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सूरजपुर/कोरिया@प्रार्थी ने काम न होने पर मांगा तहसीलदार से पैसातहसीलदार ने कहा आधा काम तो मैंने किया था ना…!

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-रवि सिंह-
सूरजपुर/कोरिया,17 सितंबर 2025 (घटती-घटना)। सूरजपुर जिले के भैयाथान तहसील कार्यालय के तत्कालीन तहसीलदार संजय राठौर की समस्या कम होती नहीं दिख रही है,दिन प्रतिदिन नए-नए मामले सामने आते जा रहे हैं उसका खुलासा भी होता जा रहा है, शिकायतें भी पहुंचती जा रही हैं,और कहीं ना कहीं संजय राठौर की समस्या भी बढ़ती जा रही है,अभी उनकी विभागीय जांच पूरी भी नहीं पाई है,अभी तक वह कछुए के चाल से रेंग रहा है, वहीं अब दूसरी बड़ी शिकायत सामने आ गई है जिसकी रिकॉर्डिंग भी प्रार्थी ने प्रस्तुत कर दी है और कहा है कि मेरे प्रकरण के लिए 1 लाख लिया गया था तत्कालीन भैयाथान तहसीलदार संजय राठौर के द्वारा और वह काम हुआ भी नहीं, और उनके जाने के बाद जो तहसीलदार आए वह बिना तथ्यों के ही मामला खारिज करके पूरा मटिया मेट कर दिए,अब जनदर्शन में सूरजपुर कलेक्टर को प्रार्थी ने रिकॉर्डिंग के साथ शिकायत दे तो दी है पर कलेक्टर भी सरगुजा कमिश्नर को जांच के लिए लिखकर अपना पल्ला झाड़ लिए हैं,उनका कहना यह है कि अब वह हमारे जिले में है नहीं इसलिए अब यह मामला सरगुजा कमिश्नर का है अब वही इस पर कार्यवाही या जांच कर सकते हैं,अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि पहले से ही दो विभागीय जांच लंबित है अब तीसरी शिकायत पर क्या होगा? संजय राठौर की कार्यशैली कितनी गंदी थी अब यह शिकायतों के माध्यम से परत दर परत सामने आता जा रहा है,उनकी कार्यप्रणाली में रिश्वतखोरी कुटकुट कर भरी हुई थी यह सब साफ हो चुका है, सिर्फ जमीन बनाने व पैसे बनाने के चक्कर में आज वह विभागीय जांच की चपेट में हैं, पर पैसे के दम पर बचने का उनका प्रयास भी है जो इन्होंने अवैध पैसे कमाए थे इस पैसे के दम पर अब यह पूरे मामले से बचकर निकल पाएंगे या फिर सरगुजा कमिश्नर जल्द इन पर एफआईआर दर्ज करते हैं देखने वाली बात होगी?


