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सोनहत@मोर पानी मोर गांव के तहत बोडार में जन सहयोग से जल संरक्षण का कार्य शुरू

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-राजन पाण्डेय-
सोनहत,29 मई 2025 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ सरकार के जल संरक्षण महाभियान ‘‘मोर गांव मोर पानी’’ के तहत कोरिया जिले में शुरू किए गए ‘‘आवा पानी झोंकी’’ अभियान ने ग्रामीणों के सहयोग से नया आयाम हासिल कर लिया है। इस जनअभियान के तहत ग्राम पंचायत बोडार जल संरक्षण का प्रेरणास्रोत बनकर उभर रही है, जहां किसान पांच परसेंट मॉडल को अपनाकर अपने खेतों में जल संचयन के लिए गड्ढे बना रहे हैं। साथ ही हैंड पम्पो निकलने वाले अतिरिक्त जल को सोख्ता के माध्यम से संरक्षित करने पहल की जा रही है
जिला कार्यालय से जारी निर्देश के पालन में ग्राम पंचायत बोडार जनपद पंचायत सोनहत अंतर्गत जन सहयोग से चार सोख्ता का निर्माण जन भागीदारी से किया गया जल संरक्षण की दिशा में चलाया जा रहा है यह अत्यंत ही महत्वपूर्ण एवं सराहनी कार्य है जिससे आने वाले भविष्य को हम सवार सकते हैं पानी की कमी को देखते हुए निरंतर भूमिगत जल स्तर कम हो रहा है सभी घरों में जल संरक्षण का यह कार्यक्रम चलाया जाना नितांत आवश्यक है तथा जन सहभागिता से प्रत्येक गांव में प्रत्येक वार्डों में यह कार्यक्रम कराया जाना है सभी किसानों को इस कार्यक्रम में शामिल किया जाना है कार्यक्रम के तहत अनुभाग एवं जनपद के निर्देशानुसार सचिव प्रवीण कुमार पांडे ने बताया कि पंचायत के सरपंच श्रीमती संगीता सिंह उप सरपंच श्री सुरेश कुमार राजवाडे पंच लीलावती राजवाड़े निर्मल शिव बालक शिव कुमारी एवं पंचायत के सभी कार्यकर्ता प्रदीप राजवाड़े संजीव राजवाड़े सुनील राजवाड़े अनुज राजवाड़े सकेंद्र राजवाड़े वृद्ध महिला जानकीबाई विहान की वीडियो में राजकुमारी राजवाड़े जय कुंवर एवं भारी संख्या में ग्रामीण जनों की उपस्थिति में आज का कार्यक्रम किया गया किसी भी प्रकार का शासकीय राशि का व्यय नहीं किया गया कार्यक्रम में पूरी तरह ग्रामीणों में उत्साह देखा गया जनपद पंचायत से रश्मि साहू एवं चंद्रभान बिहार करारोपण अधिकारी भी उपस्थित रहे।
क्या है पांच परसेंट मॉडल?
जल संरक्षण की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा एक नई अभिनव पहल की है। ‘‘आवा पानी झोंकी अभियान’’ के तहत किसानों को खेती में 5 प्रतिशत मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस मॉडल के तहत खेत की 5 प्रतिशत भूमि में सीढ़ीनुमा गड्ढा बनाकर वर्षा जल को संरक्षित किया जाएगा, जिससे भूजल स्तर बढ़ेगा और फसल की उत्पादकता में वृद्धि होगी। ‘‘आवा पानी झोंकी’’ अभियान को जन आंदोलन में बदलने के लिए जिला प्रशासन द्वारा दीवार लेखन, मुनादी, नुक्कड़ नाटक और जनचेतना कार्यक्रमों जैसी गतिविधियां संचालित की गई है। सुशासन तिहार के तहत समाधान शिविरों में जलदान कार्यक्रम चलाया जा रहा है,जिसे व्यापक समर्थन मिल रहा है।


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