दिल्ली के आसपास के राज्यों को पराली जलाना बंद करने को कहा
नई दिल्ली,07 नवम्बर २०२३(ए)। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पराली जलाने और उससे दिल्ली में होने वाले प्रदूषण के मुद्दे पर पंजाब सरकार से कई अहम सवाल पूछे। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने पराली जलाने पर रोक लगाने के निर्देश देते हुए कहा कि इसका समाधान नहीं मिल पाने के कारण दिल्ली के निवासियों को परेशानी हो रही है। पिछले पांच साल से यही चल रहा है। इस मामले में तत्काल कार्रवाई और अदालत की निगरानी की आवश्यकता है।
पीठ ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा सहित दिल्ली-एनसीआर की सीमा से लगे राज्यों को पराली जलाने से रोकने और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने के लिए कई निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि मुख्य सचिव की निगरानी में पराली जलाने की जांच के लिए स्थानीय एसएचओ को जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए। कोर्ट ने संबंधित पक्षों की सुनवाई करते हुए कहा कि यह राजनीतिक लड़ाई नहीं हो सकती। अदालत ने यह भी पूछा कि पंजाब में धान क्यों उगाया जा रहा है, जबकि जलस्तर पहले से ही इतना नीचे है।
पीठ ने टिप्पणी की, आप क्या कर रहे हैं? अपने जल स्तर को देखें। आप पंजाब में धान की अनुमति क्यों दे रहे हैं? आप पंजाब को हरित भूमि से बिना फसल वाली भूमि में बदलना चाहते हैं। पंजाब की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल गुरमिंदर सिंह ने कई सुझाव देने के साथ ही कहा कि पंजाब में धान की फसल पर एमएसपी है। इससे सीमांत किसान फसल का विकल्प चुनते हैं। यदि एमएसपी खत्म होती है, तो वे खुद कम पानी वाली फसलों पर स्विच कर देंगे।
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