आई फोन 16 प्रो मैक्स(1 टीबी) उपहार या फिर 2 लाख की रिश्वत की मांग संजय राठौर ने प्रार्थी से किया था
प्रार्थी सौरभ प्रताप सिंह, पुत्र-श्रीमती मंजू सिंह (निवासी ग्राम इन्दरपुर,तहसील ओड़गी,जिला सूरजपुर) ने कलेक्टर सूरजपुर को जनदर्शन में शिकायत करते हुए आरोप लगाया है मेरी माता जी का भूमि विवाद (ख.न. 819/10, रकबा 0.40 हे., ग्राम इन्दरपुर) न्यायालय तहसीलदार भैयाथान में प्रकरण संख्या 202309261100011/्र-70-2022-23 के रूप में दर्ज था। तत्कालीन तहसीलदार संजय कुमार राठौर ने मुझसे कहा कि प्रकरण ओड़गी से भैयाथान स्थानांतरित करवा लो,मैं तुम्हारा जल्द से जल्द निवारण करने की कोशिश करूंगा। इसके पश्चात उन्होंने आई फोन 16 प्रो मैक्स(1 टीबी) उपहार या फिर 2 लाख की रिश्वत की मांग की,मैंने रिश्वत देने से साफ़ मना कर दिया। लंबे दबाव,डराने-धमकाने और बार-बार कॉल करने के बाद,अंततः मामला 1 लाख पर फाइनल हुआ। श्री राठौर ने अपने घर का किचन का सामान,गद्दे आदि मिलाकर लगभग 30,000 का सामान भी मुझसे खरीदवाया। इसके बाद उन्होंने मुझसे 50,000 नकद लिए (स्थान सूरजपुर थाने के सामने, उनकी निजी कार में बैठाकर)। शेष राशि बाद में देने का दबाव बनाया गया। इसके बावजूद,आदेश पारित करने के नाम पर प्रकरण को लगभग तीन वर्ष तक लंबित रखा गया और तिथियाँ बदलते रहे। बीच-बीच में शेष राशि की मांग लगातार करते रहे। बाद में श्री संजय राठौर निलंबित हो गए। परंतु उन्होंने नए तहसीलदार श्री शिवनारायण राठिया को फ़ोन पर यह कह दिया कि इस प्रकरण में पहले से ही 1 लाख की डील तय है। इसके बाद श्री शिवनारायण राठिया के नगर सैनिक संजय मिश्रा (भटगांव में पदस्थ) ने मुझे सीधे कहा अगर 1 लाख नहीं दोगे तो सर (तहसीलदार) प्रकरण खारिज कर देंगे,यह कथन मेरे लिए सीधी धमकी के समान था,संजय मिश्रा द्वारा कई बार कॉल और दबाव बनाया गया। यहाँ तक कि उन्होंने रात में भी फोन कर कहा कि पैसे लेकर आना,वरना आदेश प्रतिकूल होगा,जब मैंने रिश्वत देने से साफ़ मना कर दिया,तो दिनांक 10/09/2025 को प्रकरण खारिज कर दिया गया। दिनांक 12/09/2025 को मैंने पुनः आवेदन (रि-ओपनिंग हेतु) प्रस्तुत करना चाहा,परंतु तहसीलदार शिवनारायण राठिया ने उसे लेने से ही साफ़ मना कर दिया।यह पूरा आरोप प्रार्थी ने आवेदन प्रस्तुत कर लगाया है।
दैनिक घटती-घटना समाचार का परीक्षित स्वर और चेतावनी
यह रिपोर्ट आवेदिका के दावों और स्थानीय स्रोतों पर आधारित है। दैनिक घटती-घटना की रिपोर्ट का उद्देश्य किसी व्यक्ति को बिना प्रमाण बदनाम करना नहीं है पर सार्वजनिक हित में यह आवश्यक है कि रेवेन्यू विभाग और शासन-स्तर पर यह स्पष्ट किया जाए कि क्या ऐसे आरोप सत्य हैं और किस तरह की सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। जब तक त्वरित और पारदर्शी जांच नहीं होती, तब तक जमीन मालिकों का भरोसा बहाल नहीं हो पाएगा।
मामले जुड़े गंभीर सवाल
सवाल: क्या तहसीलदार का कर्तव्य नहीं था कि निष्पक्ष सीमांकन कराकर निर्णय दें?
सवाल: जब पंचनामा (आर.आई. लक्ष्मी खलखो द्वारा तैयार) में स्पष्ट रूप से अनावेदिका के हस्ताक्षर और कब्जे का विवरण है, तो उसे दरकिनार क्यों किया गया?
सवाल: क्या तहसील कार्यालय जनता से न्याय छीनने और रिश्वत माँगने का अड्डा बन चुका है?
सवाल: क्या सरकार को ऐसे तहसील कार्यालयों को पूरी तरह बंद नहीं कर देना चाहिए, यदि वे अपने मूल दायित्व भूमि विवाद का न्यायपूर्ण निवारण ही नहीं कर सकते और जहां अधिकारियों को वेतन के अतिरिक्त भी बख्शीश की जरूरत है?
प्रार्थी का निवेदन,उपरोक्त तथ्यों का अवलोकन करें…–

  • इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए…
  • तत्कालीन तहसीलदार श्री संजय कुमार राठौर एवं वर्तमान तहसीलदार श्री शिवनारायण राठिया दोनों के भ्रष्ट आचरण एवं अनुचित कार्यशैली पर कड़ी कार्रवाई की जाए…
  • नगर सैनिक संजय मिश्रा द्वारा दी गई सीधी रिश्वत की मांग और धमकी पर भी विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई हो…
  • मेरी माता श्रीमती मंजू सिंह को उनकी भूमि पर वैधानिक कब्जा दिलाया जाए और न्याय सुनिश्चित किया जाए…

शिकायत के साथ प्रार्थी ने यह दस्तावेज़ किया संलग्न…

प्रार्थी और तहसीलदार के बीच की बातचित:-

प्रार्थी: ने फोन लगाकर तहसीलदार से दिए गए पैसे देने की बात कहा और यह भी दोहराया कि पापा पैसा के लिए बोल रहे हैं 50000 ले लेना उनसे।
तहसीलदार- जिस पर तहसीलदार साहब ने जवाब दिया कि आधा काम तो मैंने किया था ना, फाइनल काम रह गया है ना।
प्रार्थी:- आप आएंगे नहीं ना आपका प्रमोशन भी है।
तहसीलदार:- हम आएंगे तुम चिंता मत करो।
प्रार्थी:- तब तक बहुत लेट हो जाएगा सर।
तहसीलदार:- मुझे तुमसे छोटी बात की उम्मीद नहीं है।
प्रार्थी:- राठिया से मेरी बात हुई थी उन्होंने कहा कि कुछ नहीं लगेगा तुम्हारा काम हो जाएगा तुम्हें कोई जरूरत नहीं है।
तहसीलदार:- कौन?
प्रार्थी:- भटगांव वाले तहसीलदार साहब जो है।
तहसीलदार:- हा हा
प्रार्थी:- वही शायद आएंगे अंकिता मैडम जाएंगे।
तहसीलदार:- अभी उसी को तो प्रभाव देंगे ना तुम टेंशन मत करो तहसीलदार लोग हड़ताल पर।
प्रार्थी:- तो फिर आप कैसे आएंगे सर आपका तो खारिज हो गया है
तहसीलदार:- मैं तुमको क्या बोल रहा हूं तुम छोटा मत सोचो, तुम जो बोल दिया गलत हो गया तुम छोटी सोच मत रखो हम आएंगे तुम्हारा काम होगा उसकी टेंशन तुम मत पालो यह सब फालतू चीजों में मत पडों,
प्रार्थी:- सर मेरा काम फिर कब होगा मैं दिक्कत तो यह है ना कितने दिन और वेट करूं।
तहसीलदार:- तुम हड़बड़ा क्यों रहे हो।
प्रार्थी:- आने में बहुत टाइम लग जाएगा।
तहसीलदार:- देखो तुम फिर वही गड़बड़ कर रहे हो ठीक है तुम्हारा काम होगा तुम्हारे पक्ष में अच्छी तरीके से केस को घूमा कर पटक चुके हैं, ऐसे नहीं होता है सौरभ ठीक है ना, केश को तुम्हारे पक्ष में लाकर उस बिंदु तक ले आया हूं जहां पर सिर्फ उसमें करना रह गया है सारे चीजे तुम्हारे पक्ष में है, कोई आकर उसमें जजमेंट बदल नहीं सकता,केश कोई आसान नहीं होता है की लास्ट लाइन को लिख दिया फाइनल हो गया, केश को वहां तक पहुंचाने के लिए भी मेहनत लगती है। तुम छोटी बात मत करो।
प्रार्थी:- नहीं सर पापा भी बोल रहे थे
तहसीलदार:- पापा को भी समझाओ
प्रार्थी:-पापा से पैसा उधार लिया था सर


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