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सूरजपुर@क्या प्रकाश इंडस्ट्रीज ओपन कास्ट खदान डीजीएमएसनियमों के विरुद्ध कर रहा कोयला उत्खनन?

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-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर, 07 मई 2025 (घटती-घटना)। सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड में ग्राम भास्करपारा में प्रकाश इंडस्ट्रीज को ओपन कास्ट खदान आवंटन किया गया है, यहां पर खदान सुरक्षा महानिदेशालय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के नियमों का पालन नहीं हो रहा डीजीएमएस का मिशन खदान में उसके आसपास दुर्घटनाओं व बीमारियों की जोखिम की पहचान करना है और उसे काम करना है जिसके लिए उक्त कानून नियम विनिमय मानक एवं दिशा निर्देश तय किया गया जिसके आधार पर ही खदान का संचालन होना चाहिए, पर इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रकाश इंडस्ट्रीज की ओपन कास्ट खदान इन नियमों के तहत चल रही है? क्या इन नियमों को दरकिनार करके तो दुर्घटना का खतरा तो नहीं बढ़ा रही? क्योंकि वहां पर इस समय जैसी स्थिति है उसे देखकर यही अनुमान लगाया जा रहा है यहां पर भरासाही मची हुई है नियम कायदे कानून को दरकिनार करके कोयला उत्खनन के साथ-साथ जो सुविधाएं देनी चाहिए उससे भी वह अपने आप को दूर करके चल रहे हैं, सिर्फ उनका उद्देश्य कोयला निकलना और कोयल को विद्युत प्लांट तक पहुंचाना ही रह गया है किसी की जिंदगी मौत व विकास से उनका वास्ता नहीं रहा? जहां पर कोयला निकालने का काम शुरू हो रहा है उससे पहले वहां पर इंफ्रास्ट्रख्र का कार्य चल रहा है जमीन अधिग्रहण हो चुके हैं इसे जुडी औपचारिक या निर्धारित प्रक्रिया पूरी लगभग हो चुकी है, जमीन अधिग्रहण में भी झोल-झाल देखने को मिला था पर वहां के कुछ स्थानीय नेता को अपने गिरफ्त में लेकर प्रकाश इंडस्ट्री ने अपने सारे मामले निपटारा करके काम शुरू कर लिया अब जब काम शुरू हो गया है तो वहां पर भराशाही की खबरें सामने आ रहे हैं नौकरी लगने के नाम पर सबसे बड़ा ठग गिरोह वहां पर सक्रिय है बताया जाता है की नौकरी लगने का सबसे ज्यादा प्रलोभन पर लोगों दे रहे हैं, जिनकी सबसे ज्यादा जमीन उसे खदान के लिए अधिग्रहित हुई है वहां के नेता अपने आप को प्रकाश इंडस्ट्रीज का मालिक मान बैठे हैं बेरोजगार लोग इस समय उन्हें के पैर पकड़ रहे हैं की नौकरी दिला दें इसके लिए पैसे के डिमांड भी खूब हो रही है।
एसआईजी के द्वारा बिना किसी आवेदन व बिना आदेश के 250 से ऊपर लोगो की भर्ती करा लिया गया है…
मिली जानकारी के अनुसार प्रकाश इंडस्ट्रीज स्थानीय व्यक्तियों को विश्वास में ले कर किया गुमराह बाहरी व्यक्तियों को नोकरी के नाम पर को झूठा प्रलोभन दिया जारहा है,मामला सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड के ग्राम बसकर में स्थापित भास्करपारा कोल खादान का है, जिसमें प्रकाश इंडस्ट्रीज के द्वारा स्थानीय व्यक्तियों एवं भूमि ग्रहित किसान एवं युवाओं से वादा किया गया था कि खादान खुलते ही लोगों को नोकरी मिलेगा, जब खदान खुली तो तो पता चला कि प्रकाश इंडस्ट्रीज के द्वारा कोल खनन के लिए एसआईजी शाहिद इंफ्रा ग्रूप को ठेके पे कोयला निकालने का कार्य दे दिया गया है,वहीं इस संदर्भ में स्थानीय युवकों से पूछताछ में पता चला कि एसआईजी के द्वारा बिना किसी आवेदन व बिना आदेश के 250 से ऊपर लोगो की भर्ती करा लिया गया है और अधिकांश बाहरी व नॉन टेक्निकल के लोगो को नौकरी में रखा गया है, स्थानीय व्यक्ति अगर नौकरी के लिए जाते हैं तो किसी भी प्रकार