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नई दिल्ली@संसद में राष्ट्रपति का अभिभाषण,45 मिनट स्पीच दी…

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वीबी-जी राम जी कानून का जिक्र करते ही विपक्ष का हंगामा,कानून वापस लो के नारे लगे…
नई दिल्ली,18 जनवरी 2026। 18वीं लोकसभा के बजट सत्र का पहला हिस्सा बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा की जॉइंट मीटिंग में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ शुरू हो गया है। संबोधन के दौरान विपक्ष की तरफ से हंगामा और शोरगुल भी हुआ। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार देश में आर्थिक प्रगति और सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार भ्रष्टाचार और घोटालों से निपटने में सफल रही है। राष्ट्रपति ने 45 मिनट की स्पीच में वीबी-जी राम जी कानून का भी जिक्र किया। इस पर विपक्ष ने हंगामा किया और कानून वापस लो के नारे लगाए। उधर, एनडीए सांसदों ने समर्थन में नारेबाजी की। पीएम मोदी और अमित शाह भी मेज थपथपाते नजर आए। बजट सत्र 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक चलेगा। यह दो हिस्सों में होगा। पहला हिस्सा 28 जनवरी से 13 फरवरी तक और दूसरा हिस्सा 9 मार्च से 2 अप्रैल तक होगा। इस दौरान कुल 30 बैठकें होंगी। 28 जनवरी और 1 फरवरी को कोई शून्यकाल नहीं होगा।
राष्ट्रपति ने कहा…कॉमनवेल्थ गेम्स में सबको सहयोग करना है : राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा…भारत में खेलों के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। भारत की महिला टीम ने पहली बार क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता है। इसी प्रकार महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम ने भी वर्ल्ड कप जीता। मैं सबको बधाई देती हैं। बीते समय में हर क्षेत्र में काम किए हैं। मेरी सरकार ने खेलो भारत नीति बनाई है। खेल संगठनों को पारदर्शी बनाया जा रहा है। 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी हासिल की है।
राष्ट्रपति ने कहा…हम किसी को ना डराएं और न ही किसी से डरें…
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा…‘श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हमें सिखाया…‘भय काहूं को देत नहीं, नहीं भय मानत आन’, यानी न हम किसी को डराएं और न ही किसी से डरें। इसी निडर मन और भावना के साथ हम देश की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। भारत ने यह सिद्ध किया है कि शक्ति का प्रयोग जिम्मेदारी और विवेक के साथ किया जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पूरी दुनिया ने भारतीय सशस्त्र बलों का शौर्य देखा। अपने संसाधनों के बल पर हमारे देश ने आतंक के अड्डों को नष्ट किया। मेरी सरकार ने यह कड़ा संदेश दिया है कि भारत पर होने वाले हर हमले का जवाब मजबूत और निर्णायक होगा। सिंधु जल संधि को स्थगित रखा गया है और यह आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई का हिस्सा है। देश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर भी काम किया जा रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा…माओवादी आतंक के खिलाफ
निर्णायक कार्रवाई हुई…

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा… ‘मेरी सरकार की नीतियों के अनुरूप सुरक्षा बलों ने माओवादी आतंक के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की है। वर्षों तक देश के 126 जिलों में भय और अविश्वास का माहौल था। माओवादी विचारधारा ने कई पीढि़यों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया। इससे युवाओं, आदिवासियों और दलितों को सबसे अधिक नुकसान हुआ। आज माओवादी आतंक की चुनौती सिमटकर केवल 8 जिलों तक रह गई है। इनमें से भी 3 जिले ऐसे हैं जो गंभीर रूप से प्रभावित हैं। बीते एक वर्ष में माओवादियों से जुड़े करीब 2000 लोगों ने आत्मसमर्पण किया है। इसके साथ ही लाखों नागरिकों के जीवन में शांति लौटी है। वह दिन दूर नहीं जब हमारे देश से माओवादी आतंक का पूरी तरह सफाया हो जाएगा।


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