- खबर के बाद दौड़े अधिकारी,पर शहर में अचानक ‘भिक्षावृत्ति कोई बच्चा नहीं’
- क्या भिक्षावृत्ति भी तारीख देख-देखकर होती है?


-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,18 नवम्बर 2025 (घटती-घटना)। घटती-घटना समाचार-पत्र में खबर लगते ही जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड लाइन हरकत में तो आई,लेकिन जिस ‘निरीक्षण’ की कहानी उन्होंने सुनाई,उसने पूरे शहर को हैरान कर दिया,कहा कि उन्हें एक भी बच्चा भीख मांगते नहीं मिला! अब सवाल यह नहीं कि बच्चे कहाँ गए…सवाल यह है कि अधिकारी किस हैसियत में जनता की आंखों में धूल झोंकने उतरे थे?
क्या बच्चे भी निरीक्षण टीम के लिए पहले से लाइन लगाकर इंतजार करते हैं?
17 नवंबर को रिपोर्ट में जिस हकीकत को पूरा सूरजपुर देख रहा था—चौराहों पर नाबालिग बच्चे भीख मांगते,दौड़ते, रुकते,रोते—वही बच्चे अगले ही दिन निरीक्षण टीम को ‘गायब’ मिले! क्या यह महज संयोग है? या फिर बच्चों को नहीं,सच्चाई को छिपाने निकली थी टीम?
कई सालो से जमे हुए अधिकारी सिस्टम के सबसे बड़े अवरोध
वही अधिकारी,वही कुर्सियाँ,वही बेफिक्री सालों से एक ही जगह जमे बैठे अधिकारी क्या कभी सच्चाई देख भी पाएंगे? या फिर कुर्सी बचाने की मशीनरी इतनी मजबूत हो चुकी है कि शहर की बदहाली उन तक पहुँचना ही बंद हो गई है? सूरजपुर में भिक्षावृत्ति बढ़ रही है, पर विभाग की रिपोर्ट में सब ठीक—क्या यह सिफऱ् एक कागजी नाटक है?
निरीक्षण का परिणाम
‘कुछ नहीं मिला ‘- क्या महान निष्कर्ष है यह!- 25 दुकानों, बस स्टैंडों,चौराहों, बाजारों में घूम कर भी टीम को एक भी बच्चा नहीं मिला,यह वही स्थान हैं जहाँ रोज़ बच्चे घंटों खड़े रहते हैं,और अधिकारी रोज़ उनसे मुँह मोड़कर निकल जाते हैं। तो आज अचानक शहर इतना ‘शुद्ध’ कैसे हो गया? क्या विभाग ने समय देखकर निरीक्षण किया? स्थान चुनकर रिपोर्ट बनाई? या फिर सच खोजने की हिम्मत ही नहीं की?
खबर को झूठा साबित करने का बचकाना प्रयास :
निरीक्षण का समय, तरीका और परिणाम सब कुछ बताता है कि यह ‘अभियान’ सच्चाई खोजने से ज़्यादा घटती-घटना समाचार-पत्र के रिपोर्ट को कमजोर करने की कोशिश था,लेकिन अफसोस झूठे निरीक्षण से सच्चाई बदली नहीं जा सकती,जो बच्चे कल सड़क पर थे,वे आज भी सड़क पर ही हैं।
सवाल भारी हैं, जवाब देने की हिम्मत किसमें है?
- क्या विभाग सच में बच्चों को ढूंढने गया था
- या पहले से लिखी रिपोर्ट जमा करने?
- क्या अधिकारी शहर की जमीनी हकीकत से कट चुके हैं
- या जानबूझकर आँखें बंद कर ली हैं?
- क्या भिक्षावृत्ति रैकेट पर कोई कार्रवाई होगी
- या हर बार की तरह फाइलें बंद करके मामला निपटा दिया जाएगा?
- क्या वर्षों से जमे अधिकारी कभी हटाए जाएंगे
- या बच्चों का बचपन इसी तरह सड़क पर ही सड़ता रहेगा?
निचोड़
अगर निरीक्षण ऐसे ही होंगे,तो भिक्षावृत्ति खत्म नहीं होगी,जिम्मेदारी खत्म होगी, सूरजपुर की सच्चाई यह है कि बच्चे भीख मांग कर पेट भर रहे हैं, और विभाग निरीक्षण की फाइलें भरकर अपनी पीठ,जब तक सिस्टम ईमानदार नहीं होगा,न तो बच्चे बचेंगे,न बचपन।
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