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सोनहत@ खपरैल पर मोबाइल…पहाड़ पर कॉल…यही है डिजिटल इंडिया

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  • नेटवर्क ढूंढने खपरैल पर लटकाया मोबाइल…बात करने चढ़ रहे पहाड़…
  • सोनहत के वनांचलों में डिजिटल इंडिया हांफता हुआ…
  • डिजिटल इंडिया की हकीकतः नेटवर्क के लिए पहाड़,कैशलेस के लिए जद्दोजहद
  • जहां मोबाइल छत पर टांगा जाता है,वहां कैशलेस सपना कैसे साकार होगा…
  • टावर लगे,नेटवर्क गायबः सोनहत के वनांचलों में डिजिटल इंडिया ठप्प…
  • नेटवर्क का अकालः सोनहत में फोन के लिए पहाड़,भुगतान के लिए भीड़…
  • डिजिटल युग में बिन नेटवर्क कैशलेस नहीं,क्लेश बना सोनहत…
  • करोड़ों खर्च,शून्य सेवाः कब चालू होंगे सोनहत के मोबाइल टावर…

-राजन पाण्डेय-
सोनहत, 22 दिसम्बर 2025 (घटती-घटना)।
देश कैशलेस इकॉनॉमी और डिजिटल ट्रांजैक्शन की बात कर रहा है, लेकिन सोनहत के वनांचल गांव यह सवाल पूछ रहे हैं जब नेटवर्क ही नहीं, तो डिजिटल कैसे यह कोई तकनीकी बहस नहीं, रोज़मर्रा की जद्दोजहद है, यहां मोबाइल फोन खपरैल पर टांगे जाते हैं, और कॉल करने के लिए पहाड़ चढ़ना मजबूरी बन चुका है, ऐसे हालात में कैशलेस लेन-देन का दावा न सिर्फ खोखला, बल्कि ज़मीनी सच्चाई से कटे होने का प्रमाण है, सबसे बड़ी विडंबना यह है कि टावर लगाए गए, पैसे खर्च हुए, उद्घाटन हुए पर सेवा नहीं, कई जगह बीएसएनएल और जिओ के टावर वर्षों से खड़े हैं, लेकिन चालू नहीं, कहीं सोलर टावर हैं तो महीनों से खराब, सवाल सीधा है अगर चालू नहीं करना था, तो करोड़ों का खर्च क्यों क्या ये टावर विकास के प्रतीक हैं या आने वाले समय के कबाड़ नेटवर्क की कमी केवल सुविधा का मुद्दा नहीं, यह जीवन और सुरक्षा का प्रश्न है, बिना नेटवर्क 108-102 जैसी आपात सेवाएं बेअसर हैं, रिश्ते टूटते हैं, सूचनाएं अटकती हैं, और सरकारी योजनाएं कागजों तक सिमट जाती हैं। डिजिटल भुगतान की बात वहां मज़ाक बन जाती है, जहां एक खूंटी सिग्नल पाने के लिए भीड़ लगती है, यहां समस्या तकनीक की नहीं, जवाबदेही की है। आवेदन दिए गए, शिकायतें हुईं, पर संज्ञान नहीं। विभागीय उदासीनता ने डिजिटल इंडिया को डिजिटल भ्रम में बदल दिया है। सरकार अगर सचमुच कैशलेस और डिजिटल चाहती है, तो सबसे पहले नेटवर्क को बुनियादी अधिकार मानेघोषणा नहीं, डिलिवरी दे। अब वक्त है स्पष्ट कार्रवाई का बंद टावर तत्काल चालू हों, कवरेज विस्तारित हो, रखरखाव की स्थायी व्यवस्था बने, और समयसीमा के साथ जवाबदेही तय हो, वरना सोनहत पूछता रहेगा जहां फोन के लिए पहाड़ चढ़ना पड़े, वहां डिजिटल भविष्य किसके लिए देश कैशलेस इकॉनॉमी और डिजिटल ट्रांजैक्शन की ओर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड के वनांचल गांवों में यह सपना आज भी दूर की कौड़ी नजर आता है, यहां हालात ऐसे हैं कि नेटवर्क पाने के लिए लोग मोबाइल खपरैल की छत पर लटका देते हैं, तो कहीं फोन पर बात करने पहाड़ों पर चढ़ना मजबूरी बन गई है।
