राज्य सरकार को दिए बहाल करने के निर्देश
इलाहाबाद ,16 फरवरी 2024 (ए)। सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायपालिका के उस चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को सेवा में बहाल कर दिया है, जिसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल और तत्कालीन मुख्यमंत्री के साथ उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारियों के समक्ष सीधे अपनी समस्या रखने के कारण बर्खास्त कर दिया गया था। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, जब वित्तीय कठिनाई में होता है, सीधे वरिष्ठों के सामने अपनी बात रखता है, लेकिन यह अपने-आप में बड़े कदाचार की श्रेणी में नहीं आता है, जिसके लिए सेवा से बर्खास्तगी की सजा दी जानी चाहिए। यह मानते हुए कि जांच अधिकारी द्वारा दर्ज किए गए अपराध का निष्कर्ष विकृत है, पीठ ने अपीलकर्ता को सभी लाभों के साथ सेवा में बहाल करने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के आक्षेपित फैसले के साथ-साथ 30 अप्रैल 2007 के आदेश को रद्द कर दिया जिसके तहत अपीलकर्ता को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इससे पहले 2019 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपीलकर्ता की रिट याचिका को योग्यताहीन बताते हुए खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता -छत्रपाल-को बरेली जिला जजशिप में अर्दली, चतुर्थ श्रेणी के पद पर स्थायी आधार पर नियुक्त किया गया था। बाद में उसका तबादला कर दिया गया और बरेली की एक बाहरी अदालत के नजारत में प्रोसेस सर्वर के रूप में तैनात कर दिया गया।
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