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नई दिल्ली@कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम्’ के टुकड़े किए : पीएम मोदी

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पीएम मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर चर्चा की शुरुआत की
नई दिल्ली,08 दिसम्बर 2025। पीएम मोदी ने सोमवार को लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने एक घंटे की स्पीच में कहा ‘वंदे मातरम् अंग्रेजों को करारा जवाब था, ये नारा आज भी प्रेरणा दे रहा। आजादी के समय महात्मा गांधी को भी यह पसंद था। उन्हें यह गीत नेशनल एंथम के रूप में दिखता था। पीएम ने कहा, उनके लिए इस गीत की ताकत बड़ी थी। फिर पिछले दशकों में इसके साथ इतना अन्याय क्यों हुआ। वंदे मातरम् के साथ विश्वासघात क्यों हुआ। वो कौन सी ताकत थी, जिसकी इच्छा पूज्य बापू की भावनाओं पर भी भारी पड़ी। पीएम मोदी ने एक घंटे की स्पीच में वंदे मातरम् 121 बार, देश 50, भारत 35, अंग्रेज 34, बंगाल 17, कांग्रेस का 13 बार जिक्र किया। उन्होंने वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी का नाम 10 बार, नेहरू 7 बार, महात्मा गांधी 6 बार, मुस्लिम लीग 5 बार, जिन्ना 3 बार,संविधान 3 बार, मुसलमान 2 बार, तुष्टिकरण 3 बार कहा।
वंदे मातरम् का स्मरण इस
सदन का सौभाग्य : मोदी

‘जिस मंत्र ने, जिस जयघोष ने देश के आजादी के आंदोलन को ऊर्जा और प्रेरणा दी थी, त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था, उस वंदे मातरम् का पुण्य स्मरण करना इस सदन में हम सबका बहुत बड़ा सौभाग्य है।’ जब वंदे मातरम् के 50 वर्ष पूरे हुए थे, तब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। जब इसके 100 वर्ष पूरे हुए, तब देश आपातकाल के अंधेरे में था। आज जब इसके 150 वर्ष हो रहे हैं, तो भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और तेजी से आगे बढ़ रहा है।
जिन्ना के सामने झुके नेहरू : मोदी
मोदी ने कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना ने लखनऊ से 15 अक्टूबर 1936 को वंदे मातरम् के खिलाफ नारा बुलंद किया। कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू को अपना सिंहासन डोलता दिखा। पीएम ने कहा कि बजाय इसके कि नेहरू मुस्लिम लीग के आधारहीन बयानों को करारा जबाब देते, उसकी निंदा करते, लेकिन उल्टा हुआ। उन्होंने वंदे मातरम् की ही पड़ताल शुरू कर दी।
वंदे मातरम् के 150 साल पर भारत तेजी से बढ़ रहा : मोदी
पीएम ने कहा…देश आपातकाल
की जंजीरों में जकड़ा था…

मोदी ने कहा कि ये चर्चा सदन की प्रतिबद्धता को तो प्रकट करेगी, लेकिन आने वाली पीढि़यों को लिए शिक्षा का कारण बन सकती है। अगर हम मिलकर इसका सद्पयोग करें। अभी हमने हमारे संविधान के 75 साल गौरवपूर्ण मनाए है। आज देश सरदार पटेल और बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती भी मना रहा है। गुरु तेग बहादुर की 150वीं बलिदान दिवस भी मना रहा है। वंदे मातरम् 150 साल की यात्रा कई पड़ावों से गुजरी है। वंदे मातरम् के जो 50 साल हुए तो देश गुलामी में जीने के लिए मजबूर था। वंदे मातरम् के 100 साल हुए तब देश आपातकाल की जंजीरो में जकड़ा था।
बंगाल के लिए वंदे मातरम्
गली-गली का नारा बन गया : मोदी

हमारे जांबाज सपूत बिना किसी डर के फांसी के तख्त पर चढ़ जाते थे और आखिरी सांस तक वंदे मातरम् कहते थे। हमारे अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों ने वंदे मातरम् कहते हुए फांसी को चूम लिया। बंगाल की एकता के लिए वंदे मातरम् गली-गली का नारा बन गया था, और यही नारा बंगाल को प्रेरणा देता था। जवाहरलाल नेहरू को अपना सिंहासन डोलता दिखा। बजाय इसके कि नेहरू मुस्लिम लीग के आधारहीन बयानों को करारा जबाब देते, उसकी निंदा करते, लेकिन उल्टा हुआ। उन्होंने वंदे मातरम् की ही पड़ताल शुरू कर दी। नेहरू ने 5 दिन बाद नेताजी को चिट्ठी लिखी। उसमें जिन्ना की भावना से सहमति जताते हुए लिखा कि वंदे मातरम् की आनंदमठ वाली पृष्ठभूमि से मुसलमानों को चोट पहुंच सकती है। वे लिखते हैं- ये जो बैकग्राउंड है, इससे मुस्लिम भड़केंगे।
टैगोर गीत गाते हुए अंग्रेजों के
खिलाफ लड़ाई में उतरे : प्रियंका

