पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार हुए जलाशय
राष्ट्रीय पक्षी दिवस पर ‘घटती-घटना’ की विशेष रिपोर्ट







राजन पाण्डेय
कोरिया,04 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। राष्ट्रीय पक्षी दिवस के अवसर पर कोरिया जिले की फिज़ा कुछ अलग ही सुरों में बँधी दिखाई देती है,सघन वन,कल-कल बहते जलप्रपात और शांत जलाशयों के बीच कोरिया आज देशी-विदेशी पक्षियों का सेफ हेवन बनकर उभरा है,रंग-बिरंगे पंखों की फड़फड़ाहट और मधुर कलरव ने वादियों को संगीतमय बना दिया है।
सुबह की चहचहाहटः झुमका और गेज जलाशय
जिले के प्रमुख जलाशय झुमका जलविहार और गेज जलाशय इन दिनों प्रवासी पक्षियों के पसंदीदा पड़ाव बने हैं। सुबह के समय यहाँ नॉर्दर्न पिनटेल, गार्गनी और कॉमन कूट जैसे जलपक्षी नीले पानी में अठखेलियाँ करते दिखते हैं। इनकी मौजूदगी जल की स्वच्छता और आर्द्रभूमि (वेटलैंड) के स्वास्थ्य का संकेत है।
भूगोल जो रचता है जैव विविधता
कोरिया की पहाडि़याँ,साल वनों की पट्टियाँ और नदी-नालों का जाल—सब मिलकर पक्षियों के लिए आदर्श आवास रचते हैं।
विदेशी मेहमानः कड़ाके की ठंड में साइबेरिया से आने वाले डक और पिनटेल यहाँ विश्राम पाते हैं।
स्थानीय प्रजातियाँः नीलकंठ (किंगफिशर), कोयल, धनेश (हॉर्नबिल)— यहाँ के सुदृढ़ ईको-सिस्टम की गवाही देते हैं।
संरक्षण का संदेशः पक्षी दिवस पर शिकार-निषेध, आवास-संरक्षण और जलस्रोतों की रक्षा की अपील दोहराई गई।
पक्षियों का स्वर्गः गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के अनुसार गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में 230 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ दर्ज हैं। गोपद,हसदेव और बनास जैसी नदियों का प्रवाह, ऊँचे पहाड़ और घने वन इन्हें सुरक्षित आवास देते हैं।
मुख्य आकर्षक पक्षीः
धनेश (हॉर्नबिल)-वन-स्वास्थ्य का प्रतीक
रैकेट-टेल्डड्रोंगो- विशिष्ट लंबी पूँछ
लाल सिर वाला गिद्ध- संकटग्रस्त,पर यहाँ सुरक्षित
किंगफिशर, बगुले,गरुड़ – नदियों व जलप्रपातों के आसपास
पहाड़ी मैना-छत्तीसगढ़ का राज्य पक्षी (यदा-कदा दर्शन) यह उद्यान बांधवगढ़ और पलामू के बीच महत्वपूर्ण वन्यजीव कॉरिडोर भी है—पक्षियों के सुरक्षित प्रवास के लिए अनिवार्य।
जैव विविधता का विशाल संसार…
उद्यान केवल पक्षियों तक सीमित नहीं-यहाँ 753+ जैव प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
स्तनधारीः बाघ,तेंदुआ,भालू,नीलगाय
सरीसृपःअजगर कोबरा
वनस्पतिः साल (साखू),महुआ, साजा;औषधीय पौधे-तेजराज, भोजराज
चुनौतियाँ और जागरूकता की ज़रूरत शहरीकरण,जलस्रोतों पर दबाव और अनियमितताएँ पक्षियों के आवास पर संकट बढ़ाती हैं, विशेषज्ञों का मत है कि…
स्कूलों व प्रकृति केंद्रों में बर्ड आइडेंटिफिकेशन सत्र हों
गौरैया संरक्षण, मिट्टी के घोंसले/बर्तन लगाने जैसे अभियान चलें
वेटलैंड्स की नियमित मॉनिटरिंग हो
पक्षियों के कलरव के प्रमुख स्थल
झुमका जलाशय (बैकुंठपुर)ः शीतकालीन प्रवासी जलपक्षियों का बसेरा
गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यानः 200+ पक्षी प्रजातियाँ
घुनघुट्टा जलाशय (अमहर-सोनहत)ः शांत परिवेश,स्थानीय पक्षी
हसदेव नदी तट व जलप्रपातः अमृतधारा, गौरघाट—किंगफिशर व जलकावा
बीजाधुर नदी (रामगढ़)ः घने जंगलों में शानदार कलरव
टेडिया डेम (सिंघोर)ः हाल में प्रवासी पक्षियों की बड़ी मौजूदगी
कलेक्टर कोरिया की सकारात्मक पहल…
जिला वेटलैंड समिति की अध्यक्ष एवं कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के नेतृत्व में 9 दिसंबर को हुई बैठक में झुमका, गेज, छिन्दडांड़ और खैरी जलाशयों को संभावित रामसर साइट के रूप में परखने हेतु विशेषज्ञ टीम गठित की गई,टीम भौगोलिक स्थिति, भूमि व जल परीक्षण,जैव विविधता,प्रवासी पक्षियों का आगमन और मत्स्य प्रजातियाँ, इन सभी पहलुओं पर संयुक्त रिपोर्ट देगी,इसे वेटलैंड और पक्षी-संरक्षण के हित में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पर्यावरण प्रेमियों के लिए संदेश…
पक्षी केवल आकाश की शोभा नहीं,वे हमारे जंगलों के सच्चे माली हैं, बीजों का प्रसार,कीट नियंत्रण और पारिस्थितिक संतुलन,सबमें उनकी भूमिका अनमोल है, यदि जलस्रोत और जंगल सुरक्षित रहे,तो कोरिया निकट भविष्य में छत्तीसगढ़ का प्रमुख ‘बर्ड टूरिज्म’ केंद्र बन सकता है,जहाँ प्रकृति,पर्यटन और संरक्षण साथ-साथ पंख फैलाएँ।
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