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एमसीबी@भ्रष्टाचार की ‘पापड़’ वाली सड़क

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भरतपुर में 5 दिन भी नहीं टिकी पक्की सड़क,हाथों से उखड़ रहा डामर
-राजन पाण्डेय-


एमसीबी,11 जनवरी 2026 (घटती-घटना)।
जिले के भरतपुर विकासखंड से विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है, यहाँ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई नई पक्की सड़क महज 5 से 7 दिनों के भीतर ही उखड़ने लगी है, जिस सड़क के लिए ग्रामीणों ने वर्षों तक इंतजार किया,करोड़ों रुपये का बजट खर्च हुआ, वही सड़क अब ‘पापड़’ की तरह टूटती और बिखरती नजर आ रही है, भरतपुर ब्लॉक के ग्राम नौढीया में बनी इस सड़क की हालत देखकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, लोग सवाल कर रहे हैं कि अगर सड़क पहली बारिश भी नहीं झेल पाएगी, तो फिर करोड़ों रुपये आखिर गए कहाँ? भरतपुर के ग्राम नौढीया की यह सड़क केवल एक निर्माण कार्य नहीं,बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं में फैले भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है,अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस ‘पापड़ सड़क’ मामले में ईमानदार कार्रवाई करता है या फिर यह भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश- ग्राम नौढीया के ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क उनके लिए किसी सपने से कम नहीं थी। वर्षों से खराब रास्तों के कारण मरीजों, छात्रों और किसानों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती थी। जब सड़क बनी तो उम्मीद जगी, लेकिन अब वही सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई, ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार, इंजीनियर और निगरानी तंत्र की मिलीभगत के बिना ऐसा घटिया निर्माण संभव नहीं है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो- क्षेत्र के युवाओं ने सड़क की बदहाली का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया है, वीडियो में साफ देखा जा सकता है लोग हाथ से डामर उखाड़ रहे हैं, नीचे सिर्फ धूल और मिट्टी नजर आ रही है, कहीं भी मजबूत बेस या परत दिखाई नहीं देती, वीडियो वायरल होने के बाद मामला अब जिले भर में चर्चा का विषय बन गया है।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल- इतना बड़ा मामला सामने आने के बावजूद अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या बयान सामने नहीं आया है, इससे लोगों में यह आशंका गहराने लगी है कि कहीं इस मामले को भी कागजों में ‘ऑल इज वेल’ दिखाकर दबा न दिया जाए।
ग्रामीण की पीड़ा- एक स्थानीय ग्रामीण ने आक्रोशित स्वर में कहा सालों का इंतजार और करोड़ों का बजटज् नतीजा यह है कि पहली बारिश तो दूर, यह सड़क सामान्य चलने से ही उखड़ रही है, यह जनता के भरोसे और सहनशीलता के साथ खुला खिलवाड़ है।
सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल ग्रामीणों के आरोप और सामने आए वीडियो सड़क निर्माण की पोल खोल रहे हैं—
7 दिन की भी नहीं उम्र: सड़क निर्माण को अभी एक सप्ताह भी पूरा नहीं हुआ और डामर की परत जमीन छोड़ने लगी है।
हाथों से उखड़ रहा डामर: लोग अपने हाथों और पैरों से डामर की गिट्टियाँ निकाल रहे हैं, सड़क पर चलना तो दूर, खड़े रहना भी मुश्किल है।
पापड़ जैसी हालत: डामर की परत ऐसे टूट रही है, मानो मिट्टी के ऊपर सिर्फ दिखावे के लिए बिछा दी गई हो।
मानकों की खुली अनदेखी ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में न्यूनतम तकनीकी मानकों का भी पालन नहीं किया गया

  • सड़क बिछाने से पहले धूल-मिट्टी साफ नहीं की गई मजबूत बेस तैयार नहीं किया गया
  • रोलर का सही तरीके से उपयोग नहीं हुआ
  • घटिया क्वालिटी की सामग्री से केवल कागजों में सड़क तैयार कर दी गई प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मिट्टी के ऊपर सीधे पतली डामर परत डाल दी गई, जो अब पूरी तरह उखड़ रही है।

ग्रामीणों की साफ मांग नाराज ग्रामीणों ने प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—
पूरे सड़क निर्माण की उच्च स्तरीय जांच हो
दोषी ठेकेदार और लापरवाह इंजीनियरों पर सख्त कार्रवाई की जाए
सड़क का पुनर्निर्माण गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराया जाए


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