प्रियंका गांधी ने कहा कि 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने यह गीत गाया। 1905 में रवींद्रनाथ टैगोर ये गीत गाते हुए ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई में उतरे। ये गीत मातृभूमि के लिए मर मिटने की भावना को जगाता है। 1930 के दशक में सांप्रदायिक की राजनीति उभरी तब ये गीत विवादित होने लगा। उन्होंने आगे कहा कि 1937 में नेताजी कोलकाता में कांग्रेस अधिवेशन का आयोजन कर रहे थे। 20 अक्टूबर का लेटर उन्होंने सुनाया। उनके तीन पहले नेताजी ने नेहरू को एक चिठ्ठी लिखी थी। इसका पीएम मोदी ने जिक्र नहीं किया।
वंदे मातरम् सांप्रदायिक राजनीति
को अस्वीकार करने वाला गीत : अखिलेश

अखिलेश यादव ने कहा…सदन में यहां बैठे लोगों को पता होना चाहिए कि पहली बार ‘वंदे मातरम्’ कब गाया गया था। उन ‘सूचना देने वालों’ से यह पूछना चाहिए कि आजादी के बाद भी उन्होंने अपना अलग राष्ट्रगीत क्यों लिखा और तिरंगा क्यों नहीं फहराया। ‘वंदे मातरम्’ के पीछे की भावना सांप्रदायिक राजनीति को अस्वीकार करने की थी। उत्तर प्रदेश में हमारे नेताओं ने ऐसी राजनीति को खत्म किया, जिसे अब भाजपा ने फिर शुरू कर दिया है।
इंदिरा गांधी ने संविधान को
तार-तार किया : अनुराग ठाकुर

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा…एक समय वो था जब वंदे मातरम् का शताब्दी वर्ष था। उस समय आपातकाल लगाकर देश को अंधकार में डालने का काम किया गया। उन्होंने आगे कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश के संविधान को तार-तार करने का काम किया था। उस समय तो चर्चा भी नहीं हो पाई थी।

आज पीएम मोदी अपने भाषण में वंदे मातरम् का इतिहास और महत्व को देश के सामने रखा है।
गोगोई बोले- केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत में ‘राष्ट्र’ को नहीं समझा
गोगोई ने कहा कि राष्ट्रगीत में जो राष्ट्र है, उसे आपने (केंद्र सरकार) ने कभी नहीं समझा है। आज अगर भारत मजबूत राष्ट्र है, वो इसलिए क्योंकि इसमें बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल, पंजाब, कर्नाटक, नगालैंड सभी राज्यों की राष्ट्रभक्ति समाई हुई है। हमारे देश में धर्म अनेक, भाषा अनेक, पैगंबर एक, लेकिन संविधान का ग्रंथ सिर्फ एक है। आप कहते हैं कि वंदे मातरम नेशनल एंथम बने, लेकिन जब पूरे देश ने जन-गण-मन को राष्ट्रगान का तवज्जो दिया, तो आपके राजनीतिक पूर्वजों ने न तिरंगे को तवज्जो दी, न राष्ट्रगान को तवज्जो दी। आप क्या राष्ट्रभक्ति की बात करते हैं। आज भारत के लोग अनेक समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन उसका सदन में एक बार भी चर्चा नहीं है। दिल्ली में बम विस्फोट हुआ, पीएम मोदी ने एक बार फिर उस पर चर्चा नहीं की। लोग प्रदूषण से परेशान है, सांस नहीं ले पा रहे हैं।ाज करेंसी 100 तक पहुंच गई है। न सीमा सुरक्षित है, न दिल्ली सुरक्षित है, न करेंसी सुरक्षित है, न वायु सुरक्षित है, न उद्योग सुरक्षित है। बड़े-बड़े उद्योगपतियों के पैर में देश का नागरिक पड़ा हुआ है।


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