@क्या नगर पंचायत अधिकारी की उदासीनता से एक्सयूवी की टक्कर से एक मवेशी की गई जान
@क्या एक्सीडेंट के लिए नगर पंचायत अधिकारी है जिम्मेदार?
@ क्या अपनी गिरेबा बचाने के लिए नशे में वाहन चला रहे डॉक्टर के ऊपर के ऊपर कराया एफआईआर?

–सुदामा राजवाड़े –
राजपुर,26 जून 2025(घटती-घटना)। बलरामपुर जिले का राजपुर नगर पंचायत हमेशा सुर्खियों में रहने वाला अपनी कार्यशैली के लिए विख्यात होते जा रहा है। बीते दिवस वाहन की ठोकर से एक मवेशी की मौत होने पर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। यह बताना लाजिमी होगा कि राजपुर नगर पंचायत की सड़कों पर आवारा मवेशियों और पशुओं ने अपना आशियाना बना रखा है। जिसके लिए नगर पंचायत राजपुर के पास मवेशियों के रखने के कोई उपयुक्त ठिकाना नहीं होने के कारण. आवारा मवेशी राजपुर में सड़क पर बने हुए हैं। यही नहीं आवारा मवेशियों के घूमने फिरने से दुर्घटनाओं की आशंका हर समय बनी रहती है। इसका नतीजा बीते दिनों देखने को मिला एक एक्सयूवी वाहन चालक डॉक्टर शायद अपने बच्चों को लेने सेंट जेवियर्स स्कूल जा रहे थे। इसी दौरान सड़क पर घूम रहे हैं मवेशी एक मवेशी के सामने आने से आमने-सामने टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोर थी कि मवेशी की घटना-स्थल पर ही मौत हो गई। वाहन के सामने का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया। टक्कर होने पर घटना स्थल पर अपरा-तफरी मच गई। सूचना लगते ही नगर पंचायत अध्यक्ष धरम सिंह एवं नगर पंचायत की कर्मचारी के मौके पर पहुंच कर स्थिति को संभाला।
एक प्रत्यक्षदर्शी से पूछने पर बताया गया कि तहसील कार्यालय की ओर से आ रहे वाहन चालक अपने बच्चों को लेने संभवत मिशन स्कूल मिशन स्कूल की ओर जाने वाला था मोड के सामने इधर-उधर भटक रहा मवेशी अचानक से वहां आ जाने से आमने-सामने से टक्कर हो गई जिससे मवेशी की जान मौके पर ही चली गई। साथ बताया कि वाहन चालक शायद नशे में था। इस लिए तेज गति से अपनी वाहन चला कर आ रहा था। साथ ही कहा यदि नगर पंचायत अधिकारी सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं पर ध्यान दिया जाता. या उनके लिए कांजी हाउस का व्यवस्था होता तो यह घटना शायद नहीं होती।
स्थानीय नागरिकों की माने तो स्थानीय नागरिकों की माने तो, एक्सीडेंट का यह पहला मामला नहीं है। पूर्व में भी कई बार आवारा पशुओं के कारण हादसे हो चुके हैं, लेकिन नगर पंचायत के अधिकारी (सीएमओ ) का इस और कभी ध्यान नहीं जाता ना ही अब तक कोई उपयुक्त कदम उठाया गया। जिस कारण आवारा मवेशी जगह-जगन में रोड पर अपना आशियाना बनाकर इधर-उधर घूमते फिरने के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इसी लापरवाही का नतीजा सामने है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे कई बार लिखित एवं मौखिक शिकायत नगर पंचायत को कर चुके हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार वाचाल बहरे नगर पंचायत अधिकारी के कानों मेंअब तक जू तक नहीं रेंग रही हैं। अब तो लगता है नगर पंचायत अधिकारी किसी बड़ी जान-माल की क्षति का इंतजार कर रहा है? लेकिन यह सवाल बरकरार है कि आखिर प्रशासन हादसे के बाद ही क्यों जागता है?
नगर पंचायत सीएमओ रविन्द्र लाल से फोन पर मवेशियों के आवारा भटकने के बारे में पूछा गया तो उनके द्वारा कहा गया कि मैं गाड़ी चला रहा हूँ अपको कोई भी सवाल-जवाब करना हो तो कल सवेरे कार्यालय में आ जाइए। मवेशियों को हटाने का वीडियो बनवा कर आपको भेज दूंगा नगर पंचायत अध्यक्ष धर्म सिंह से उनके मोबाइल नंबर पर एक्सीडेंट एवं कांजी हाउस के विषय को लेकर पूछने पर उनके द्वारा बताया गया। आवारा मवेशियों को रखने के लिए पूर्व में गौठान में रखने व्यवस्था थी। ग्राम झींगो में कांजी हाउस भी था लेकिन स्टाफ न होने के कारण नहीं रखा जा सकता जल्दी इसके लिए बजट बनाकर नगरीय प्रशासन के पास भेजा जाएगा पास होने पर कांजी हाउस में उसकी व्यवस्था की जाएगी।
भारद्वाज सिंह से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क कर मवेशी एक्सीडेंट के मामले में जानकारी चाही गई तो उनके द्वारा बताया गया कि एल्कोमीटर से जांच में चालक डॉक्टर नशे में पाया गया जिसे जांच के लिए फॉरेंसिक लैब में डॉक्टर के द्वारा भेजा गया है।
राजपुर थाना प्रभारी
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