अंबिकापुर,17 अप्रैल 2023 (घटती-घटना)। कहा जाता है कि जीते जी रक्तदान और मरणोपरांत नेत्रदान सच्ची मानव सेवा है, लेकिन जब वक्त आता है तो अधिकतर लोग इस मानव सेवा को भूल जाते हैं। पर अंबिकापुर के रहनेवाले मनोज भारती ने आपने पिता रामपति राम 76 वर्षी के निधन के बाद अपने परिवार की सहमति से आपने पिता का नेत्रदान कराया। इस परिवार की नेकदिली से दो दिव्यांगों को नई रोशनी मिलेगी। परिवार ने रामपति राम की मृत्यु के 6 घंटे के भीतर ही अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज नेत्र विभाग से संपर्क किया और तत्काल नेत्र विभाग की टीम नोडल नेत्र विभाग डॉक्टर रजत टोप्पो, डॉक्टर अभिषेक जैन, डॉक्टर दीपा बुधवानी, डॉक्टर डोमन साहू, रमेश घृतकेर पहुंचकर नेत्रदान की प्रक्रिया को संभव बनाया।
आपको बता दें कि भारत में लगभग प्रतिवर्ष डेढ़ लाख कॉर्निया की आवश्यकता होती है, लेकिन प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार कॉर्निया दान ही होता है। इसी मुहिम में छाीसगढ़ ऑर्गन डोनेशन एलिट (कोड) विगत 1 वर्षों से ‘रक्तदान महादान – अंगदान जीवनदान’ नाम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सभी के बीच रक्तदान, नेत्रदान, अंगदान वा देहदान के प्रति लोगों को जागरू करना है। इस अभियान के तहत अब तक सरगुजा में 100 लोगों ने नेत्रदान संकल्प पत्र भरा है। नोडल नेत्र विभाग डॉ. रजत टोप्पो ने बताया कि सरगुजा में अब तक 5 नेत्रदान हुआ है।
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