15 नवम्बर 2025 से प्रदेश में धान खरीदी की प्रक्रिया होने जा रही है शुरू
-संवाददाता-
शंकरगढ़,03 नवम्बर 2025 (घटती-घटना)।
आगामी 15 नवम्बर 2025 से प्रदेश में धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है,लेकिन शंकरगढ़ क्षेत्र के किसानों में इस बार मायूसी का माहौल है। पंजीयन में संशोधन कराने वाले कई किसानों के नाम पर इस वर्ष धान का रकबा शून्य दिखाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि उनके नाम पर जमीन दर्ज है और वे कई वर्षों से नियमित रूप से धान बेचते आ रहे हैं। वर्तमान में भी उन्हीं खसरा नंबरों पर धान की फसल खड़ी है, बावजूद इसके उनके खातों में रकबा ‘शून्य’ दर्ज कर दिया गया है। प्रदेश सरकार ने इस वर्ष प्रति एकड़ 21 क्विंटल की दर से धान खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया है, मगर पंजीयन और गिरदावरी में की गई लापरवाही के कारण अनेक किसानों का धान मंडी तक पहुँचना मुश्किल हो गया है। किसानों का आरोप है कि तहसील स्तर पर गिरदावरी करने वाले कर्मचारियों ने बिना खेतों का निरीक्षण किए ‘कागजों पर’ ही काम पूरा कर दिया। नतीजतन, कई किसानों के रकबे कम या शून्य दर्ज हो गए। अब इन किसानों को अपनी जमीन और फसल का रकबा सुधरवाने के लिए तहसील कार्यालय के लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों से 10 से 20 किलोमीटर दूर से आने वाले किसानों को इसके चलते भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों ने बताया कि आवेदन सुधार के लिए उन्हें दलालों या टाइपिस्टों को 200 से 500 रुपये तक देने पड़ते हैं। वहीं, कुछ किसान ऐसे भी हैं जो पटवारी या कर्मचारियों से सीधे संपर्क कर सुधार करवाने के लिए 1000 से 2000 रुपये तक खर्च करने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते गिरदावरी और पंजीयन प्रक्रिया को गंभीरता से लें, तो किसानों को ऐसी परेशानियों से बचाया जा सकता है।
किसानों की मांग : किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों की तत्काल जांच कर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही जिन किसानों का रकबा शून्य या कम दर्ज हुआ है, उनके दस्तावेजों का सत्यापन कर शीघ्र सुधार किया जाए, ताकि वे अपनी मेहनत की फसल को समर्थन मूल्य पर बेच सकें। किसानों का कहना है कि सरकार की नीतियाँ तभी सफल होंगी जब उन्हें ज़मीनी स्तर पर ईमानदारी से लागू किया जाएगा।
प्रशासन का पक्ष…
गजराज सिंह,नायब तहसीलदार,शंकरगढ़ ने बताया कि शासन द्वारा गिरदावरी के लिए गांव-गांव में कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। उनके द्वारा की गई लापरवाही के कारण कुछ किसानों का रकबा कम या शून्य दर्ज हुआ है।
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