का कार्य नहीं बतलाया जाता है, लोगों की उम्मीद थी कि इंडस्ट्रीज आएगी तो काम मिलेगा नौकरी मिलेगा,वही इस संदर्भ में सूत्रों से पता चला है कि एसआईजी ग्रुप जिसको कोयला निकालने का कार्य मिला है सैयद जाफर हुसैन के द्वारा अपने ही समुदाय के लोगों की अधिकांश भर्ती कर लिया गया है, अगर काम की बात की जाए तो किसी भी काम में प्राथमिकता नहीं मिल पा रहा है लेबर भर्ती प्रक्रिया में भी बगैर सूचना के की कितने दिनों के लिए रखा जाएगा कितना सैलरी रहेगा उसकी भी जानकारी लोगो को न दे के गुमराह किया जा रहा है।
कोयला खान विनिमय 2017 में धारा 44 सुरक्षा अधिकारियों के कर्तव्य का भी नहीं हो रहा पालन
प्रकाश इंडस्ट्री डीएमएस व कोयला खान विनिमय 2017 की धारा 44 का भी खुला उल्लंघन चल रहा है कोयला उत्खनन करने की चाह में सुरक्षा को दरकिनार किया जा रहा है,हैवी ब्लास्टिंग से लेकर जहां पर है वहां बिना डायवर्ट किया ही उत्खनन का कार्य हो रहा है कोयला लेकर जाने वाली वाहन भी लापरवाही पूर्वक चल रहे हैं जिसमें दुर्घटना क्या शंका बनी रहती है वहीं कोयला निकालने के लिए हटाने वाली मिट्टी में मवेशियों का गिरने का भी डर बना रहता है सुरक्षा से संबंधित नियमों का पालन नहीं हो रहा है जबकि डीजे में इसकी टीम को भी जाकर वहां निरीक्षण करना चाहिए कि आखिर वहां सुरक्षा के क्या इंतजाम है और क्या नियमों के तहत कोयल का उत्पादन हो रहा है या फिर नियम विरुद्ध तरीके से ही जल्द से जल्द कोयला निकालकर भागने का प्रयास है। डीजीएमएस (खान सुरक्षा महानिदेशालय) के नियम और विनियम खदानों में सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार द्वारा बनाए गए हैं। ये नियम खदानों में होने वाले संभावित खतरों को कम करने और खदान श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं। डीजीएमएस खदानों में सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए कानून,नियम,विनियम,मानक और दिशा-निर्देशों का विकास करता है। डीजीएमएस खदानों में सुरक्षा और स्वास्थ्य नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त उपाय करता है। डीजीएमएस खदानों में सुरक्षा और स्वास्थ्य संस्कृति को विकसित करने के लिए जागरूकता पहल करता है। डीजीएमएस खदानों में कार्यरत व्यक्तियों के लिए जोखिम और खतरा मुक्त कार्य की स्थिति सुनिश्चित करता है। डीजीएमएस सुरक्षा उपकरण,सामग्री और सुरक्षित कार्य पद्धतियों के विकास के लिए बातचीत करता है। डीजीएमएस खदानों में शोर और कंपन के विरुद्ध श्रमिकों की सुरक्षा करता है। डीजीएमएस उन व्यक्तियों के लिए ऑडियोमेट्री शुरू करता है जो खदानों में रोजगार चाहते हैं। खनन श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रशिक्षण प्रदान करता है। डीजीएमएस खदानों का निरीक्षण करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा है। डीजीएमएस खदानों में खतरे के स्रोत की पहचान और मूल्यांकन करता है ताकि संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सके। डीजीएमएस खदानों में सुरक्षा उपकरणों और उपकरणों का उपयोग करता है ताकि श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। डीजीएमएस खदानों में आपातकालीन प्रणालियों की स्थापना करता है ताकि आपातकाल की स्थिति में श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। डीजीएमएस के नियमों का पालन करना खदानों में सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। इन नियमों के पालन से, खदानों में होने वाले दुर्घटनाओं और बीमारियों को कम किया जा सकता है और खदान श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
