प्रतापपुर में अधूरे दस्तावेज़ों पर ज़मीन डायवर्जन,उभरा ‘खदान घोटाले’ का नया चेहरा,जमकर हो रही लेन-देन
प्रतापपुर,14 मई 2025 (घटती-घटना)। प्रतापपुर क्षेत्र में प्रस्तावित एसईसीएल की खुली खदान परियोजना से जुड़े ज़मीन अधिग्रहण के मामलों ने एक बार फिर सरकारी प्रक्रिया पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां राजस्व विभाग के लिपिकों बाबुओं की मिली भगत से जमकर डायवर्सन का खेल खेला जा रहा है तथा बड़ी संख्या में ज़मीनों का डायवर्सन बिना वैध और पूर्ण दस्तावेज़ों के किया गया है। इससे करोड़ों रुपए के मुआवज़ा घोटाले की आशंका गहरा गई है।
कागज़ अधूरे, डायवर्सन पूरा-सवालों के घेरे में राजस्व अमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रतापपुर राजस्व क्षेत्र में अनेक भूखंडों को कृषि से खनन प्रयोजन में परिवर्तित कर दिया गया। परन्तु जिन ज़मीनों का डायवर्सन किया गया, उनके पास न तो पूर्ण खतियान था,न स्पष्ट खसरा नंबर, और न ही अद्यतन नक्शा। नामांतरण या स्वामित्व प्रमाण जैसे दस्तावेज भी कई मामलों में अपूर्ण थे। इसके बावजूद ज़मीनों को खनन प्रयोजन हेतु स्वीकृति दे दी गई।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रक्रिया राजस्व संहिता और डायवर्सन नियमों की खुली अवहेलना है। इससे न केवल सरकारी नियमों को ताक पर रखा गया बल्कि कुछ प्रभावशाली लोगों को भारी मुआवज़ा दिलवाने का रास्ता भी साफ किया गया।
क्या यह सिर्फ लापरवाही है या घोटाले की सुनियोजित पटकथा?
ज़मीन डायवर्जन प्रक्रिया की पड़ताल करने पर यह समझना कठिन नहीं कि कहीं न कहीं प्रशासनिक मशीनरी में मिलीभगत रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि डायवर्जन में कुछ पटवारी और राजस्व कर्मचारी ऐसे भूखंडों को खनन प्रयोजन में चढ़ा रहे हैं जिनके दस्तावेज आज भी अपूर्ण हैं, और उसके बदले मुआवज़ा उन्हीं को मिला जो ‘तंत्र’ से जुड़े हैं।
यह भी आशंका जताई जा रही है कि फर्जीवाड़े के जरिए कुछ जमीनों को खनन योग्य बताकर करोड़ों का मुआवज़ा डकार लिया गया है—वो भी असली मालिकों को अंधेरे में रखकर।
घटना की जानकारी फैलते ही स्थानीय लोगों और जागरूक ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की माँग की है। उन्होंने कहा कि अगर जांच नहीं की गई, तो यह घोटाला आने वाले समय में और विकराल रूप ले सकता है।
कुछ ग्रामीणों ने प्रत्यक्ष रूप से यह भी आरोप लगाया कि यह खनन परियोजना के नाम पर चल रहा एक सुनियोजित भ्रष्टाचार है जिसमें सरकारी ज़मीनों को भी निजी बता कर मुआवज़ा उठाया गया।
तथा कुछ भूमि शासकीय होने के बाद पूर्व एवं अब के नक्शे में भारी छेड़छाड़ हुई है। जहां पूर्व के नक्शा खसरा में जो भूमि शासकीय प्लांट था वह लोगों के खाते में चढ़ा भूमि कई तरह का भ्रष्टाचार को उजागर करताहै।
प्रतापपुर क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण और डायवर्सन प्रक्रिया को लेकर जो संदेह खड़े हुए हैं, वे शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिन्ह हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण पर क्या कदम उठाता है—क्या दोषियों की पहचान होगी या यह मामला भी फाइलों में गुम हो जाएगा?
इस विषय में एसडीएम ललिता भगत ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी इसमें जो भी कार्यालय के लिपिक की संदिग्ध भूमिका है उसे पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करते हुए कलेक्टर साहब को अवगत कराई जाएगी, और कहां-कहां जमीन फर्जीवाड़ा हुआ है री पटवारी को निर्देशित करती हूं।
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