दो जिलों की दो अलग भर्तियाँ लेकिन गड़बड़ी का पैटर्न एक जैसा…क्या यह सिर्फ इत्तेफाक?

- दो जिलों में भर्ती विवाद…और शिकायतों में बार-बार एक ही अधिकारी का नाम!
- फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र,गलत स्कोरिंग,पसंदीदा चेहरों को लाभ…पूर्व विधायक का गंभीर आरोप
- महिला-बाल विकास एवं मिशन वात्सल्य केंद्रों में बड़ी गड़बड़ी का आरोप!
- पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने कलेक्टर को सौंपी 28 नियुक्तियों की संदिग्ध सूची
- चयनित 28 लोगों की पूरी लिस्ट प्रशासन के सामने,दस्तावेज़ सत्यापन की मांग तेज
- एमसीबी और सूरजपुर दोनों जगह भर्ती विवाद में एक ही अधिकारी का नाम सामने आने से पारदर्शिता पर बड़े सवाल
- भर्ती में बड़ा खेल एमसीबी के बाद सूरजपुर में भी वही पैटर्न उजागर, अनुभव
- बदल गए, प्रतिशत बढ़ गए, दोहरे रिकॉर्ड, एक उम्मीदवार दो वर्गों में चयनित

-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर/एमसीबी,27 नवम्बर 2025 (दैनिक घटती-घटना)। महिला एवं बाल विकास विभाग की भर्तियों में जिला बाल संरक्षण इकाई, मिशन वात्सल्य, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098,केस वर्कर, सुपरवाइजर और अन्य संवेदनशील पदों पर जारी चयन सूचियों ने एमसीबी और सूरजपुर दोनों जिलों में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है, सबसे चौंकाने वाली बात दोनों जिलों की शिकायतों में एक ही अधिकारी का नाम उठने से चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल,महिला एवं बाल विकास विभाग की संविदा भर्ती में पहले एमसीबी जिले में गड़बड़ी की शिकायतें,और अब सूरजपुर में सूची को लेकर बड़ा विवाद इन दोनों जगहों पर एक ही अधिकारी की तैनाती ने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर तीखा सवाल खड़ा कर दिया है, यह आरोप अभ्यर्थियों और स्थानीय संगठनों की ओर से उठे हैं दो जिलों में दो अलग भर्तियाँ, लेकिन गड़बड़ी का पैटर्न एक जैसा क्या यह सिर्फ इत्तेफ़ाक है? एमसीबी जिले में संचालित नवा बिहाना योजना अंतर्गत सखी वन स्टॉप सेंटर,महिला सशक्तिकरण केंद्र,चाइल्ड हेल्पलाइन,मिशन वात्सल्य बाल संरक्षण इकाई, किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल कल्याण समिति सहित कई महत्वपूर्ण संवेदनशील विभागों में भर्ती घोटाले का आरोप सामने आया है,पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कलेक्टर को पत्र लिखकर 28 चयनित नामों की सूची,पदनाम व संस्थाओं के साथ सौंपते हुए कहा कि इन नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार,फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र और पसंदीदा आवेदकों को नियम तोड़कर पद दिए गए हैं, घटती-घटना इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।
आरोपः कोई योग्यता नहीं,फिर भी चयन…फर्जी अनुभव पत्रों से बढ़वाए अंक
पूर्व विधायक के अनुसार कई अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत अनुभव प्रमाण पत्र मान्य नहीं हैं, अंकसूची में मनचाहे ढंग से अंक जोड़े गए, योग्यता व अनुभव में कम अभ्यर्थियों को भी उच्च स्कोर दिखाकर चयन किया गया, कई संस्थाओं ने ऐसे अनुभव पत्र जारी किए जिनकी वैधता विवादित है उन्होंने कहा कि अंक तालिका में हेरफेर कर पसंदीदा चेहरों को भर्ती देने की सारी तैयारी की गई।
शिकायतें, दस्तावेज़,अनुभव पत्र सब जमा हुए…लेकिन सूची वही
अभ्यर्थियों ने विभाग को बड़ी संख्या में आवेदन, दस्तावेज़ और विरोध दर्ज कराए थे इसके बावजूद वही नाम अंतिम सूची में रखे गए जिन पर सबसे ज्यादा आपत्तियाँ थीं,न तो अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच हुई, न पात्र-अपात्र सूची की पुनर्समीक्षा,और न ही आवेदकों को सुनवाई का अवसर मिला,अभ्यर्थियों का आरोप सारी प्रक्रिया कागज़ों में पहले ही तय थी, इंटरव्यू सिर्फ रस्म निभाना था।
सवाल उठने की वजह क्या है?
