नई दिल्ली,23 जनवरी 2024 (ए)। पीएम नरेन्द्र मोदी की तरफ से 23 जनवरी, 2024 को घोषित पीएम सूर्योदय योजना को सफल बनाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से बहुत ही बड़ा अभियान शुरु होगा। यह अभियान कुछ उसी तरह का होगा जैसे पूर्व में हर घर को बिजली कनेक्शन से जोड़ने के लिए सौभाग्य योजना की शुरुआत हुई थी। वजह यह है कि वर्ष 2014 में आवासीय घरों की छत पर सोलर पैनल लगा कर बिजली बनाने की जो योजना लांच की गई थी वह बहुत ही फिसड्डी साबित हुई है। इस योजना के तहत वर्ष 2022 तक देश में 40 हजार मेगावाट बिजली बनाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन सरकार के ही आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर, 2023 तक सिर्फ 11 हजार मेगावाट से कुछ ज्यादा बिजली बनाने की क्षमता लगाई गई है। इस गति को भांपते हुए निर्धारित वर्ष को बढ़ा कर 2026 तक दिया गया है।माना जा रहा है कि अब सूर्योदय योजना को सही तरीके से लागू करके ही उक्त लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा। इसलिए मौजूदा योजना में भी बड़े बदलाव करने जा रही है जिसको अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है। छतों पर सोलर पैनल लगाने की योजना जानकारों के मुताबिक छतों पर सोलर पैनल लगाने की योजना की 360 डिग्री समीक्षा की जा चुकी है और इसकी खामियों की पहचान हो चुकी है। सब्सिडी आवंटन को आसान बनाने की जरूरत महसूस की गई है और सब्सिडी की राशि भी बढ़ाई जाएगी ताकि ज्यादा लोग इसे लगाने को लेकर उत्साहित हो। अभी जो योजना है उसके मुताबिक छत पर सोलर पैनल लगा कर 3 किलोवाट तक बिजली बनाने के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद में 40 फीसद तक सब्सिडी दी जाती है जबकि तीन किलोवाट से 10 किलोवाट तक की बिजली उत्पादन के लिए 20 फीसदज अनुदान सरकार देती है। यह योजना स्थानीय बिजली वितरण कंपनियों द्वारा संचालित होती है। सोलर पैनल लगाने के बाद खत्म होगा बिजली संकट! भारत में अभी सोलर ऊर्जा से बिजली बनाने स्थापित क्षमता 73,300 मेगावाट है। इसमें छत पर सोलर पैनल लगा कर 11,080 मेगावाट बिजली बनाई जाने की क्षमता है। पिछले वर्ष काउंसिल फॉर इनर्जी, इंवायरमेंट एंड वाटर ने एक रिपोर्ट में कहा था कि भारत के सभी 25 करोड़ घरों के छत पर सोलर पैनल लगा दिए जाएं तो 6,37,00 हजार मेगावाट बिजली बनाई जा सकती है।
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