-संवाददाता-
सूरजपुर,07 नवंबर 2025
(घटती-घटना)।
कभी-कभी जिंदगी ऐसी कहानियाँ लिख देती है जो फिल्मी लगती हैं,मगर सच्चाई उससे कहीं ज्यादा भावुक होती है…ऐसी ही एक सच्ची कहानी है उस महिला की, जो 13 लंबे सालों तक अपने घर-परिवार से बिछड़ी रही,और फिर सखी वन स्टॉप सेंटर सूरजपुर की संवेदनशील पहल से अपने अपनों की गोद में लौट पाई..
रामानुजनगर रेलवे स्टेशन के पास एक अज्ञात अर्धविक्षिप्त महिला घायल अवस्था में रेलवे ट्रैक किनारे बैठी पाई गई थी,,राहगीरों ने इसकी सूचना संबंधित विभाग को दी..महिला की सुरक्षा और देखभाल के लिए उसे सखी वन स्टॉप सेंटर सूरजपुर लाया गया…सखी टीम ने न केवल तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई, बल्कि इलाज के बाद उसके मन की परतें समझने की कोशिश भी शुरू की…शुरुआत में महिला कुछ भी स्पष्ट नहीं बता पा रही थी.. उसकी जुबान पर बस टूटी-फूटी बातें थीं,जो किसी गहरी पीड़ा की गवाही दे रही थीं..लेकिन बातचीत के दौरान जब उसने बिहारी भाषा,में बोलना शुरू किया और बार-बार छपरा बहास, का नाम लिया,तो सखी टीम को एक उम्मीद की किरण दिखी…उन्होंने तुरंत संबंधित थाने और बिहार के सखी वन स्टॉप सेंटरों से संपर्क साधा…सखी स्टाफ ने सोशल मीडिया और व्हॉट्सऐप के जरिए महिला की जानकारी साझा की,ताकि कोई सुराग मिल सके…धीरे-धीरे यह प्रयास रंग लाया पता चला कि महिला बिहार के छपरा बहास, पूर्वी चम्पारण की रहने वाली है… टीम ने वीडियो कॉल के माध्यम से महिला की उसकी मां,बेटे और अन्य परिवारजनों से बातचीत कराई…उस पल की भावनाएँ शब्दों में बयाँ नहीं की जा सकतीं, महिला ने अपनी मां और बेटे को तुरंत पहचान लिया.13 वर्षों बाद अपनी बेटी की खबर सुनकर परिवार खुशी से झूम उठा…बिहार से सूरजपुर तक का लंबा सफर तय करते हुए महिला की मां, बेटा और भाभी उसे लेने पहुंचे..सखी सेंटर ने परिवार के साथ परामर्श सत्र आयोजित किया,जिसमें पता चला कि महिला के चार बच्चे हैं और उसके पति का देहांत पहले ही हो चुका है…मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण वह 13 साल पहले घर से निकल गई थी…परिवार ने हर जगह खोज की, पर कोई पता नहीं चल सका था…भावुक क्षणों के बीच जब मां ने अपनी बेटी को गले लगाया, तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई…सखी टीम ने महिला को विधिवत परामर्श और चिकित्सकीय देखरेख के बाद परिवार को सौंप दिया…महिला के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और बिहार लौटने में कठिनाई थी… इस पर जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल ने मानवीय पहल दिखाते हुए उन्हें सहयोग राशि प्रदान की, जिससे वे सुरक्षित रूप से घर लौट सके…परिवार ने सखी वन स्टॉप सेंटर और महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया..यह घटना इस बात का प्रमाण है कि जब उम्मीद अपनो के मिलने की हो तो कोई भी दूरी चाहे वह 13 साल की क्यों न हो पार की जा सकती है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur