नई दिल्ली,07 मई 2024 (ए)। दिल्ली हाई कोर्ट ने उस व्यक्ति पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है जिसने भगवान हनुमान के मंदिर वाली एक निजी भूमि पर कजे के संबंध में एक याचिका में उन्हें भी सह-वादी बनाया है। याचिका किसी अन्य पक्ष को भूमि के ट्रांसफर के संबंध में उनकी आपçा याचिका को खारिज करने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ अपील के रूप में दायर की गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि चूंकि संपçा पर एक मंदिर है, इसलिए जमीन भगवान हनुमान की है और अपीलकर्ता अदालत के सामने उनके निकट मित्र और उपासक के रूप में उपस्थित है। इसे संपçा को कजाने के इरादे से सांठगांठ का मामला बताते हुए जस्टिस सी हरि शंकर ने अपील को खारिज कर दिया। उन्होंने फैसला सुनाया कि अपीलकर्ता व्यक्ति ने जमीन के मौजूदा कजाधारकों के साथ मिलीभगत की ताकि एक अन्य पक्ष को मुकदमे के बाद दोबारा कजा हासिल करने से रोका जा सके। अदालत ने 6 मई को पारित आदेश में कहा, प्रतिवादियों (मौजूदा कजाधारकों) ने वादी (अन्य पक्ष) की जमीन पर कजा कर लिया। वादी ने कजा पाने के लिए मुकदमा दायर किया था। प्रतिवादियों ने वादी से जगह खाली करने के लिए 11 लाख रुपये मांगे। उन शर्तों पर फैसला सुनाया गया। इसके बाद वादी ने वास्तव में 6 लाख रुपये का भुगतान किया लेकिन प्रतिवादियों ने फिर भी जमीन खाली नहीं की। अदालत ने कहा, वादी ने निष्पादन के लिए आवेदन किया। वर्तमान अपीलकर्ता, जो तीसरा पक्ष है, ने यह कहते हुए आपçा दर्ज की कि जमीन पर भगवान हनुमान का सार्वजनिक मंदिर है और इसलिए, वह भूमि भगवान हनुमान की है और वह भगवान हनुमान के निकट मित्र के रूप में उनके हित की रक्षा करने का हकदार है। अदालत ने कहा कि जनता के पास निजी मंदिर में पूजा करने का अधिकार होने की कोई अवधारणा नहीं है, जब तक कि मंदिर का मालिक ऐसा अधिकार उपलध नहीं कराता या समय बीतने के साथ निजी मंदिर सार्वजनिक मंदिर में तदील नहीं हो जाता।
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