लद्दाख-डोकलाम के पास लगातार सड़कें, हेलीपैड बना रहा ड्रैगन
नई दिल्ली 21 अक्टूबर 2023 । मई 2020 में गलवन घाटी में भारत से हुई भिड़ंत के बाद चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर सैन्य तैनाती में कोई कटौती नहीं की है। निरंतर अपने सैनिकों की मौजूदगी बनाए रखी है। यही नहीं, सालभर में सैनिकों की तैनाती और बढ़ी है। उसने बुनियादी ढांचे का निर्माण भी बदस्तूर जारी रखा है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
एलएसी पर चीन की ओर से सैन्य बुनियादी ढांचों पर काम जारी
इसमें कहा गया है कि 2022 में चीन ने एलएसी के साथ सैन्य बुनियादी ढांचों का विकास जारी रखा है। इनमें डोकलाम के पास अंडरग्राउड भंडारण सुविधाएं, लद्दाख समेत एलएसी के सभी तीन सेक्टरों में नई सड़कें, पड़ोसी भूटान में विवादित क्षेत्रों में नए गांव, पैंगोंग झील पर दूसरा पुल, केंद्रीय क्षेत्र के पास एक दोहरे इस्तेमाल वाला हवाई अड्डा और कई हेलीपैड आदि शामिल हैं।
चीन ने 2022 में एलएसी के पश्चिमी क्षेत्र में रिजर्व में चार संयुक्त हथियार ब्रिगेड (सीएबी) के साथ झिंजियांग और तिब्बत सैन्य जिलों के दो डिवीजनों के सहयोग से एक सीमा रेजिमेंट तैनात की है।
एलएसी पर चीनी सैनिकों की अधिक तैनाती
चीन ने अन्य थिएटर कमांड से पूर्वी क्षेत्र में तीन हल्के से मध्यम सीएबी और एलएसी के मध्य क्षेत्र में अतिरिक्त तीन सीएबी भी तैनात किए हैं। पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि हल्के सीएबी का हिस्सा वापस चला गया है लेकिन तैनात बलों का अधिकांश हिस्सा एलएसी पर बना हुआ है।
मई 2020 से अब तक चीनी और भारतीय सेनाओं के बीच एलएसी के पास कई स्थानों पर पत्थरों, लाठियों और कंटीले तार लगे डंडों के साथ झड़पें हुई हैं। गतिरोध के कारण विवादित सीमा के दोनों ओर सेनाओं का जमावड़ा लगा।
चीन ने अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाई
पेंटागन ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया है कि चीन ने पिछले एक साल में परमाणु हथियारों की संख्या भी बढ़ाई है। उसके पास अब 500 परमाणु हथियार हैं। पेंटागन के मुताबिक, चीन का लक्ष्य 2030 तक एक हजार परमाणु हथियार बनाने का है।
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