राजनीतिक दलों द्वारा चुनावी घोषणा पत्र में वादे करना भ्रष्ट आचरण नहीं…
नई दिल्ली,28 मई 2024 (ए)। सुप्रीम कोर्ट ने एक मतदाता की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि चुनावी घोषणापत्र के वादे भ्रष्टाचार नहीं माने जा सकते। इस आधार पर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनावी घोषणापत्र के वादों को चुनाव के नियमों के अनुसार भ्रष्टाचार की श्रेणी में नहीं शामिल किया जा सकता है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और केवी विश्वनाथन की बेंच ने कर्नाटक के चमराजपेट लोकसभा क्षेत्र के एक मतदाता की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया। याचिका में कहा गया था कि 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जनता को आर्थिक लाभ पहुंचाने का वादा किया था और यह भ्रष्ट आचरण का हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट के बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी राजनीतिक दल के उम्मीदवार का अपने घोषणापत्र में जनता को बड़े स्तर पर आर्थिक लाभ पहुंचाने की बात करना भ्रष्ट आचरण का हिस्सा है। यह मामले को बहुत खींचने वाली बात है और स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में हमें विस्तार से जाकर चर्चा करनी होती है। इस वजह से याचिका खारिज की जाती है।
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