नेटवर्क मिलने की जगह पर रोज जुटती भीड़
रामगढ़ में एक स्थान ऐसा है जहां सूरजपुर जिले के छतरंग क्षेत्र के जिओ टावर का हल्का सिग्नल मिल जाता है, यहां अक्सर भीड़ देखी जाती है ग्रामीण फोन-पे, ऑनलाइन लेन-देन और कॉल करने यहीं पहुंचते हैं। ‘यहां बस एक खूंटी नेटवर्क आता है,’ ग्रामीणों का कहना है।
7 पंचायतें-बिन नेटवर्क सब सून
सोनहत तहसील के रामगढ़ सहित वनांचल की 7 पंचायतों में नेटवर्क समस्या गंभीर है, यहां भारत संचार निगम लिमिटेड का टावर पिछले एक माह से बंद पड़ा है। तीन साल पहले लगाए गए कई टावरों में से एक ही चालू हुआ था, वह भी अब ठप है; बाकी आज तक चालू नहीं किए गए। ग्रामीणों ने कई बार बीएसएनएल कार्यालय में निवेदन किया, लेकिन समाधान शून्य रहा।
जहां नेटवर्क ही नहीं…वहां कैशलेस कैसे…
सोनहत विकासखंड के ग्राम आनंदपुर दसेर समेत दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह नदारद है,राज्य सीमा से लगे होने के कारण कभी-कभार पहाडि़यों या ऊंचे मकानों पर मध्यप्रदेश सर्कल का हल्का सिग्नल पकड़ में आ जाता है, ग्रामीण बताते हैं फोन आए तो पता चल सके, इसलिए मोबाइल छत पर टांगना पड़ता है; बात करनी हो तो ऊंचाई की तलाश, यहां डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाएं और ऐप आधारित लेन-देन की बात करना ग्रामीणों के लिए क्लेश बन चुका है।
सोलर टावर लगे…पर महीनों से खराब…
शासन स्तर पर सोनहत विकासखंड के तुर्रीपानी-रामगढ़ में सौर ऊर्जा से संचालित मोबाइल टावर लगाया गया,मगर उसका कवरेज सीमित है और रामगढ़ का टावर महीनों से खराब पड़ा है। आपात स्थिति में सूचना देना भी कठिन हो गया है। कई बार आवेदन देने के बावजूद विभागीय उदासीनता बनी हुई है।
बिन नेटवर्क…शिकायत भी कैसे…
ग्रामीणों की पीड़ा यह है कि समस्या बताएं तो किसे नेटवर्क न होने से रिश्तेदारों से संपर्क टूट गया है, 108 और 102 जैसी आपात सेवाएं भी बिना नेटवर्क बेकार साबित हो रही हैं, लोगों की मांग है कि शासन-प्रशासन तत्काल संज्ञान ले।
टावर लगे…चालू कोई नहीं…
ग्रामीणों के अनुसार उधेनी, सिंघोर, उग्यव, सूक्तरा, मझगांवां, रेवला समेत कई गांवों में बीएसएनएल और जिओ के टावर लगाए गए, लेकिन एक भी चालू नहीं, लोग सवाल कर रहे हैं जब चालू नहीं करना था तो करोड़ों का खर्च क्यों कुछ का डर है कि सिंघोर की तरह बाकी टावर भी कबाड़ न बन जाएं।
क्या कहते हैं लोग…
गणेश गुप्ता (सांसद प्रतिनिधि) : रामगढ़ में बार-बार सेवा बंद होने से परेशानी बढ़ी है,स्थायी समाधान चाहिए।
तेजबली राजवाड़े (ग्रामीण) : कई बार संपर्क किया, पर सुनवाई नहीं हुई।
पुष्पेंद्र राजवाड़े (अध्यक्ष, कोरिया जन सहयोग समिति) : 4जी टावर चालू करने ज्ञापन देंगे,नहीं तो आंदोलन होगा।
प्रकाश चन्द्र साहू (ब्लॉक अध्यक्ष, यूथ कांग्रेस) : सांसद महोदया से मिलकर ज्ञापन सौंपा जाएगा।
समय लाल कमलवंशी (भाजपा नेता) : मामला जिलाध्यक्ष और विधायक महोदया के संज्ञान में लाकर तत्काल समाधान का प्रयास करेंगे।


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