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सूरजपुर@क्या मुख्य चिकित्सा अधिकारी व सिविलसर्जन जिला चिकित्सालय को नहीं चला पा रहे?

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डॉक्टर समय पर आते नहीं पर समय से पहले चले जरूर जाते हैं…
स्वास्थ्य मंत्री के संभाग की ऐसी स्थिति है तो पूरे प्रदेश की कैसी स्थिति होगी?
जिला अस्पताल में समय पर नहीं पहुँचते चिकित्सक…
सुबह की पाली देर से शुरू,शाम की पाली में अधिकांश डॉक्टर नदारद : मरीज बेहाल

सूरजपुर,01 अक्टूबर 2025 (घटती-घटना)। जिला सूरजपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था खुद बीमार है स्थिति यह है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी व सिविल सर्जन जिला अस्पताल व्यवस्थित ढंग से चला पाने में नाकामयाब, डॉक्टर समय पर आते नहीं पर समय से पहले चले जरूर जाते हैं,ऐसी व्यवस्था आखिर छत्तीसगढ़ के जिला अस्पतालों में कैसे बन गई है? डॉक्टर आते भी हैं तो मरीजों को बस अपने क्लीनिक तक पहुंचने के लिए, उसके बाद फिर वह चले जाते हैं यह आरोप अब मरीजों का जिला अस्पताल से सामने आने लगा है,लगातार सूरजपुर जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उंगली उठने लगी है यहां के मुख्य चिकित्सा अधिकारी व सिविल सर्जन से व्यवस्था सुधर नहीं पा रही है उनकी बात शायद डॉक्टर मन नहीं रहे हैं या तो इनका डर डॉक्टरों में अब है ही नहीं इस वजह से डॉक्टर भी अपनी मनमानी पर उतावला है, सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि स्वास्थ्य मंत्री के संभाग वाले जिले अस्पताल की ऐसी स्थिति है तो फिर बाकी अस्पतालों की स्थिति क्या होगी यदि मुख्य चिकित्सा अधिकारी सूरजपुर व सिविल सर्जन सूरजपुर से व्यवस्था नहीं सुधार पा रहे है तो स्वास्थ्य मंत्री इन्हें हटा क्यों नहीं देते? ऐसे अधिकारी क्यों नहीं रखते हैं जो बेहतर ढंग से सेवा दे पाए और कर्मचारी व डॉक्टर भी समय पर अस्पताल आए और मरीज को इंतजार बिना कारण उनका इलाज करें। जिला अस्पताल में पदस्थ चिकित्सकों की मनमानी से मरीजों को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है। इलाज की उम्मीद लेकर पहुँचने वाले मरीज समय पर डॉक्टरों को नहीं पाते। परिणामस्वरूप कई बार उन्हें घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ता है, तो कई मजबूर होकर बिना इलाज कराए ही लौट जाते हैं।
समय पर नहीं पहुँचते डॉक्टर
नियम के मुताबिक सुबह 9 बजे से चिकित्सकों की ड्यूटी प्रारंभ होनी चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश डॉक्टर 10 बजे के बाद ही अस्पताल पहुँचते हैं। इससे सुबह जल्दी आने वाले मरीजों को घंटों तक इंतज़ार करना पड़ता है।
बीच में भी गायब रहते हैं
मरीजों का कहना है कि समय पर पहुँचने में देरी करने के बाद भी डॉक्टर अपने चैंबर में लगातार नहीं बैठते। वे इधर-उधर समय बिताते नज़र आते हैं। कई बार गंभीर मरीज भी डॉक्टर को ढूँढते रह जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है।
दोपहर से पहले ही निकल लेते हैं डॉक्टर
डॉक्टरों की लापरवाही यहीं तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार कई चिकित्सक दोपहर 1 बजे से पहले ही अस्पताल छोड़ देते हैं। जिससे बाद में आने वाले मरीजों को न तो परामर्श मिलता है और न ही उचित इलाज।
शाम की पाली में तो हालत और भी है खराब
शाम की पाली में तो स्थिति और भी चिंताजनक है। अधिकांश चिकित्सक शाम को ड्यूटी पर पहुँचते ही नहीं। परिणामस्वरूप अस्पताल की दूसरी पारी लगभग नाम मात्र की रह जाती है। ऐसे में जो मरीज शाम को इलाज के लिए आते हैं, उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है।
मरीजों की बढ़ती परेशानी
इस लापरवाही का सीधा असर आम मरीजों पर पड़ रहा है। दूर-दराज से आने वाले ग्रामीण मरीजों को सबसे अधिक परेशानी होती है। उन्हें इलाज कराने के लिए पूरे दिन का समय और अतिरिक्त खर्च दोनों झेलना पड़ता है।
प्रशासन से अपेक्ष
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिला अस्पताल में चिकित्सकों की मनमानी पर रोक लगाना बेहद जरूरी है। वे मांग कर रहे हैं कि अस्पताल में डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस, नियमित निरीक्षण और कठोर कार्रवाई की व्यवस्था की जाए। लोगों को उम्मीद है कि वर्तमान कलेक्टर इस स्थिति पर ध्यान देंगे और जिला अस्पताल की अव्यवस्था को सुधारेंगे।


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