जो संविधान कहेगा वही मानेंगे…कौन सा शब्द लिखा जाए यह बहस बेकार…
नई दिल्ली,17 जून 2024 (ए)। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग ने सोमवार 17 जून को कहा कि अपनी किताबों में हम भारत और इंडिया दोनों लिखेंगे। जो संविधान कहेगा, हम वही मानेंगे। कौन सा शब्द यानी (इंडिया या भारत) लिखा जाए, यह बहस बेकार है। किताबों में भारत और इंडिया शब्द इंटरचेंजिएबली तरीके (कभी भारत तो कभी इंडिया) से किया जाएगा।
एनसीआरटी का ये बयान इसलिए अहम है, क्योंकि कुछ महीनों पहले सोशल साइंस के सिलेबस पर काम कर रहे एक हाईलेवल पैनल ने इंडिया की जगह भारत लिखने का प्रस्ताव रखा था।
अब एनसीआरटी प्रमुख दिनेश प्रसाद सकलानी ने दिए इंटरव्यू में साफ किया कि किताबों में दोनों नामों का इस्तेमाल किया जाएगा। हमें दोनों शब्दों से किसी तरह की नापसंदगी नहीं है। हम ये नहीं करेंगे कि या तो इंडिया लिखें या भारत। हम अभी भी दोनों नाम लिख रहे हैं।
एनसीआरटी अपने सिलेबस में नई शिक्षा नीति के तहत बदलाव के लिए 19 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी के चेयरपर्सन सीआई आइजैक ने 25 अक्टूबर को बताया कि भारत का जिक्र विष्णु पुराण जैसे ग्रंथों में है, जो 7 हजार साल पुराने हैं। इंडिया नाम आमतौर पर ईस्ट इंडिया कंपनी और 1757 के प्लासी के युद्ध के बाद इस्तेमाल होना शुरू हुआ। ऐसे में देश के लिए भारत नाम का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
आईजैक ने एनसीआरटी के सिलेबस में क्लासिकल हिस्ट्री शामिल करने के पीछे तर्क दिया- अंग्रेजों ने भारतीय इतिहास को प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक में बांट दिया। प्राचीन इतिहास बताता है कि देश अंधेरे में था, उसमें वैज्ञानिक जागरूकता नहीं थी। हमारा सुझाव है कि बच्चों को मध्यकाल और आधुनिक इतिहास के साथ प्राचीन भारत के बजाय क्लासिकल हिस्ट्री भी पढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही सभी विषयों के सिलेबस में इंडियन नॉलेज सिस्टम शामिल किया जाना चाहिए।
तब एनसीआरटी ने कहा था कि पैनल के सुझावों पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।
जी-20 समिट में पहली बार इंडिया की जगह भारत नाम आया
9-10 सितंबर 2023 में दिल्ली के भारत मंडपम में जी-20 समिट हुई थी। इसमें भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से पहली बार भारत की राष्ट्रपति के लिए प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया की जगह प्रेसिडेंट ऑफ भारत लिखा था। समिट में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेमप्लेट पर इंडिया की बजाय भारत लिखा गया था।
एनसीआरटी संघ की शाखा की तरह काम कर रहा- जयराम रमेश
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि 2014 से एनसीआरटी संघ से जुड़े संस्थान की तरह काम कर रहा है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने नीट एग्जाम 2024 में ग्रेस मार्क्स के लिए एनसीआरटी पर आरोप लगाया है। एनसीआरटी लंबे समय से प्रोफेशनल संस्थान नहीं रह गया है।
रमेश ने ये भी कहा कि एनसीआरटी को मानना चाहिए कि वह नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग है, न कि नागपुर या नरेंद्र मोदी काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग।
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