इंदौर,06 जनवरी 2026। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में मंगलवार को दूषित पेयजल से जुड़े मामले पर 4 से 5 याचिकाओं की एक साथ सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस घटना ने इंदौर शहर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर अब दूषित पानी की वजह से पूरे भारत में चर्चा का विषय बन गया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ इंदौर ही नहीं,बल्कि पूरे प्रदेश में स्वच्छ पानी जनता का मौलिक अधिकार है और इससे किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि भविष्य में आवश्यकता पड़ी तो दोषी अधिकारियों पर सिविल और क्रिमिनल लायबिलिटी भी तय की जाएगी। साथ ही संकेत दिए गए कि अगर पीडि़तों को मुआवजा कम मिला है तो उस पर भी अदालत उचित निर्देश जारी करेगी।
मरीजों को मुफ्त इलाज
उपलब्ध कराने के निर्देश
कोर्ट ने दूषित पानी से प्रभावित मरीजों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा इस पूरे मामले में हुई मौतों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की गई है। अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी, जिसमें मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
अब तक 17 लोगों की मौत, 421 मरीज अस्पतालों में भर्ती
बताया गया कि दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। फिलहाल 110 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि कुल 421 मरीजों को अब तक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इनमें से 311 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं। आईसीयू में 15 मरीजों का इलाज जारी है। वहीं उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें से 6 मरीजों को अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया है।
प्रशासन शिकायतों पर ध्यान देता तो मौतें नहीं होती
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि 31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे,लेकिन प्रभावित इलाकों में अब भी दूषित पानी की सप्लाई की जा रही है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि प्रशासन ने पहले की गई शिकायतों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया, यदि ऐसा किया जाता तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।
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