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सूरजपुर@उप तहसील कार्यालय देवनगर में 4 साल में 5 नायाब तहसीलदार बदलेछठवें पदस्थ है,पर एक व्यक्ति का फर्द बंटवारा नहीं निपटा पाए…

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-शमरोज खान-
सूरजपुर,02 जून 2025 (घटती-घटना)। संविधान में न्यायालय को किसी मंदिर से कम मन नहीं गया,न्यायालय पर सभी के आस्था और विश्वास रहता है चाहे वह न्यायालय कोई भी, पर इस समय राजस्व न्यायालय पर लोगों की आस्था व विश्वास कम होता जा रहा है,उसकी वजह है की वहां पर बैठे न्याय देने वाले अधिकारी जो किसी भगवान से कम अपने आप को नहीं समझ रहे हैं, एक बार मंदिर में बिना चढ़ावे के आपको भगवान का आशीर्वाद तो मिल जाएगा और आपके कर्म अनुसार मिलता भी है पर राजस्व न्यायालय में आपको वहां पर बैठे न्याय के भगवान के अनुसार यदि अपने चढ़ाव नहीं चढ़ाया तो आपको न्याय नहीं मिलेगा,एक बार मंदिर के भगवान तो आप से मुंह खोलकर चढ़ावा चढ़ान को नहीं कहेंगे आप अपनी आस्था व भक्ति के अनुसार वहां पर चढ़ावा चढ़ा कर आ जाएंगे,अपनी मन्नत भी आप मांगेंगे जो आपकी पूरी भी हो जाएगी,आपकी आस्था व भक्ति के अनुसार पर राजस्व न्यायालय में बैठे भगवान के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं है वहां पर आपको चढ़ना उनके अनुसार चढ़ाना होगा,यदि उनके अनुसार चढ़ावा नहीं चढ़ा तो आप भूल जाइए की आपको न्याय मिलेगा उल्टा आप का न्याय दूसरी तरफ चल जाएगा जिधर से चढ़ावा आ जाएगा…आम आदमी व गरीब तपके का व्यक्ति तो भूल जाए की उसे उसकी स्थिति के अनुसार और उसके सच्चाई व दस्तावेजों के आधार पर उसे न्याय मिलेगा, सारी चीज होने के बाद भी उसे सालों साल चक्कर लगाना पड़ेगा,जब तक की चढ़ावे की मांग पूरी ना हो जाए बिना चढ़ने के वह भूल जाए की उनका कार्य राजस्व न्यायालय के बैठे मंदिर में के भगवान कर पाएंगे। यह परंपरा राजस्व न्यायालय में बन चुकी है इस परंपरा को कोई सरकार खत्म नहीं कर पा रही है, इसके पीछे की मुख्य वजह क्या है यह किसी को बताने की जरूरत भी नहीं है लगभग लोग समझदार हो चुके हैं और सब समझते हैं की राजस्व न्यायालय की स्थिति इस समय क्या है? वहां पर बैठे जिम्मेदार को बिल्कुल भी किसी मंत्री विधायक व अपने उच्च अधिकारी का डर नहीं है,समय अवधि पर काम उन्हें करना नहीं है ईमानदारी से न्यायालय में फैसला उन्हें देने नहीं है, यह आरोप किसी अखबार का या फिर किसी पत्रकार का नहीं है यह आरोप उन व्यक्तियों का है जो रोज न्यायालय में इन परिस्थितियों से दो चार हो रहे हैं और शिकायत कर रहे हैं उच्च अधिकारी सहित मंत्री विधायकों से फिर भी उनके कार्य पूरे नहीं हो रहे हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसी बात क्यों हो रही है तो ऐसी बात इसलिए हो रही है क्योंकि एक व्यक्ति पिछले चार साल से उप तहसील कार्यालय देवनगर सूरजपुर का चक्कर काट रहा है सिर्फ अपने जमीन के फर्द बंटवारे के लिए इन चार सालों में कई नायब तहसीलदार बदल गए पर उस व्यक्ति का प्रकरण समाप्त नहीं हो पाया, इसका फर्द बंटवारा नहीं हो पाया इसके बाद उसने स्थानीय मंत्री को इस बात की जानकारी दी जिसके बाद मंत्री ने भी बोला इसके बाद स्पष्टीकरण का आदेश हुआ पर अभी तक कोई कार्यवाही उसे नायब तहसीलदार पर नहीं हुई। कोई भी राजस्व मामला 9 महीने साल भर के अन्दर में निपटारा करने की अवधि तय है पर यहां 4 साल में भी नहीं निपटारा हो पा रहा है यह राजस्व न्यायालय की व्यथा बता रहा है।
चार साल में बदले तहसीलदार पर मामला जस का तस
हम आपको बता दें कि देवनगर उप तहसील 2019 में बना इसके बाद स्थानीय लोगों को यह उम्मीद जगी कि अब तहसील खुलने से हमारी समस्याओं का समाधान कम समय में हो जाएगा लेकिन 4 साल से यह किसान अपने भारत वाले के लिए तहसील के चक्कर लगा रहा है लेकिन उसकी समस्या दूर नहीं हुई हालांकि इस मामले के बाद तीन से चार तहसीलदार जरूर बदल गए लेकिन यह मामला जस करता रहा जो भी अधिकारी आए सभी किस को घुमाते ही रहे यही वजह है कि आज भी यह मामला अधिकारियों के दफ्तर में धूल खा रहा है जानकारी के अनुसार 2 वर्ष पूर्व इस मामले को खारिज कर दिया गया था लेकिन अधिकारियों की दादागिरी तो देखिए इस पूरे मामले को ऑफलाइन आज दिनांक तक चलते आ रहे हैं इस पूरे मामले में कई ऐसे सवाल खड़े होते हैं जो अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करता है कि आखिर 2023 में अगर इस मामले को खारिज कर दिया गया था तो क्या जरूरत थी कि इस मामले को ऑफलाइन चलने का।
उप तहसील में पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप
