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बिलासपुर@लालखदान तालाब में दर्दनाक हादसा,नहाने गए चार बच्चों में से दो की डूबकर मौत

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बिलासपुर,16 नवम्बर 2025। रविवार की सुबह लाल खदान क्षेत्र में उस समय कोहराम मच गया जब नहाने गए चार मासूम बच्चों में से दो की तालाब में डूबकर मौत हो गई। यह दर्दनाक घटना ग्राम पंचायत महमंद क्षेत्र के बेलभाठा मैदान के पास स्थित तालाब की है, जहाँ नयापारा शिव विहार कॉलोनी के चार बच्चे छुट्टी का दिन बिताने नहाने पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चारों बच्चे तालाब की पचरी के पास नहा रहे थे। पानी ऊपर से उथला था, लेकिन कुछ ही कदम आगे बढ़ते ही अचानक गहराई थी। इसी बीच एक बच्चे का पैर फिसला और वह भीतर खिंच गया। उसे बचाने के प्रयास में बाकी तीन बच्चे भी गहरे हिस्से की ओर बढ़ गए और देखते ही देखते सभी चार बच्चे पानी में संघर्ष करने लगे। तीन बच्चों ने पूरी कोशिश की कि वे पानी की सतह पर टिके रहें। इस संघर्ष में दो बच्चे प्रियांशु और उदयन किसी तरह तैरकर बाहर निकलने में सफल रहे। लेकिन 14 वर्षीय पवन और 13 वर्षीय साईं राव गहराई में फंस गए और कुछ ही क्षणों में पानी में समा गए। हादसे की खबर फैलते ही आसपास के लोग तालाब किनारे इकट्ठा हो गए।
कुछ लोगों ने बच्चों को खोजने की कोशिश भी की, लेकिन तालाब की अत्यधिक गहराई और फिसलन ने रेस्क्यू प्रयासों को कठिन बना दिया। सूचना मिलते ही तोरवा पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। कुछ ही देर में एसडीआरएफ की टीम भी स्थल पर पहुँची। गोताखोरों ने लगातर घंटों तक सर्च ऑपरेशन चलाया। शुरुआत में कोई सफलता नहीं मिली, लेकिन दोपहर से शाम तक करीब चार घंटे की लगातार कोशिशों के बाद दोनों बच्चों के शवों को तालाब से निकाल लिया गया।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, पूरे क्षेत्र में मातम
जैसे ही बच्चों के शव तालाब किनारे लाए गए, उनके परिवारजन फूट-फूटकर रोने लगे। दृश्य इतना दर्दनाक था कि आस-पास खड़े लोगों की भी आंखें नम हो गईं। पूरा शिव विहार कॉलोनी और महमंद क्षेत्र मातम में डूब गया है। लोग इस दुखद घटना पर पीडि़त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
स्थानीय निवासियों ने बताया कि तालाब का गहरा हिस्सा अचानक नीचे की ओर धँसा हुआ है। इस स्थान पर नहाने जाने से पहले बच्चों या ग्रामीणों को कोई चेतावनी संकेत या बोर्ड भी नहीं लगाया गया था। नतीजतन मासूम बच्चे बिना जोखिम समझे पानी के गहरे हिस्से में चले गए। यह घटना खुले व अनियंत्रित जलाशयों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन की ओर से उचित चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग या गहराई दर्शाने वाले संकेत लगाए गए होते, तो शायद यह हादसा टल सकता था।


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