क्या सोनहत के तहसीलदार का तबादला कमिश्नर की ‘पसंद’ का परिणाम?


- विवादों में घिरे तहसीलदार संजय राठौर की गुपचुप बहाली पर सवाल,क्या कलेक्टर व कमिश्नर दे रहे हैं संरक्षण?
- क्या सोनहत को मिलेगा दागी तहसीलदार? छत्तीसगढ़ के सुशासन पर उठे सवाल
- कोरिया कलेक्टर की कार्यशैली पर उठे सवाल
- रिश्वत,विवादित जमीन प्रकरण और विभागीय जांच के बीच बैकुंठपुर में तहसीलदार संजय राठौर की नई पदस्थापना चर्चा में…
- शिकायतों की जांच में रुचि नहीं,पर तहसीलदार को संरक्षण क्यों?

-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,05 नवम्बर 2025
(घटती-घटना)।
सूरजपुर जिले के चर्चित व विवादित तहसीलदार संजय राठौर का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। रिश्वतखोरी, पक्षपातपूर्ण निर्णय और अपनी पत्नी के नाम जमीन दर्ज कराने जैसे गंभीर आरोपों से घिरे इस अधिकारी को विभागीय जांच पूरी हुए बिना ही कोरिया जिले में अतिरिक्त तहसीलदार (सोनहत तहसील कार्यालय) के रूप में पदस्थ किया जाना अब प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है,राजस्व विभाग में एक बार फिर सवालों का सिलसिला शुरू हो गया है, सूरजपुर जिले के भैयाथान तहसील के तत्कालीन तहसीलदार संजय राठौर जिन पर रिश्वतखोरी और विवादित जमीन प्रकरण में गंभीर आरोप लग चुके हैं,अब कोरिया जिले के बैकुंठपुर में अतिरिक्त तहसीलदार के रूप में पदस्थ किए गए थे, यह पदस्थापना न केवल प्रशासनिक गलियारों में बल्कि आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है,सवाल उठ रहे हैं कि ‘क्या छत्तीसगढ़ में सुशासन का यही चेहरा है, जहाँ विभागीय जांच अधूरी रहते हुए भी विवादित अधिकारी को फिर से जिम्मेदारी दी जा रही है? ‘भ्रष्टाचार और विवादों में घिरे तहसीलदार संजय राठौर को कोरिया जिले में पदस्थ किए जाने के बाद अब प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है, जहाँ एक ओर सूरजपुर में उनके खिलाफ रिश्वतखोरी और जमीन घोटाले की जांचें अधूरी हैं, वहीं दूसरी ओर कोरिया कलेक्टर द्वारा उन्हें सोनहत तहसील कार्यालय का दायित्व सौंपे जाने पर कलेक्टर की नीयत और कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ‘जिस अधिकारी पर विभागीय जांच लंबित हो, जिसके खिलाफ जमीन हेराफेरी और रिश्वत के गंभीर आरोप हों,उसे क्या जमीन संबंधित न्याय देने की जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए?’ लोगों में यह भी चर्चा है कि जब प्रदेश में शासन की प्राथमिकता पारदर्शिता और सुशासन की है,तब ऐसे विवादित अधिकारी की पुनः तैनाती क्या इस नीति के विपरीत नहीं है? प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कोरिया कलेक्टर की कार्यशैली को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, पर इस बार मामला और गंभीर है, क्योंकि यह सीधे जनता के न्याय के अधिकार से जुड़ा हुआ है, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरगुजा कमिश्नर और राजस्व विभाग इस विवादास्पद पदस्थापना को लेकर क्या रुख अपनाते हैं, क्या यह मामला एक बार फिर ठंडे बस्ते में जाएगा या फिर ईमानदार प्रशासन की मिसाल पेश की जाएगी? जब तक इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषी को दंड नहीं दिया जाता, तब तक यह सवाल जनता के मन में गूंजता रहेगा ‘क्या छत्तीसगढ़ में अब भी ईमानदार अधिकारी हैं जो ऐसे आचरण वालों को प्रोत्साहित करने के बजाय दंडित करें?
क्या सोनहत के तहसीलदार का तबादला कमिश्नर की ‘पसंद’ का परिणाम?
सोनहत क्षेत्र में हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, चर्चा है कि तहसीलदार का तबादला केवल सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि ‘कमिश्नर साहब की पसंद’ का परिणाम हो सकता है प्रशासनिक हलकों में यह मुद्दा अब चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योकि सोनहत के तहसीलदार को सूरजपुर भेजा गया है जिससे सूरजपुर से निलंबति कर बलरामपुर भेजे गए जिन्हे चोरी चुपके कोरिया जिले लाया गया था बैकुंठपुर का अतिरिक्त तहिसलदार बनाया गया था को सोनहत का प्रभार दिया जा सके,भैयाथान में पदस्थ रहे और एक गंभीर शिकायत उपरांत निलंबित लिए गये तहसीलदार को मनचाही जगह भेजने के लिए सोनहत तहसीलदार को सूरजपुर भेजा गया जबकि सोनहत जिस निलंबति बाद मे बहाल तहसीलदार के लिए खाली कराया गया है उसकी भैयाथान मामले की जांच भी पूरी नही हुई है जबकि निलंबन गंभीर मामले मे किया गया था, स्थानीय लोगों का कहना है कि सोनहत के मौजूदा तहसीलदार के सूरजपुर के भैयाथान के कार्यकाल को लेकर लगातार शिकायतें की गईं,लेकिन उन शिकायतों पर किसी ठोस जांच की पहल नहीं की गई,इसके विपरीत,शिकायतों की उपेक्षा करते हुए संबंधित अधिकारी को संरक्षण दिया जा रहा है, इससे यह संदेह गहरा गया है कि कहीं पूरा तबादला तंत्र किसी विशेष अधिकारी को सोनहत जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पदस्थ करने के उद्देश्य से तो नहीं किया गया, सूत्रों का कहना है कि कई शिकायतों की फाइलें लम्बे समय से लंबित हैं,लेकिन जांच की दिशा में कोई गंभीर कदम नहीं उठाया गया। वहीं दूसरी ओर, तबादले की फाइलें बेहद तेजी से निपटा दी गईं,इस रवैये ने प्रशासन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है,जनता का कहना है कि यदि वास्तव में सुशासन और पारदर्शिता का दावा सही है? तो तहसील स्तर पर हुई शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराना आवश्यक है,अधिकारी चाहे किसी भी स्तर का हो,जवाबदेही तय होना चाहिए,स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि कमिश्नर कार्यालय से इस पूरे प्रकरण की जांच स्वतंत्र एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से कराई जाए, ताकि लोगों का भरोसा प्रशासन पर कायम रह सके, वैसे एसआईआर के दौरान तबादलों पर रोक है उसके बाबजूद राजस्व विभाग की यह तबादला सूची निर्वाचन आयोग के निर्देशो की अवहेलना है खासकर तहसीलदार सोनहत को फिलहाल भारमुक्त किया जाना उचित नहीं?
नई शिकायत, रिश्वत का ऑडियो और 1 लाख की डील का आरोप
हाल ही में इंदरपुर निवासी सौरभ प्रताप सिंह नामक प्रार्थी ने कलेक्टर सूरजपुर को एक नई शिकायत दी है,जिसमें उन्होंने दावा किया है कि तहसीलदार राठौर ने उनके भूमि प्रकरण के निपटारे के लिए 2 लाख या आईफोन 16 प्रो मैक्स(1टीबी) की मांग की थी। बाद में ‘डील’ 1 लाख में तय हुई और जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सौंपी गई है, प्रार्थी ने कहा कि पैसे देने के बावजूद मामला लंबित रखा गया, और जब उन्होंने रिश्वत देने से इंकार किया, तो नए तहसीलदार द्वारा प्रकरण खारिज कर दिया गया।
प्रशासन मौन क्यों?
जनदर्शन में दर्ज शिकायतें,प्रमाणित दस्तावेज़ और ऑडियो प्रस्तुत किए जाने के बावजूद,अब तक कोई निर्णायक कार्यवाही नहीं हुई,कलेक्टर सूरजपुर ने इस मामले को ‘अब अधिकारी हमारे जिले में पदस्थ नहीं हैं’ कहते हुए सरगुजा संभाग कमिश्नर को जांच सौंप दी, इस बीच, सवाल यह भी है कि ‘क्या विभागीय जांचों को ठंडे बस्ते में डालकर आरोपित अधिकारी को पुनः लाभ पहुँचाया जा रहा है? ‘
सार्वजनिक हित में जांच की माँग
कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की माँग की है। उनका कहना है कि ‘जब तक इस तरह के मामलों में पारदर्शी जांच नहीं होगी, तब तक आम नागरिकों का राजस्व विभाग पर भरोसा बहाल नहीं हो सकता। ‘
जमीन के बदले जमीन,तहसीलदार पर आरोप
सूरजपुर जिले के भैयाथान तहसील कार्यालय में पदस्थ रहने के दौरान तहसीलदार संजय राठौर पर आरोप है कि उन्होंने विवादित भूमि प्रकरण में एक पक्ष के पक्ष में फैसला सुनाकर, प्रतिफलस्वरूप अपनी पत्नी के नाम लगभग 30 डिसमिल भूमि प्राप्त की, आवेदकों का दावा है कि यह जमीन खसरा नंबर 19/1 ग्राम कोयलारी में स्थित है और इसका बाजार मूल्य प्रति डिसमिल एक लाख रुपये से अधिक है, जबकि पंजीयन केवल ?1,89,500 में दर्ज कराया गया, इस प्रकरण को लेकर कई आवेदकों —महेंद्र दुबे,सतीश दुबे,रविशंकर दुबे,राजेश दुबे सहित अन्य ने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई, उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में विचाराधीन प्रकरण के दौरान दिया गया, जो सीधे न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है।
शिकायतों और विभागीय जांच का जाल
इस प्रकरण में सूरजपुर कलेक्टर द्वारा जांच प्रतिवेदन के साथ तहसीलदार को दोषी माना गया था और सरगुजा संभाग आयुक्त को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए अनुशंसा भेजी गई थी, हालांकि, विभागीय जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है, और राठौर को बीच में ही कोरिया जिले में पदस्थ कर दिया गया, जिससे उनके प्रभाव और ‘ऊँची पकड़’ की चर्चाएँ तेज हैं।राठौर कोरिया आते ही तहसील ढूंढ रहे थे जो भी उन्हें मिल गया और उनके लिए सोनहत तहसील खाली कर दिया गया जो उनके प्रभाव को दर्शाता है।
ढाई साल पुराना विवाद अब भी अधूरा
सूरजपुर जिले के भैयाथान तहसील में पदस्थ रहते हुए संजय राठौर पर जमीन विवाद का फैसला अपने हित में देने और लाभ स्वरूप अपनी पत्नी के नाम 30 डिसमिल जमीन कराने का आरोप लगा था, इस मामले में तत्कालीन कलेक्टर सूरजपुर ने जांच प्रतिवेदन के साथ इन्हें दोषी पाया और सरगुजा संभागायुक्त को विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की थी। लेकिन,जांच आज तक अधूरी पड़ी है,और अधिकारी अब दूसरे जिले में पदस्थ होकर अपनी पकड़ और मजबूत करते नजर आ रहे हैं।
कोरिया में गुपचुप पदस्थापना ने बढ़ाई शंकाएँ
प्रशासनिक फेरबदल के दौरान संजय राठौर का नाम सूची में चौंकाने वाला था। बिना जांच पूर्ण किए,अचानक उनकी कोरिया में तैनाती ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, स्थानीय सूत्रों का कहना है कि ‘यह पदस्थापना गुपचुप तरीके से हुई है, और इसकी जानकारी कई अधिकारियों को बाद में लगी।’ लोगों का आरोप है कि प्रभावशाली लॉबी और कुछ कनिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के समर्थन के चलते इन्हें संरक्षण मिल रहा है।
क्या कलेक्टर दे रही हैं संरक्षण?
वहीं अब सवाल यह उठ रहा है कि जब सूरजपुर कलेक्टर ने जांच प्रतिवेदन में इन्हें दोषी पाया था,तब कोरिया कलेक्टर ने इन्हें कैसे और क्यों जिम्मेदारी दी? प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि कलेक्टर की ‘कार्यशैली’ पर सवाल उठने लगे है, क्योंकि जिस अधिकारी पर विभागीय जांचें लंबित हों,उसे न्यायिक व राजस्व संबंधी जिम्मेदारी देना सुशासन की भावना के विपरीत है।
न्याय और निष्पक्षता पर जनता के सवाल
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की जाए और संजय राठौर सहित संबंधित अधिकारियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। लोगों का कहना है कि ‘जिस अधिकारी पर रिश्वत, जमीन घोटाला और न्यायिक अनियमितता के आरोप हों, उसे जिम्मेदारी देना जनता के साथ धोखा है। ‘
क्या सुशासन केवल नारे तक सीमित है?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ऐसे तहसीलदारों के भरोसे जनता को न्याय मिलेगा? क्या प्रशासन में अब ऐसे अधिकारी ही पुरस्कृत होंगे जिन पर भ्रष्टाचार के दाग हैं? क्या संभागायुक्त और कलेक्टर निष्पक्ष जांच करेंगे या फिर यह मामला भी ‘ठंडे बस्ते’ में चला जाएगा?
दैनिक घटती-घटना का संपादकीय नोट…
यह रिपोर्ट आवेदकों के दस्तावेज़, जनदर्शन आवेदन और स्थानीय प्रशासनिक स्रोतों पर आधारित है, दैनिक घटती-घटना का उद्देश्य किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करना नहीं,बल्कि सार्वजनिक हित में पारदर्शिता की माँग उठाना है, यदि संबंधित अधिकारी या विभाग अपनी प्रतिक्रिया देना चाहें, तो उसका प्रकाशन समान स्थान और महत्व के साथ किया जाएगा।
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