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कोरिया/एमसीबी@भक्ति और आस्था का संगम: मकर संक्रांति पर सूर्य उपासना, दान-पुण्य और शिव भक्ति से गुंजायमान रहेंगे कोरिया-एमसीबी

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उत्तरायण का पर्व, शिवालयों में ‘हर-हर महादेव’, नदियों-सरावरों पर उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब


-राजन पाण्डेय-
कोरिया/एमसीबी 13 जनवरी 2026 (घटती-घटना)।
सूर्य के उत्तरायण होने का महापर्व मकर संक्रांति आज पूरे कोरिया एवं मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस वर्ष मकर संक्रांति पर दान-पुण्य के साथ भगवान शिव की विशेष उपासना का दुर्लभ संयोग बना है, तड़के स्नान, सूर्य को अर्घ्य और शिवालयों में गूंजते “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा अंचल भक्तिमय वातावरण में डूबा रहेगा, मकर संक्रांति 2026 कोरिया और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में श्रद्धा, लोक आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता के साथ भव्य रूप में मनाई जाएगी। यह पर्व दान, सेवा, सहयोग और सकारात्मक सोच के माध्यम से समाज को नई ऊर्जा देने का संदेश देता है।
इन प्रमुख शिवालयों में उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़
सिद्ध बाबा मंदिर (मनेंद्रगढ़)
एमसीबी जिले की पहचान सिद्ध बाबा पर्वत पर स्थित इस प्राचीन शिवालय में मकर संक्रांति पर विशेष पूजा-अर्चना होगी। ऊँची पहाडç¸यों के बीच गूंजता ‘हर-हर महादेव’ का नाद वातावरण को आध्यात्मिक बना देगा।
नीलकंठ धाम (दसेर)
मध्यप्रदेश सीमा से लगे इस तीर्थ स्थल पर ऊँची पहाड़ी पर विराजमान भगवान नीलकंठ के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुँचेंगे। विहंगम प्राकृतिक दृश्य और शिव भक्ति का अनूठा संगम यहां देखने को मिलेगा।
हसदेश्वर मंदिर
हसदेव नदी के उद्गम के समीप स्थित इस शिवालय में मकर संक्रांति पर स्नान और अभिषेक का विशेष महत्व है। श्रद्धालु कुंड का पवित्र जल महादेव को अर्पित कर मनोकामना पूर्ति की कामना करेंगे।
जटाशंकर धाम
प्राकृतिक गुफा और शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध जटाशंकर धाम में आज लंबी कतारें देखने को मिलेंगी। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्ता श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करती है।
तिल-गुड़ से महादेव का अभिषेक, भंडारों का आयोजन– मकर संक्रांति के अवसर पर शिवालयों में जल-दूध के साथ तिल और गुड़ से अभिषेक की परंपरा निभाई जाएगी। कई मंदिरों में खिचड़ी भंडारे आयोजित होंगे, जहां श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे।
मेले जैसा माहौल, सुरक्षा के इंतजाम- सिद्ध बाबा और जटाशंकर जैसे प्रमुख स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेले जैसा दृश्य रहेगा, प्रशासन और स्वयंसेवकों द्वारा यातायात, सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।
पुण्य काल और महा पुण्य काल का महत्व- पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में पुण्य काल: दोपहर 3:13 बजे से महा पुण्य काल: 3:13 से 4:58 बजे तक इस अवधि में किया गया स्नान, दान, सूर्य पूजन और सेवा कार्य अक्षय पुण्य प्रदान करता है। इसी कारण इस समय विशेष धार्मिक गतिविधियां होंगी।
सूर्य का उत्तरायण गमन: सकारात्मक जीवन का संदेश- मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर गमन का प्रतीक है। उत्तरायण को प्रकाश, ऊर्जा और उन्नति का संकेत माना जाता है, खरमास की समाप्ति के साथ नए कार्यों और शुभ आयोजनों की शुरुआत होती है।
स्नान, सूर्य अर्घ्य और आत्मशुद्धि- हसदेव नदी सहित जिले के विभिन्न नदी-घाटों और सरोवरों पर तड़के से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालु स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करेंगे।
दान-पुण्य और सामाजिक करुणा का पर्व- तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र और कंबल का दान इस पर्व की पहचान है, जरूरतमंदों, वृद्धजनों और असहायों की सहायता को सामाजिक दायित्व माना जाता है। कई स्थानों पर सामूहिक सेवा और अन्न वितरण के कार्यक्रम होंगे।
कृषि प्रधान अंचल में विशेष महत्व- कृषि प्रधान एमसीबी जिले में मकर संक्रांति परिश्रम के फल का उत्सव है, नई फसल के आगमन पर किसान सूर्य और धरती के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।
लोक संस्कृति और सामूहिक उत्सव- गांव-गांव में मेले, लोक गीत-नृत्य और पारंपरिक व्यंजन—तिल-गुड़ के लड्डू, खिचड़ी और मौसमी फल—इस पर्व की शोभा बढ़ाते हैं। यह पर्व सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करता है।


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