरा मामला देखकर लोगों के बीच तंज चल रहा है — यहां धान कम और कहानी ज्यादा तौली जा रही है, स्ह्रक्क मौजूद है, कैमरा मौजूद है, रिपोर्ट मौजूद है, लेकिन जवाबदेही कहीं नजर नहीं आती, ऐसा लगता है जैसे हर स्तर पर कोई न कोई “रिजॉल्व” बटन दबाकर आगे बढ़ जाता है, मगर जमीन पर समस्या वहीं खड़ी रहती है।
सबसे बड़े सवाल
निलंबन आदेश सार्वजनिक क्यों नहीं हुआ?
SOP का पालन किसने रोका और क्यों?
एआई कैमरा अलर्ट के बाद वास्तविक जांच हुई या नहीं?
““Resolved” का मतलब समाधान है या सिर्फ सिस्टम की औपचारिकता?


Share

Check Also

राजपुर@ उत्कृष्ट पार्षद के लिए नवीन सर्व सोनार समाज ने किया पार्षद विशवास का सम्मान

Share राजपुर,24 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। नवीन सर्व सोनार समाज राजपुर द्वारा निर्दलीय निर्वाचित वार्ड पार्षद …

Leave a Reply