-संवाददाता-
बलरामपुर,15 दिसम्बर 2025
(घटती-घटना)।
जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत स्थित चुनचुना-पुंदाग क्षेत्र प्रकृति की अनुपम सुंदरता के लिए जाना जाता है। चारों ओर फैली पहाडि़याँ, झरने और घने हरे-भरे वन इस क्षेत्र को अद्वितीय बनाते हैं। किंतु लंबे समय तक दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों तथा नक्सल प्रभाव के कारण यह इलाका विकास की मुख्यधारा से कट गया था। चुनचुना-पुंदाग, पीपरढाबा, चरहू एवं बरपाट जैसे गाँव विशेष पिछड़ी पहाड़ी कोरवा जनजाति के निवास क्षेत्र हैं, जहाँ वर्षों तक बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहा। पानी, सड़क, बिजली और शिक्षा जैसी आवश्यक सुविधाएँ यहाँ के निवासियों के लिए किसी सपने से कम नहीं थीं। लेकिन शासन की सुदृढ़ नक्सल उन्मूलन नीति, सुरक्षा बलों की सतत उपस्थिति और जिला प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली के चलते अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। प्रशासन और जनता के बीच विश्वास का सेतु मजबूत हुआ है और शासकीय योजनाएँ दुर्गम पहाडि़यों को पार कर गाँवों तक पहुँचने लगी हैं। इसी परिवर्तन की एक प्रेरक मिसाल उस समय देखने को मिली, जब चरहू और पीपरढाबा के स्कूली बच्चों ने प्रशासन से अपने विद्यालय परिसर में पेयजल की व्यवस्था करने की हृदयस्पर्शी मांग रखी कि ‘‘सर हमारे स्कूल के पास पानी की व्यवस्था कर दीजिए’’ मासूम बच्चों की आवाज़ जिला कलेक्टर श्री राजेंद्र कुमार कटारा तक पहुँची। कलेक्टर श्री कटारा ने त्वरित संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों को तत्काल स्थल निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। निरीक्षण उपरांत चरहू प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला, पीपरढाबा आंगनबाड़ी केंद्र तथा सोनपुर के बरपाट में हैंडपंप स्थापना का निर्णय लिया गया। दुर्गम पहाड़ी रास्तों, नदी-नालों और घने जंगलों के कारण बोरिंग मशीनों को गाँवों तक पहुँचाना चुनौतीपूर्ण था, किंतु प्रशासनिक टीम के अथक प्रयासों से वैकल्पिक मार्ग तैयार किए गए और कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया।
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