शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी राकेश गौतम,राजनीति में सक्रिय व समाजसेवी आशीष त्रिपाठी,नपा के पार्षद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष एवं मुस्लिम पक्ष के सदर सलीम,मो. इजराइल और अन्य सभी लोगों ने दोनो पक्षों को एक मंच पर लाकर आखिरकार समझौता कराकर शहर की अमन शांति और खुशहाली बनी रहे इसके लिए सभी ने भरपूर प्रयास किया। जिसका परिणाम ये रहा कि 26 एवं 27 अगस्त 2020 के दरम्यान अनूपपुर शहर में हुए हिंदू-मुस्लिम दंगे में लगभग 3 साल बाद 22 अगस्त 2023 को न्यायालय अनूपपुर में समझौता हुआ और कोर्ट ने दोनो पक्षों को दोषमुक्त कर दिया।
अरविन्द द्विवेदी
अनूपपुर,29 अगस्त 2023 (घटती घटना) उक्त घटना आज से लगभग तीन वर्ष पूर्व की है जब अनूपपुर निवासी पुष्पक ने फेसबुक पर धर्म के खिलाफ एक पोस्ट शेयर किया था। जिसके बाद शहर के लगभग 20 मुस्लिम लड़के टीआई नरेंद्र पॉल और अकबर खान की शह पाकर पुष्पक को बीच बाजार में मारते-पीटते थाना लेकर गए थे। वहीं उक्त घटना का आधे मिनट का वीडियो एक लडके के द्वारा बनाया गया, वीडियो के वायरल होते ही अक्रोशित हिंदू युवक थाने पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। मामला घंटे भर में सोशल मीडिया पर इतना ज्यादा वायरल हो गया कि मुख्यमंत्री, गृहमंत्री के द्वारा प्रशासन को कार्यवाही के निर्देश दिए गए। परंतु पुलिस ने कार्यवाही छोड़ हिंदू प्रदर्शनकारी शिभू पटेल और कई अन्य को सड़क में आधीरात में दौड़ा-दौड़ा कर मारा, जिसके विरोध में अगले दिन जिले की आमजनता और व्यापारी संघ ने बंद का आहवान कर उग्र प्रदर्शन और नारेबाजी की।
टीआई के खिलाफ ज्ञापन देने पर पीयूष, ज्ञानेंद्र,गंगा व अन्य बने आरोपी
थाना प्रभारी नरेंद्र पॉल की बर्बरता के खिलाफ 27 अगस्त 2020 को ही सर्किट हाउस अनूपपुर में तत्कालीन मंत्री बिसाहुलाल सिंह के समक्ष टीआई को बर्खास्त करने और संलिप्त पुलिसवालों के खिलाफ कार्यवाही करने हेतु पीयूष पटेल, ज्ञानेंद्र राठौर, गंगाराम, नरेश गुप्ता, राहुल अग्रहरि, गौरव और जिले के हजारों युवकों ने नारेबाजी के साथ धरना प्रदर्शन किया और ज्ञापन दिया था। जिसके फलतः टीआई ने सभी के खिलाफ दंगा में दोहरे मुकदमे दर्ज किए। पीयूष, ज्ञानेंद्र और गंगाराम के खिलाफ 26 अगस्त से 5 सितंबर 2020 के बीच मात्र 10 दिन में 3 एफआईआर और 9 माह के भीतर 4 (363/20, 364/20,376/20, 252/23 एफआईआर दर्ज किए गए थे।
तीन की गिरफ्तारी, 08 अन्य युवकों को भी बनाया गया आरोपी
दंगा प्रकरण के सभी मामले अज्ञात के खिलाफ दर्ज किए गए, परंतु शहर के लगभग 70 युवकों को नामजद कर उन्हें लैकमेल किया गया और उनसे मोटी रकम वसूली गई। 2020 अनूपपुर विधान सभा उपचुनाव के एक सप्ताह पूर्व पीयूष, ज्ञानेंद्र, गंगाराम की गिरफ्तारी की गई। स्थानीय नेताओं के विरोध के बाद पुलिस के द्वारा कहा गया कि दंगे के प्रकरण में अब और किसी का नाम नहीं जोड़ा जाएगा। परन्तु चुनाव संपन्न होते ही 8 अन्य युवकों को आरोपी बनाया गया जिसमे दीपक पटेल, नरेश गुप्ता, राहुल अग्रहरि, गौरव केवलानी, राहुल रजक, रवि गुप्ता, शानू गुप्ता, मनोज राठौर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया जहां से सबको जमानत पर रिहा किया गया।
न्याय की लगाई गुहार,नेताओं और मंत्रियों से मिला महज आश्वासन
अपने खिलाफ प्रदर्शन और धरना का बदला लेने के लिए पुलिस ने युवकों पर सिर्फ मुकदमे दर्ज नही किए सारी सीमाएं लांघते हुए युवकों पर कई प्रतिबंधात्मक कार्यवाही और जिलाबदर तक की कार्यवाही कर दी गई। प्रकरण में कई ऐसे युवकों का भी नाम साजिशन दर्ज किया गया जो उस दिन उस विरोध प्रदर्शन में शामिल ही नही थे। वहीं न्याय के लिए युवकों ने कई नेताओं और मंत्रियों के दरवाजों में दस्तक दी, न्याय की गुहार लगाई पर आश्वाशन के अलावा और कुछ न मिल सका। वहीं एक सप्ताह पूर्व ही माननीय हाईकोर्ट ने शासन बनाम पीयूष पटेल में एक जबरदस्त फैसला देते हुए न केवल पुलिस और कलेक्टर अनूपपुर के फैसले को सरासर गलत बताया बल्कि राज्य के ऊपर दस हजार का जुर्माना भी लगाया।
आशीष त्रिपाठी एवं राकेश गौतम ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
न्यायालय से दोषमुक्त का आदेश आते ही ज्ञानेंद्र,नरेश,राहुल,गंगाराम एवम सभी युवकों ने आशीष त्रिपाठी और राकेश गौतम जी का मुंह मीठा कराकर आभार व्यक्त किया। वैसे तो सभी आरोपी हिंदूवादी पार्टी और संगठनों के कार्यकर्ता रहे हैं। लेकिन तीन वर्ष से दरबदर के ठोकरे खाने एवं थाना और न्यायालय के चक्कर लगाने के बाद सवाल यह उठता है कि आखिर आने वाले विधानसभा चुनाव में आखिर ये युवक किस पार्टी के साथ जायेंगे.? क्योंकि सभी दोषमुक्त आरोपी शहर और जिले के चर्चित और लोकप्रिय युवक हैं, साथ ही सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय और अच्छी पकड़ रखते हैं इसलिए निश्चित ही इनका निर्णय चुनाव के परिणाम को बदल सकता है।
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