निजी गाडि़यों का कमर्शियल उपयोग
वहीं दूसरी तरफ सैयद जाफर के द्वारा अपने ही चहते पैसे वाले लोगों से प्राइवेट वाहन एर्टिगा,पिकअप,स्कॉर्पियो जैसे निजी गाडि़यों को कमर्शियल उपयोग किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ शासन के परिवहन विभाग को गुमराह में काम इनके द्वारा किया जा रहा है।
एसआईजी गू्रप के मेस मिला रहा है दूषित भोजन
खास सुरक्षा विभाग के अधिकारी गए थे मौके जाकर गुणवत्ता की जांच के लिए पहुचे तो पता चला की उनके पास फूड लाइसेंस भी नहीं है इसके बावजूद भी चला रहे थे,खाद सुरक्षा विभाग का अधिकारी बुलाते हैं कि उनको नोटिस जारी किया गया लेकिन कोई जवाब देने के लिए भी नहीं आ रहे हैं वहीं अभी कुछ दिन पूर्व में खाद्य सुरक्षा विभाग ने एसआईजी ग्रुप के मेस में सामग्री की जांच के लिए कार्यवाही की थी जिसमें जाफर के द्वारा कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है अब देखने वाली बात है फूड विभाग क्या कार्यवाही करता है?
एसआईजी ग्रूप की वाहन से दुर्घटना का खतरा
स्थानीय नागरिकों का कहना है जिस सड़क से दनोली से शमोली के बीच स्कूल भी लगे हुवे हैं छोटे-छोटे बच्चे पढ़ाई करते हैं, वाहनों की आवाजाही से एसआईजी जाफर के द्वारा सुरक्षा हेतु कोई उपाय नहीं किया गया है जिसे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
आंदोलन की तैयारी
समस्यों को ले कर स्थानीय लोग एक बड़े आंदोलन का रूप रेखा की तैयारी में हैं,इस संदर्भ में स्थानीय युवक,जनप्रतिनिधि युवक कांग्रेस सोशल मीडिया उत्तर प्रदेश प्रभारी शांतनु सिंह एवं आशीष प्रताप सिंह ने बतलाया कि जिस प्रकार प्रकाश इंडस्ट्रीज भूमि अधिग्रहण के समय शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार को ले कर कंपनी द्वारा जो वादा किया था जिसमें क्षेत्र के लोगों के साथ किया था एक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा,बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा व्यवस्था ओर लोगों को रोजगार उपलध करना शामिल था,जिसमें कंपनी पूरी तरह से असफल नजर आ रही है शिक्षा एवं स्वस्थ को ले कर कुछ भी पहल नहीं किया गया है, वहीं हॉस्पिटल का बोर्ड लगा कर खाना पूर्ति कर दिया गया है,वहीं रोजगार को ले कर क्षेत्र में तकनीकी युवा होने के बावजूद बाहरी लोगों को महत्व दिया जा रहा है,कुछ लोगों को ले कर खाना पूर्ति कर दिया गया है जिससे असंतोष का माहौल है जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं किया गया तो जनता के साथ मिल कर आदमी एक वृहद आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
बिना ट्रेनिंग करा रहे कार्य
प्रकाश इंडस्ट्रीज के कोयला खदान में काम करने वाले मजदूरों को बिना किसी बीटीसी ट्रेनिंग कराए जा रहे कार्य में रख लिया गया है, मजदूरों को आदेश प्रति भी ज्वाइनिंग का नहीं दिया गया है,सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं कराया गया है,वहीं प्रकाश इंडस्ट्रीज के द्वारा ठेकेदार के द्वारा मेस का संचालन भी बिना किसी फूड लाइसेंस का संचालन किया जा रहा है, गुणवत्ता की मानकता भी कमी पाई गई।
लगभग 300 मजदूर वहां कर रहे 2 महीना से काम
प्रकाश इंडस्ट्रीज के निर्देशक के द्वारा महिलाओं को काम से वंचित कर एक तरफ छत्तीसगढ़ शासन एवं केंद्र शासन अपने समस्त कार्यों में महिलाओं की सहभागिता बनाए रखने की पहल करती है वहीं दूसरी तरफ महिलाओं को कार्यों से दरकिनार करते हुवे भेदभाव की नीति को अपनाए है।


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