- स्कूल के पास दर्जनों क्रेशर,आदिवासी गांव देवीपुर प्रदूषण की गिरफ्त में
- स्कूल के साए में क्रेशर, जंगल में उत्खनन, आदिवासी गांव देवीपुर दमघोंटू प्रदूषण की गिरफ्त में
- 7 किलोमीटर दूर प्रशासन, 200 मीटर पर क्रेशर, देवीपुर के बच्चों की सांसों पर संकट
- केतका जंगल उजड़ रहा, देवीपुर घुट रहा: आदिवासी इलाके में अवैध उत्खनन का खेल
- जहाँ पढ़ाई होनी थी, वहाँ उड़ रही धूल: स्कूल के पास क्रेशर बने खतरा
- देवीपुर में पर्यावरण आपदा के हालात, शिवसेना ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर 06 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। जिला मुख्यालय से महज़ 7 किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी बहुल ग्राम देवीपुर आज पर्यावरणीय संकट, प्रशासनिक उदासीनता और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे का प्रतीक बनता जा रहा है। गांव की शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, जहाँ रोज़ सैकड़ों बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आते हैं, उसी विद्यालय परिसर के खेल मैदान में उच्च क्षमता का विद्युत ट्रांसफार्मर स्थापित है। विशेषज्ञों के अनुसार यह किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकता है, लेकिन संबंधित विभागों ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला प्रमुख विष्णु वैष्णव, ग्रामीण जिला प्रमुख हेमंत कुमार महंत, ब्लॉक प्रमुख मोहन सिंह टेकाम, महिला जिला अध्यक्ष पिंकी पटेल, बालकुंवर राजवाड़े, रजनी सिंह सहित बड़ी संख्या में शिवसैनिक और ग्रामीण मौजूद रहे, शिवसेना नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो देवीपुर और आसपास का इलाका गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय आपदा की ओर बढ़ जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।
स्कूल के आसपास क्रेशरों का जाल, बच्चों की सेहत पर सीधा असर- स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब विद्यालय से मात्र लगभग 200 मीटर की दूरी पर दर्जनों गिट्टी क्रेशर प्लांट संचालित पाए जाते हैं, स्कूल तक पहुंचने वाला मुख्य मार्ग इन्हीं क्रेशरों के बीच से गुजरता है, जहाँ दिन-रात भारी ट्रकों और ट्रैक्टरों की आवाजाही जारी रहती है। इससे पूरे इलाके में धूल, शोर और कंपन फैल रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों, बुज़ुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है।
सांस, आंख और त्वचा रोगों में बढ़ोतरी- शिवसेना जिला प्रमुख विष्णु वैष्णव ने बताया कि लगातार प्रदूषण के कारण गांव में दमा, सांस की बीमारी, आंखों में जलन, त्वचा रोग जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसके बावजूद न तो प्रदूषण नियंत्रण के मानकों की जांच हो रही है और न ही नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।
केतका जंगल में अवैध उत्खनन, वन संपदा पर हमला- देवीपुर से सटे केतका जंगल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उत्खनन का आरोप भी सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि भारी मशीनों के संचालन से पेड़ों की कटाई, वन भूमि का क्षरण और पर्यावरण संतुलन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या जंगल क्षेत्र में उत्खनन के लिए वैधानिक अनुमति ली गई है? यदि ली गई है तो उसकी शर्तों का पालन क्यों नहीं हो रहा?
डर और दबाव में आदिवासी ग्रामीण- गांव में अधिकांशतः आदिवासी एवं मूल निवासी परिवार रहते हैं, ग्रामीणों का आरोप है कि क्रेशर और उत्खनन से जुड़े प्रभावशाली लोग उन्हें डराते-धमकाते हैं, जिससे वे खुलकर विरोध नहीं कर पाते, वहीं, चर्चा है कि पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक कुछ अधिकारी और निर्वाचित जनप्रतिनिधि आर्थिक लाभ के चलते आंखें मूंदे हुए हैं।
कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, ये हैं प्रमुख मांगें-
शिवसेना (उद्धव गुट) ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि—
विद्यालय परिसर से तत्काल ट्रांसफार्मर हटाया जाए,
क्रेशर प्लांटों और जंगल में हो रहे उत्खनन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए,
पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो,
बच्चों और ग्रामीणों के स्वास्थ्य की मेडिकल जांच कराई जाए।
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