तहसीलदार के अधिवक्ता ने घटती-घटना के पत्रकार को नोटिस भेजा, लेकिन अपने कार्यालय और निवास का पता नहीं दिया, कानूनी रूप से नोटिस की वैधता पर सवाल?

-न्यूज डेस्क-
अंबिकापुर/सूरजपुर,26 सितम्बर 2025 (घटती-घटना)। तहसीलदार शिवनारायण राठिया के अधिवक्ता ने घटती-घटना के पत्रकार को वैधानिक नोटिस भेजा,लेकिन नोटिस में अधिवक्ता का पूरा पता और कार्यालय का विवरण नहीं दिया गया है। केवल सूरजपुर जिला न्यायालय का पता दिया गया है,जो वैध नोटिस के लिए पर्याप्त नहीं है। कानून के जानकारों के अनुसार,अधिवक्ता अधिनियम,1961 के तहत नोटिस में पूरा नाम,पंजीकरण संख्या और कार्यालय/निवास का पता होना अनिवार्य है। अधिवक्ता द्वारा केवल न्यायालय का पता देना नियमों का उल्लंघन है। वैसे सवाल यह है कि क्या अधिवक्ता हड़बड़ी में थे।

क्या संभाग के सबसे प्रसिद्ध अधिवक्ता हैं जिनका पता नहीं नाम के साथ डाक पहुंच जाता है…
जिस अधिवक्ता ने लीगल मानहानि नोटिस भेजा है वह लगता है कि संभाग के सबसे बड़े अधिवक्ता है इसीलिए उन्हें ज्ञान भी अधिक है और उनका नाम ही पूरे संभाग के लिए काफी है उनका नाम देखकर ही पोस्टमैन उनके पते पर डाक भिजवा देता है काफी प्रसिद्ध अधिवक्ता माने जाते हैं?
कानूनी विश्लेषण
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिवक्ता का यह कदम या तो जल्दबाजी में नोटिस तैयार करने का परिणाम हो सकता है या फिर तहसीलदार के,पक्ष में पत्रकार पर दबाव बनाने की रणनीति, नोटिस का उद्देश्य पत्रकारिता के स्वतंत्र अधिकार को सीमित करना प्रतीत होता है। अधिवक्ता का अधूरा पता,नोटिस की वैधता पर सीधे सवाल खड़ा करता है,और इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
सवाल और निष्कर्ष
प्रमुख सवाल : क्या सभी अधिवक्ताओं का पता जिला न्यायालय होता है?
प्रमुख सवाल : अधिवक्ता ने जानबूझकर जानकारी छुपाई या गलती की?
प्रमुख सवाल : क्या यह नोटिस पत्रकारों पर दबाव डालने का प्रयास है?
अधूरा नोटिस पत्रकार पर दबाव डालने की कोशिश?
कानूनी रूप से वैध नोटिस में अधिवक्ता का पूरा विवरण होना अनिवार्य होता है। अधूरा नोटिस पत्रकार पर दबाव डालने की कोशिश या हड़बड़ी का परिणाम ही माना जा सकता है।
हाइलाइट बॉक्स
अधिवक्ता का नोटिसः तहसीलदार शिवनारायण राठिया के पक्ष में…
समस्याः केवल जिला न्यायालय का पता, कार्यालय और निवास का विवरण नहीं
कानूनी मानक : अधिवक्ता अधिनियम, 1961 – पूर्ण विवरण आवश्यक
संभावित प्रभावः पत्रकारिता के स्वतंत्र अधिकार पर दबाव।
जिस ठेले में बैठते हैं वहीं का पता लिख देते,कम से कम नोटिस का जवाब देना आसान होता
नोटिस भेजने वाले अधिवक्ता एक ठेले में बैठते हैं,वह अपना अधिकाशं समय ठेले में ही व्यतीत करते हैं,अधिवक्ता उसी ठेले का पता नोटिस में अपने पते की जगह डाल देते कम से कम पत्रकार को नोटिस का जवाब देने में आसानी होती।
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