- सरगुजा संभाग के जशपुर के प्रधान आरक्षक ने अपने नाबालिक पुत्र से सड़क पर चलवाई थार गाड़ी, क्या नाबालिक का वाहन चलाना नहीं है कानूनन जुर्म,सोशल मीडिया रील बनाकर भी प्रधान आरक्षक ने किया पोस्ट?
- रील स्टोरी में दिख रहा नाबालिक है प्रधान आरक्षक जशपुर का पुत्र:सूत्र
- क्या जिस तरह डीएसपी की पत्नी के मामले में हुआ अपराध दर्ज उसी तरह प्रधान आरक्षक के मामले में भी होगी कार्यवाही?

-न्यूज डेस्क-
सरगुजा/जशपुर,22 जून 2025 (घटती-घटना)। क्या पुलिस होना ही कानून का पालन नहीं करने के लिए काफी है,क्या पुलिस के लिए हर मामले में माफी है? ऐसा सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि हाल फिलहाल में कई ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जहां पुलिस अधिकारी,पुलिसकर्मी के परिवार के लोग खुलेआम कानून तोड़ते नजर आ जाते हैं और उनके ऊपर कार्यवाही नहीं की जाती वहीं यदि करने की नौबत आई भी तो छोटा मोटा चालान होता है उन्हें छोड़ दिया जाता है। वैसे अपने मामले में अपने परिवार के लोगों के मामले में कानून को लचीला बताने वाली साबित करने वाली पुलिस जब दूसरे की बारी आती है दूसरों को ऐसे ही मामलों में गंभीर धाराओं का दोषी बनाती है और उन्हें दंडित करने कोई कोर कसर नहीं छोड़ती है। पुलिस के द्वारा उनके परिवार के लोगों के द्वारा कानून तोड़ने के कई मामले वैसे तो देखने को मिल जाते हैं लेकिन हाल फिलहाल में सरगुजा संभाग के एक मामले में जहां एक डीएसपी की पत्नी की एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई जिसमें वह अपने जन्मदिवस पर नीली बत्ती लगी हुई गाड़ी की बोनट पर बैठकर वह भी चलती गाड़ी में केक काटती नजर आईं वहीं वह इस दौरान अपने साथियों या परिवार के लोगों के साथ भी गाड़ी में नजर आईं जिनमें कुछ कहीं लटके नजर आए कुछ पीछे डिक्की खोलकर बैठे नजर आए और एक गाड़ी चलाते नजर आए।
मामले को सोशल मीडिया में डाला गया और जब पुलिस से इस संबंध में प्रश्न होने लगे पुलिस ने चालानी कार्यवाही कर अपना पल्ला झाड़ लिया, वैसे वह वही पुलिस थी जो सड़को पर अन्य के लिए काफी नियम वाली होती है और वाहन मामले में भी या तो बड़ी चालानी कार्यवाही करती है या फिर दंडित करने की कार्यवाही करती है या कुछ नहीं तो काफी परेशान करती है,वैसे सरगुजा में अधिकारी की पत्नी के सोशल मीडिया वाले उस रील मामले में कार्यवाही हो गई जिसमें अधिकारी की पत्नी वाहन परिचालन कानून की दोषी पाई गईं वहीं अभी अधिकारी वाला मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक नया रील सोशल मीडिया में देखने को मिला जहां एक प्रधान आरक्षक जिनके बारे में बताया जा रहा है कि वह हाल ही में कोरिया से जशपुर पहुंचे हैं ने एक रील पोस्ट की है जिसमें उनका नाबालिक बेटा थार गाड़ी सड़क पर दौड़ा रहा है वहीं कोई रील भी बना रहा है जिसे उक्त प्रधान आरक्षक ने अपने स्टेट्स पर पोस्ट किया है। जो रील पोस्ट की गई है वह दैनिक घटती-घटना के पास है और दैनिक घटती-घटना रील की पुष्टि के प्रयास में है जिसकी पुष्टि होते ही आगे की खबर प्रकाशित करने का काम करेगी। वैसे यदि रील में नाबालिक एक प्रधान आरक्षक का बेटा है तो यह गंभीर से भी गंभीर मामला माना जाएगा क्योंकि यदि कानून का पालन कराने वाले ही कानून तोड़ने लगेंगे तो कैसे कानून का राज कायम हो सकेगा यह बड़ा सवाल है। प्रधान आरक्षक की थार की काली फिल्म भी कोरिया जिले में प्रसिद्द थी और जिसे कोरिया पुलिस भी नहीं निकलवा सकी थी,प्रधान आरक्षक वैसे काफी पैसे वाले बन चुके थे कोरिया में और यह पैसा उन्होंने ईमानदारी और कानून को हाशिए पर रखकर कमाया यह भी सुनने को मिलता रहा है। वैसे प्रधान आरक्षक जशपुर के नाबालिक बेटे के थार गाड़ी चलाने वाली रील मामले में क्या पुलिस जांचकर कार्यवाही करेगी यह देखने वाली बात होगी।
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