हम आपको बता दें उप तहसील देवनगर में आरोप लगना कोई नई बात नहीं है, है पूर्व में भी यहां कई गंभीर आरोप लगे है बीते कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री के सुशासन तिहार में चल रहे समाधान शिविर में भी कुछ ग्रामीण अपनी शिकायत लेकर पहुंचे थे जिन्हें मुख्यमंत्री तक पहुंचने नहीं दिया गया ऐसी बातें सूत्रों से भी सामने आई थी और उप तहसील देवनगर में बिना पैसे के काम नहीं होने का गंभीर आरोप लगा था बावजूद इसके उप तहसील देवनगर में किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही जिले के उच्च अधिकारियों के द्वारा नहीं किया किया गया।
दोनों का जवाब सही नहीं होगा तो उन पर कार्रवाई की जाएगी…
सूरजपुर अपर कलेक्टर जगन्नाथ वर्मा ने कहा की यह मामला देवनगर उप तहसील का है इस प्रकरण को लेकर हमने आरो मीटिंग में बुलवाया भी था और प्रकरण का परीक्षण भी किए सिटिजन चार्टर स्पष्ट कहता है कि बटवारा हो विवादित बटवारा हो सभी को 6 से 9 महीने में डिस्पोजल करना होता है, इस प्रकरण में पहले भी काफी समय बीत चुका है इसी वजह से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है, उनके बाबू से भी स्पष्टीकरण लिया जा रहा है, नायब तहसीलदार का कहना है कि उसमें आपçा आई है हमने उन्हें निर्देशित किया है कि आपत्ति का निराकरण संहिता के अनुसार करें और समय का भी ध्यान रखें, समय अवधि का उल्लंघन किया गया है, वहां दोनों से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है यदि दोनों का जवाब सही नहीं होगा तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।
पटवारी और राजस्व निरीक्षक चार बार मौके पहुंचकर फर्द नक्शा काट तहसील में जमा कर चुके हैं फिर भी प्रकरण समाप्त नहीं हुआ
ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ सरकार जहां एक ओर राजस्व मामलों में त्वरित निराकरण करने और भ्रष्टाचार रोकने नए-नए नियम लागू कर रही है वही कुछ अधिकारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा सूरजपुर जिले का उपतहसील देवनगर एक बार फिर सुर्खियों में जहां किसान शिवप्रसाद साहू निवासी नारायणपुर ने महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से लिखित शिकायत कर अपनी व्यथा सुनाई किसान ने कहा बीते 4 साल से अपने जमीन के फर्द बंटवारे के लिए तहसील के चक्कर लगा रहा हु और जिम्मेदार अधिकारी तहसील के चक्कर लगवा रहे हैं और वहीं पटवारी और राजस्व निरीक्षक चार बार मौके पहुंचकर फर्द नक्शा काट तहसील में जमा कर चुके हैं लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ और जिम्मेदार अधिकारी लगातार उसे तहसील का चक्कर लगवा रहे हैं साथ ही किसान ने आरोप लगाया कि अनावेदक से तहसीलदार मिलजुल कर एक पक्षीय कार्रवाई करती जिससे परेशान होकर किसान ने अब महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाडे के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंचा और समस्या का समाधान करने मंत्री से आग्रह किया।
मंत्री के निर्देश देने के बाद प्रशासन ने शुरू की कार्यवाही पर कार्यवाही भी बीच में कहा अटक गई?
जहां एक ओर इस पूरे मामले में महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से किसान ने शिकायत किया जिसके बाद मंत्री ने कलेक्टर एस जयवर्धन को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए जिसके बाद कलेक्टर ने नायब तहसीलदार हीना टंडन और रीडर को कारण बताओं नोटिस जारी किया और 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा लेकिन नोटिस जारी हुए घंटे तो दूर कई दिन बीत गए अब तक कोई कार्यवाही होती नहीं दिख रही जिससे यह आशंका लगाई जा रही है कि यह कार्यवाही सिर्फ मामले को शांत करने के लिए की गई है। सूत्रों का कहना है कि मामला सिर्फ शांत करने के लिए ही यह प्रोपेगेंडा रचा गया था इस मामले में किस को न्याय मिले ऐसी उम्मीद दिख नहीं रहा।
आरोप प्रत्यारोप का दौर होगा शुरु
जहां एक ओर किसान ने देव नगर उप तहसील के तहसीलदार पर गंभीर आरोप लगाया है वही हल्का पटवारी और निरीक्षक राजस्व के द्वारा चार बार नक्शा काटने की बात कही लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ वहीं अब शिकायत और नोटिस के बाद अब आरोप प्रत्यारौप का दौर शुरू होगा जिले के उच्च अधिकारियों को छोटे कर्मचारियों की गलती बताई जाएगी और उन पर कार्यवाही करवा कर खुद को पाक साफ बताया जायगा यह पूरा मामला कई सवालों को जन्म देता है क्या जिम्मेदार अधिकारी उप तहसील देवनगर में चल रहे समस्त प्रकरणों का जांच करेंगे? और क्या कोशिश करेंगे की कितने ग्रामीण वहां परेशान हैं और अधिकारियों के चक्कर लगा है? या हर बार की तरह इस बार भी बड़े अधिकारी को बचाकर किसी छोटे अधिकारी के ऊपर कार्यवाही करके इस पूरे मामले को शांत कर दिया जाए।


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