अभ्यर्थियों द्वारा शिकायतों में कहा गया कि पात्र-अपात्र सूची में विरोधाभास,अनुभव अंकों में कटौती/वृद्धि,एक ही उम्मीदवार दो वर्गों में चयनित,शिकायतों के बावजूद वही सूची जारी, दस्तावेज़ जाँचे बिना लिस्ट फाइनल और सबसे बड़ी बात एमसीबी में ऐसे ही विवाद उठे थे और अब सूरजपुर में भी वही पैटर्न सामने आया, दोनों स्थानों पर सूची से जुड़ी आपत्तियों में एक ही अधिकारी का नाम दर्ज होने के कारण अभ्यर्थियों में यह चर्चा तेज है कि क्या भर्ती प्रक्रिया वास्तव में निष्पक्ष थी या फिर प्रबंधन स्तर पर एक ही पैटर्न दोहराया गया?
दो जिलों की भर्तियों में एक ही नाम क्यों गूँज रहा?
अभ्यर्थियों का कहना है जहाँ भी एक ही अधिकारी की जिम्मेदारी होती है, वहाँ चयन विवाद सामने आते हैं…क्या यह सिर्फ संयोग हो सकता है? यह आरोप भले साबित न हों, लेकिन दो जिलों में लगातार एक जैसे विवादों का उभरना निश्चित रूप से राज्य स्तर की जांच को मजबूर करने वाला मुद्दा बन गया है।
अब यह ‘एक जिले’ का मामला नहीं पूरा पैटर्न जांच योग्य : दो जिलों में समान प्रकार की शिकायतें, समान प्रकार का विरोध, समान प्रकार के विरोधाभास, और शिकायतों में एक ही अधिकारी का नाम दो बार आने से यह मामला राज्यस्तरीय जांच का विषय बन चुका है,यह केवल आरोप नहीं—दो जिलों के दस्तावेज़ एक साथ कई सवाल खड़े कर रहे हैं।
अनुभव अंकों का खेल, दोहरे अनुभव और दोहरे प्रतिशत
दस्तावेज़ बताते हैं, कई उम्मीदवारों के अनुभव प्रमाण पत्र दो जिलों में दो अलग रिकॉर्ड दिखा रहे हैं, किसी का अनुभव बढ़ा, किसी का कम किया गया, प्रतिशत में बड़ा अंतर, अनुभव अंकों की गणना में विरोधाभास पात्रता तय करने में एक जैसा पैटर्न, सबसे विवादित मामले— पूजा गोस्वामी – दोहरा अनुभव, दो अलग प्रमाण पत्र, यशोदा गुप्ता – दो वर्गों में चयन, मनीषा कुशवाहा – दो वर्गों में प्रतिक्षा, प्रकाश राजवाड़े – प्रतिशत विवाद,खुशबू जयसवाल – अनुभव मान्यता विवाद,फुलेश्वरी/बुधन राम – सत्यापन विवाद
एमसीबी में भी यही हुआ था… अब सूरजपुर में भी वही कहानी अभ्यर्थियों का आरोप
कुछ महीने पहले एमसीबी जिले में भी डब्ल्यूसीडी भर्ती को लेकर गंभीर विवाद उठा था, अभ्यर्थियों का कहना है एमसीबी में भी वही अधिकारी,सूरजपुर में भी वही…और दोनों जगह एक जैसा ही चयन पैटर्न। क्या यह सिर्फ संयोग हो सकता है? कई अभ्यर्थियों ने कहा जहाँ बंसल जैसे अधिकारी होते हैं, वहाँ पारदर्शी भर्ती की उम्मीद कम होती है, यह अभ्यर्थियों का आरोप है—दैनिक घटती-घटना इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।
शिकायतों की अनदेखी प्रक्रिया पर ही सवाल
अभ्यर्थियों के लिखित आवेदन, दस्तावेज़, अनुभव पत्र और गड़बड़ी के प्रमाण देने के बावजूद कोई फैक्ट-फाइंडिंग टीम नहीं बनी, कोई सत्यापन आदेश जारी नहीं, कोई पड़ताल नहीं,और अंत में उसी सूची को अंतिम कर दिया, अभ्यर्थियों का सीधा सवालः अगर सुनवाई करनी ही नहीं थी, तो शिकायतें मंगाई क्यों गईं? प्रक्रिया सिर्फ औपचारिकता क्यों बनाई गई?
