- क्या सोनपुर धान खरीदी केंद्र में सिर्फ 25 हमाली मजदूर हैं?
- सोनपुर धान खरीदी केंद्र प्रभारी सिर्फ 25 हमाली मजदूर को ही भुगतान क्यों करना चाह रहे हैं क्या बाकी का भुगतान पहले ही हो चुका है?
- क्या लगभग 70 हजार क्विंटल धान सिर्फ 25 हमाली मजदूर रख दिए?


-शमरोज खान-
सूरजपुर, 22 मई 2025 (घटती-घटना)। जिला सूरजपुर का सोनपुर धान खरीदी केंद्र सुर्खियों में और यह सुर्खी सिर्फ इसलिए बटोर रहा है क्योंकि यहां पर हमाली राशि को लेकर जंग छिड़ी हुई है,हमाली राशि पर आखिर हक किसका है? उन किसानों का जिन्होंने अपना पैसा देकर अपना धान ढूलवाया और चढ़ावाया या फिर उन हमाली मजदुर का है जो किसानों का धान बिना किसानों से पैसे लिए बिना ही उनका धान ढूलवाया,तोलावाया और रखवाया,किसान शिकायत कर रहे हैं कि हमने धान ढूलवाया,तोलावाया,सिलवाने और चढ़ने का पैसा मजदूरों को दिया,इसलिए हमाली राशि उनके खाते में दिया जाए,वही धान खरीदी केंद्र प्रभारी विवेक चौरसिया के 25 हमाली मजदूरो से आवेदन देकर शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें धान ढूलवाया,तोलावाया,सिलवाने और चढ़ने का भुगतान नहीं हुआ है,अब यह मामला काफी पेचीदा होते जा रहा है वही इस पूरे मामले में धान खरीदी केंद्र प्रभारी विवेक चौरसिया की भूमिका संदिग्ध दिख रही है, क्योंकि विवेक चौरसिया सिर्फ 25 मजदूरों को ही मजदूरी भुगतान करना चाह रहे हैं, जिसकी सूची भी उन्होंने बना ली है और किसे कितना पैसा देना है यह भी उन्होंने तय कर लिया है और इन लोगों को पैसा देने के लिए वह समिति प्रबंधक से पैसे की मांग कर रहे हैं पर सवाल यह उठ रहा है कि क्या उस समिति में सिर्फ 25 ही मजदूर थे जो 70 हजार मि्ंटल धान को ढूलवाया,तोलावाया,सिलवाने और चट पर लगा दिया और 70 हजार मि्ंटल धान को उन्होंने ट्रक पर चढ़कर ट्रांसपोर्ट भी कर दिया यानी कि उन मजदूरों ने 1 लाख 40 हजार मि्ंटल धान की बोरियां उठाई? क्या सिर्फ 25 मजदूर इतना मजदूरी कर सकते हैं? यह एक बहुत बड़ा सवाल है क्योंकि किसी भी समिति में 100-150 मजदूर के बिना यह काम नहीं हो सकता,क्योंकि यह काम काफी मेहनत वाला है और इसमें मजदूर की संख्या काफी लगती है, हर धान खरीदी केंद्र में 100 से 150 मजदूर लगभग इस काम के लिए लगे हुए हैं, फिर सोनपुर धान खरीदी केंद्र क्या एक अलग ही धान खरीदी केंद्र है जहां पर सिर्फ 25 मजदूर ही इतनी मात्रा में धान को चढ़ता और उतरता लेते हैं, वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि राइस मिलूरों का जो ट्रक आता है उसमें भी राइस मिलर खुद अपना मजदूर भेज कर धन को ट्रैक पर चढ़ते हैं और ट्रक से फिर उतरवाते हैं फिर उस धान के चढ़ने उतरने का भी पैसा कैसे मजदूरों को मिलता है? क्या यह सब पैसा धान खरीदी केंद्र के प्रभारी हड़प जाते हैं या फिर इस पैसे को हड़पने का यह प्रोपेगेंडा इस समय मचाया गया है, इस समय सभी की निगाहें 6 लाख की हमाली राशि पर टिकी हुई है आखिर इस राशि को कैसे वह अपने पास लाए इसके लिए जोर आजमाइश शुरू है,हमारी राशि मजदूरों के खाते में जाए ऐसा समिति प्रभारी विवेक चौरसिया का प्रयास है? वह लगातार इस प्रयास में है कि हमालों को ही या राशि मिले ताकि वह उनसे उस राशि को ले सकें, वहीं समिति प्रबंधक का कहना है की धान खरीदी प्रभारी मुझे लिख कर दे दे कि वह हमलों की मजदूरी प्राप्त कर लिए हैं तो मैं उन्हें यह पैसा हैंडोवर कर दूंगा पर शायद वह लिखने को तैयार नहीं है जिस वजह से पेच फंसा हुआ है और यह कब तक चलेगा इसका पता नहीं? अब हमाली की राशि को लेकर समझ नहीं आ रहा है कि आखिर यह पैसा किसान की शिकायत पर किसानों को भुगतान कर दिया जाए या फिर हमाली मजदूर की शिकायत पर उन्हें भुगतान कर दिया जाए या फिर इस पैसे को सीधे शासन अपने पास वापस बुला ले ताकि यह झगड़ा ही खत्म हो जाए?
ऑपरेटर से बने धान खरीदी केंद्र प्रभारी
सूत्रों का कहना है कि धान खरीदी केंद्र प्रभारी बनने में लाभ ज्यादा है,जिस वजह से लोग धान खरीदी केंद्र प्रभारी बनना चाहते हैं इसके लिए वह सिफारिश भी लगते हैं सोनपुर धान खरीदी केंद्र के प्रभारी विवेक चौरसिया पहले कंप्यूटर ऑपरेटर थे पिछले 2 साल से यह धान खरीदी केंद्र का जिम्मा संभाल रहे हैं और आगे भी इस जिम्मा को संभालने के लिए वह राजनीतिक अप्रोच भी लगते हैं और उनका धान खरीदी केंद्र प्रभारी बनने का उद्देश्य सिर्फ राशि की गड़बड़ी करना है इस बार ही हमाली राशि को लेकर जंग छिड़ हुआ है यदि इन्हें उस पैसे का मोह नहीं होता तो शायद यह जंग ना होती? उस पैसे का मोह ही इस समय हमाली राशि को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित कर दिया है अब किसान और मजदूर दोनों में से कौन सही है किस को पैसा मिलना चाहिए यह अब जांच का विषय बन चुका है और जांच उपरांत ही इसका भुगतान हो इसकी मांग उठने लगी है।
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