- BNSS की धारा 152 के इस्तेमाल पर उठे सवाल
- पहले अनुमति,बाद में जांच-देवीगंज रोड वृक्ष कटाई मामला बना विवाद का केंद्र
- क्या राजस्व निरीक्षक है वृक्ष वैज्ञानिक? हरे यूकेलिप्टस की कटाई पर उठी बहस
- ‘हो सकता है’ के आधार पर कटे पेड़-प्रशासनिक विवेक या मनमानी?
- आशंका के आधार पर हरे पेड़ों की बलि,देवीगंज रोड में यूकेलिप्टस कटाई पर प्रशासन कटघरे में…
- रिपोर्ट में ‘हरा-भरा’, आदेश में ‘कटाई योग्य’SDM के फैसले ने खड़े किए गंभीर सवाल
- टहनियां गिरीं, पूरा पेड़ काट दिया — BNSS 152 के नाम पर पर्यावरण से समझौता?
-अनिल सिन्हा-
अंबिकापुर,14 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। देवीगंज रोड/घड़ी चौक क्षेत्र में स्थित शासकीय आवास जीडी-13/2 के परिसर में लगे तीन यूकेलिप्टस वृक्षों की कटाई को लेकर प्रशासनिक आदेश,जांच रिपोर्ट और वन विभागीय पत्राचार अब सार्वजनिक बहस का विषय बन गए हैं,उपलब्ध दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि हरे-भरे और जीवित वृक्षों को भी केवल‘संभावित खतरे’के आधार पर लोक न्यूसेंस मानते हुए काटने की अनुमति दे दी गई, जबकि इस निर्णय से पहले किसी वन वैज्ञानिक या विशेषज्ञ की तकनीकी जांच सामने नहीं आई है। बता दे की देवीगंज रोड का यह मामला अब सिर्फ तीन यूकेलिप्टस पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं रहा,यह मामला प्रशासनिक विवेक, कानून की व्याख्या और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का बड़ा प्रश्न बन चुका है, दस्तावेजों से यह तथ्य उभरकर आता है कि हरे-भरे वृक्षों को भी ‘हो सकता है’ के आधार पर काट दिया गया,जिससे निर्णय की पारदर्शिता और वैज्ञानिक आधार पर गंभीर संदेह पैदा होता है,अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस पूरे प्रकरण में पुनः निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी अनुमति प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी व वैज्ञानिक बनाने के लिए क्या कदम उठाता है।
आवेदन की पृष्ठभूमि
दस्तावेजों के अनुसार,शासकीय आवास जीडी-13/2 में निवासरत आवेदिका द्वारा प्रशासन को आवेदन दिया गया था,आवेदन में कहा गया कि आंधी-तूफान के दौरान यूकेलिप्टस वृक्षों की टहनियां टूटकर छत की सीट पर गिरती हैं,जिससे मकान को नुकसान हुआ और आवेदिका को चोट भी आई,इस कारण जनहित एवं सुरक्षा की दृष्टि से वृक्षों की कटाई आवश्यक है,आवेदन में शिकायत का केंद्र टहनियों के गिरने तक सीमित था, न कि पूरे वृक्ष के गिरने या सूख जाने तक।
एसडीएम का आदेश, 15 सितंबर 2025
इस आवेदन पर अनुविभागीय दंडाधिकारी,अंबिकापुर ने 15/09/2025 को आदेश पारित किया,आदेश में कहा गया कि शासकीय आवास जीडी-13/2 देवीगंज रोड के मुख्य मार्ग से लगा हुआ है, सामने विद्यालय स्थित हैं,मार्ग पर दिनभर आमजन का आवागमन होता है,इन तथ्यों को आधार बनाते हुए बीएनएसएस (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 152 के तहत उक्त तीनों यूकेलिप्टस वृक्षों को लोक न्यूसेंस मानकर कटाई की अनुमति प्रदान कर दी गई।
कानूनी और प्रशासनिक सवाल, इस पूरे प्रकरण ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं…
– क्या राजस्व निरीक्षक वृक्ष की वैज्ञानिक स्थिति तय करने के लिए सक्षम प्राधिकारी है?
– क्या बीएनएसएस की धारा 152 का उपयोग केवल संभावना के आधार पर किया जा सकता है?
– क्या पहले वन वैज्ञानिक/विशेषज्ञ जांच अनिवार्य नहीं होनी चाहिए थी?
– क्या सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4(1)(ग) के तहत ऐसी अनुमति को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए था?
वन विभाग की भूमिका,अनुमति पहले, जांच बाद में…
प्रकरण में वनमंडलाधिकारी,सरगुजा द्वारा 07/10/2025 को जारी पत्र भी सामने आया है,इसमें एसडीएम के आदेश का हवाला देते हुए, संबंधित वन अधिकारियों को स्थल निरीक्षण कर,जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं,इससे यह स्थिति बनती है कि पहले कटाई की अनुमति दे दी गई, और उसके बाद वन विभाग से जांच कराई जा रही है, पर्यावरण मामलों में यह प्रक्रिया अपने आप में सवालों के घेरे में है,क्योंकि सामान्यतः विशेषज्ञ/तकनीकी जांच के बाद ही निर्णय लिया जाना चाहिए।
केवल छंटाई क्यों नहीं?
स्थानीय नागरिकों और आपत्तिकर्ताओं का कहना है कि शिकायत केवल टहनियों के टूटकर गिरने की थी,ऐसे में केवल टहनियों की छंटाई कर खतरा कम किया जा सकता था,पूरे वृक्ष को काटना अत्यधिक और अनुपातहीन निर्णय प्रतीत होता है,दस्तावेजों में कहीं भी यह स्पष्ट नहीं है कि वृक्ष की उम्र कितनी थी,जड़ें कमजोर थीं या नहीं,झुकाव खतरनाक स्थिति में था या नहीं।
सबसे बड़ा विरोधाभासः हरा-भरा वृक्ष,फिर भी कटाई योग्य…
इसी आदेश में संलग्न राजस्व निरीक्षक की जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट उल्लेख है कि वृक्ष ‘हरा-भरा’ है, लेकिन उसके गिरने से अप्रिय घटना घटित हो सकती है,यानी,रिपोर्ट एक ओर वृक्ष के स्वस्थ होने की पुष्टि करती है,तो दूसरी ओर आशंका मात्र के आधार पर उसे काटने योग्य ठहराती है,यहीं से सवाल उठता है कि क्या केवल संभावना के आधार पर जीवित और स्वस्थ वृक्षों को काटा जाना न्यायसंगत है?
विद्यालय का हवाला,पर तथ्य अधूरे…
आदेश में दो विद्यालयों का हवाला देकर बच्चों और आमजन की सुरक्षा का उल्लेख किया गया है, लेकिन विद्यालयों की वास्तविक दूरी कितनी है, पहले कभी इन वृक्षों से कोई दुर्घटना हुई या नहीं, इसका कोई ठोस रिकॉर्ड आदेश में दर्ज नहीं है।
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