सूरजपुर मामले में सबसे बड़ा विरोधाभासः इंटरव्यू एक—चयन दो-दो वर्गों में!-
सुपरवाइज़र पदः
ओबीसी में चयनितः दिनेश यादव
प्रतिक्षा : मनीषा कुशवाहा
अनारक्षित में प्रतिक्षाः वही मनीषा कुशवाहा
केस वर्कर पदः
अनारक्षित में चयनितः यशोदा गुप्ता
ओबीसी में भी चयनितः वही यशोदा गुप्ता
दोनों वर्गों में प्रतिक्षाः प्रकाश राजवाड़े
सवाल सीधाः अगर इंटरव्यू, अंक, दस्तावेज़ एक हों—तो दो वर्गों में दो अलग निर्णय कैसे? यह विभागीय मानकों से बड़ी असंगति मानी जा रही है।
प्रशासनिक प्रक्रिया पर बड़ा प्रश्नचिन्ह…भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मूल प्रश्न-
सवालः शिकायतों पर जांच क्यों नहीं?
सवालः दस्तावेज़ सत्यापन समिति क्यों नहीं बनी?
सवालः दोनों जिलों में एक जैसा विरोधाभास कैसे?
सवालः क्या चयन पहले से तय थे?
सवालः दोहरा चयन और दोहरे प्रतिशत की जांच किस स्तर पर होगी?
ये सभी मामले अब व्यक्ति नहीं—पूरी प्रणाली पर सवाल उठाते हैं।
पूर्व विधायक का बड़ा आरोप,तत्कालीन अधिकारी मंत्री के खास, मनमाफिक पोस्टिंग और मनमाफिक भर्ती- महिला एवं बाल विकास विभाग की भर्ती प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के बीच एक और बड़ा राजनीतिक आरोप सामने आया है, पूर्व विधायक ने दावा किया है कि भर्ती प्रक्रिया संचालित करने वाले तत्कालीन अधिकारी विभागीय मंत्री के खास माने जाते हैं,और इसी खास संबंध का फायदा लेकर उन्होंने न सिर्फ अपनी मनचाही पोस्टिंग ली, बल्कि एमसीबी से लेकर मंत्री के गृह जिलों तक मनमाफिक तरीके से काम किया,पूर्व विधायक के अनुसार,एमसीबी में मनचाहे ढंग से काम करने के बाद अधिकारी को मंत्री ने अपने जिले में बुला लिया, आरोप यह भी है कि वहां पहुंचकर भी उन्होंने उसी तर्ज पर भर्ती प्रक्रिया चलाई, जिस पर अब लगातार सवाल उठ रहे हैं।

28 चयनित नामों की सूची प्रशासन को सौंपी…पूरा विवरण उजागर
पूर्व विधायक ने 28 नामों की पूर्ण सूची भी संलग्न की है जिनमें शामिल हैं,संरक्षण अधिकारी,सामाजिक कार्यकर्ता,आउटरीच वर्कर,काउंसलर, केस वर्कर,परीक्षा अधिकारी,बाल संरक्षण अधिकारी,चाइल्ड हेल्पलाइन सुपरवाइजर,परियोजना समन्यक,लेखापाल,डेटा एनालिस्ट आदि सूची में कोरिया,सुरजपुर,लखनपुर, सहित कई क्षेत्रों से चयनित नाम सम्मिलित हैं, गुलाब कमरों ने कहा कि अनुभव प्रमाण पत्रों और अंकों की जांच की जाए, कई मामलों में फर्जी अनुभव दिखाकर चयन कराया गया है।
जिले के अधिकारी ने मनमाने ढंग से चयन किया,पूर्व विधायक का आरोप
पत्र में आरोप है कि जिला अधिकारी शुभम बंसल द्वारा पदों का मनचाहे ढंग से चयन किया गया,अनुभव तथा कोशल परीक्षा अंक मैनिपुलेट कर अपने पसंदीदा लोगों को लाभ पहुंचाया गया, विश्वविद्यालय द्वारा जारी न किए गए डिप्लोमा/प्रमाण-पत्रों को भी मान्य मानकर चयन किया गया,कई संस्थाओं के संदिग्ध अनुभव पत्रों के आधार पर चयन किया गया उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक अनियमितता बताते हुए तत्काल जांच की मांग की है।
चहेतों को लाभ पहुँचाने भर्ती में की गई गड़बड़ी : गुलाब कमरों
पूर्व विधायक ने कहा यह भर्ती निष्पक्ष नहीं है,चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही। कुछ लोगों को लाभ पहुँचाने के लिए पूरी प्रक्रिया मोड़ दी गई,सभी प्रमाण-पत्रों की जांच आवश्यक है।
कलेक्टर से कार्रवाई की मांग, सभी प्रमाण पत्रों की जांच हो…
पत्र के अंत में पूर्व विधायक ने मांग की सभी 28 आवेदकों के अनुभव प्रमाण-पत्रों की जांच हो, संदिग्ध प्रमाण पत्र जारी करने वाली संस्थाओं की वैधता की जांच, अंक तालिका व चयन प्रक्रिया की पुनः समीक्षा,गलत चयन पाए जाने पर तत्काल निरस्त कर नई प्रक्रिया चले
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