पूर्व महापौर ने फिर उठाया शहरवासियों के हक का मुद्दा, कलेक्टर से जनदर्शन में की मुलाकात
-संवाददाता-
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर,06 नवंबर 2025 (घटती-घटना)। कोयला नगरी चिरमिरी के पूर्व महापौर एवं जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष के. डोमरू रेड्डी ने एक बार फिर अपने पुराने अभियान को गति देते हुए कहा है कि जब तक चिरमिरी के हर नागरिक को उसका पट्टा नहीं मिल जाता, मेरा प्रयास अनवरत जारी रहेगा।
श्री रेड्डी ने इस सप्ताह जनदर्शन कार्यक्रम में अपर कलेक्टर अनिल सिदार से मुलाकात कर कलेक्टर डी. वेंकट राहुल के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें चिरमिरी शहर के निवासियों को उनके मकानों और दुकानों का मालिकाना हक दिलाने के लिए लंबित पड़ी कार्यवाही को आगे बढ़ाने की मांग की गई है।
2.94 हेक्टेयर भूमि प्रस्ताव अब तक लंबित
पूर्व महापौर ने बताया कि चिरमिरी एसईसीएल ने अपनी 2.94 हेक्टेयर अनुपयोगी जमीन चिन्हित कर उसे शासन को लौटाने के लिए कलेक्टर कार्यालय को प्रस्ताव भेजा है,जो अब तक लंबित है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं,बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है।
महापौर कार्यकाल में रखी थी मजबूत नींव
अपने महापौर कार्यकाल के दौरान श्री रेड्डी ने राजस्व सर्वेक्षण और रिकार्ड निर्माण कराकर कोयला क्षेत्रों में बसे नागरिकों को शासकीय योजनाओं से जोड़ने की ऐतिहासिक पहल की थी। परिणामस्वरूप कई परिवारों को पट्टा और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर भी मिले। उन्होंने राज्य सरकार और सरगुजा विकास प्राधिकरण के माध्यम से इस मुद्दे को बार-बार उठाया और कार्यवाही की राह तैयार की थी।
सरकारों ने दिए निर्देश पर जिला स्तर पर रुकी फाइलें
श्री रेड्डी ने याद दिलाया कि 3 जून 2019 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में एसईसीएल की अनुपयोगी भूमि राज्य शासन को लौटाने का निर्णय लिया गया था,इस संबंध में आयुक्त कार्यालय अम्बिकापुर द्वारा पत्र क्रमांक 1613/सविप्रा/2019-20, दिनांक 19 जून 2019 से निर्देश जारी किए गए,परंतु अब तक कलेक्टर कोरिया कार्यालय से पालन प्रतिवेदन नहीं भेजा गया,उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन न होना शासन की मंशा के विपरीत है,यह सिर्फ एक प्रशासनिक देरी नहीं बल्कि जनभावनाओं की अवहेलना है।
पूर्व बैठकों में तय हुआ था ढांचा
पूर्व महापौर ने बताया कि 9 अगस्त 2017 को तात्कालीन मुख्यमंत्री के निर्देश पर चिरमिरी तानसेन भवन में एसईसीएल, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें आठ सदस्यीय समिति गठित की गई थी। इस समिति ने जिला स्तर पर रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी थी, किंतु प्रगति अब ठप पड़ी है।
यह राजनीति नहीं,अस्तित्व की लड़ाई है…
श्री रेड्डी ने कहा कि यह विषय किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि शहर के अस्तित्व और पलायन से जुड़े जन-जीवन का प्रश्न है, उन्होंने कलेक्टर से आग्रह किया है कि इस मामले में विशेष टास्क फोर्स का गठन कर लंबित प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए, उन्होंने कहा “मैंने अपने कार्यकाल में जो अभियान शुरू किया था, उसे अब अंतिम परिणाम तक पहुंचाना मेरी जिम्मेदारी है। जब तक चिरमिरी के हर नागरिक को उसका वैध पट्टा नहीं मिल जाता, मेरा प्रयास जारी रहेगा
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