- क्या शासकीय कर्मचारियों को अधिकरियों के तबादले के बाद पटाखे फोड़ने की आजादी है?
- क्या किसी अधिकारी के तबादले के बाद शिक्षकों का पटाखा फोड़कर उत्साह जाहिर करना परम्परा है?
- क्या अब आगे यह बन जाएगी परम्परा,क्या अधिकरियों के तबादले के बाद शिक्षक फोड़ेंगे पटाखा?
-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,24 अगस्त 2025 (घटती-घटना)। सूरजपुर जिले की जिला शिक्षा अधिकारी स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश पश्चात अन्यत्र स्थानांतरित की गईं,आदेश जारी होने के बाद यह देखने में आया कि जिले के कुछ शिक्षकों ने मुख्य चौराहे पर पटाखा फोड़ा और आपस में मिठाइयां बांटी,बताया जा रहा है यह वह शिक्षक नेता थे जिनकी जिला शिक्षा अधिकारी नहीं सुनती थीं और जब जिला शिक्षा अधिकारी का तबादला हुआ यह उत्साहित नजर आए क्योंकि इन शिक्षक नेताओं को जिला शिक्षा अधिकारी के तबादले के बाद यह संतोष हुआ कि जो इनकी जगह आ रहे हैं वह पूर्व में जिले में रह चुके हैं और स्थानीय निवासी हैं जिनसे उनकी पुरानी पहचान है जो उनके लिए आगे राह आसान करेगी। वैसे शिक्षकों का पटाखा फोड़ना कितना उचित है कितना अनुचित है यह तो शिक्षा विभाग के जानकर लोग ही बता सकते हैं कि किसी अधिकारी के तबादले से उत्साहित होकर चौक चौराहे पर नारेबाजी करना और उत्साह मानना कितना जायज है लेकिन व्यवहारिक तौर पर यह सही नहीं कहा जा सकता क्योंकि किसी अधिकारी कर्मचारी का तबादला शासन या विभाग की एक प्रकिया है जो सतत जारी रहती है।
सूरजपुर जिले के शिक्षक नेताओं ने एक तरह से नई परंपरा शुरू की है जो आगे भी शायद जारी रहेगी जब कोई ऐसा अधिकारी आएगा जो मनमानी पर लगाम लगाएगा उसके तबादले के बाद शिक्षक चौक चौराहे पर नारेबाजी करेंगे और उत्साह मनाते हुए पटाखे फोड़ेंगे। शिक्षकों का इस तरह का सार्वजनिक उत्साह आयोजन कहीं न कहीं व्यवस्था के लिए भी एक प्रश्नचिन्ह है जो शासकीय कर्मचारियों को अनुशासन में बांधकर नहीं रख पा रहा है,सुरजपुर में जैसा उत्साह एक अधिकारी के तबादले के बाद सार्वजनिक रूप से शिक्षकों ने प्रदर्शित किया वह कहीं से सही नहीं कहा जा सकता। हटाई गई जिला शिक्षा अधिकारी सीधे तौर पर कहीं से किसी मामले में आरोपी साबित नहीं हुईं और न ही वह दंडित हुईं कानूनी प्रक्रिया के पालन अनुसार उन्हें केवल स्थानांतरित किया गया,सूरजपुर के शिक्षक नेताओं के इस कृत्य पर क्या विभाग या जिलाधीश कार्यवाही करेंगे या वह ऐसे मामलों में मौन रहकर इसे एक परम्परा बनने देंगे। शासकीय कर्मचारियों के लिए सेवाकाल के दौरान अनुशासन में रहने के लिए बाकायदा आचरण संहिता अनुसार व्यवहार करना होता है जो निर्धारित एक लिखित किताब है जिसके अनुसार उनके अनुचित व्यवहारों पर कार्यवाही की जाती है। वैसे ऐसे उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं और ज्यादातर ऐसे मामले तब देखने को मिलते हैं जब विपक्षी दल किसी विरोध के दौरान अपनी बात मनवा पाता है किसी अधिकारी को स्थानांतरित करवा पाता है और तब वह पटाखे फोड़ता है। वैसे शिक्षक नेताओं ने ऐसे ही पटाखे नहीं फोड़े होंगे उन्हें अपने राजनीतिक आकाओं पर भरोसा होगा कि वह उन्हें किसी भी मुसीबत से बचा लेंगे फिर भी जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को यह ध्यान देना चाहिए कि यह मामला कहीं से ऐसे ही जाने देने वाला मामला नहीं हो सकता यह एक अनुशासन भंग वाला विषय है जिसमें शिक्षक नेताओं ने सड़क पर पटाखे फोड़कर एक लोकसेवक के तबादले पर जश्न मनाया है।
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