संगठन और चुनाव प्रभारियों का अति आत्मविश्वास ले डूबा
बैकुण्ठपुर 1 जनवरी 2022 (घटती-घटना)। बैकुंठपुर नगरपालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस पूर्ण बहुमत के बावजूद अध्यक्ष पद से हांथ धो बैठी और भाजपा को अपना अध्यक्ष बनाने का का मौका मिल गया इस पूरे मामले में कांग्रेस जिला संगठन और चुनाव प्रभारियों की रणनीतिक चूक इसकी वजह बनी जैसा कि पूरे चुनाव परिणाम और कांग्रेसी पार्षदों के खुलकर विरोध करने सामने आने से साबित भी हो गया कि कांग्रेस संगठन और चुनाव प्रभारियों का अति आत्मविश्वास बैकुंठपुर में कांग्रेस की लुटिया डूबा गया और वही मात्र कारण रहा कि कांग्रेस बहुमत से भी ज्यादा मत होने के बावजूद अपना अध्यक्ष नहीं बना पाई।
फुट पड़े पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष,धर्मपत्नी की हुई हार
बैकुंठपुर नगरपालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में बैकुंठपुर से पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष अशोक जायसवाल की धर्मपत्नी को उम्मीदवार बनाया गया और उन्हें उम्मीदवार बनाने की घोषणा होते ही दो कांग्रेस के ही पार्षदों ने सामने से ही विरोध दर्ज कर दिया और वह अंत तक विरोध पर कायम रहे और उन्होंने खुलेआम ऐलान करते हुए कांग्रेस के घोसित उम्मीदवार के विरुद्ध मतदान किया जिसका परिणाम हुआ कि चुनावी çफ़ल्म से बाहर बैठी भाजपा बराबरी पर आ गई और किस्मत ने भाजपा का साथ दिया और लाटरी में अध्यक्ष भाजपा बना ले गई। पूरे घटनाक्रम से पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष भावुक हो गए और फुट पड़े उनके आंखों से आंसू निकल पड़े जैसा प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया भी। अशोक जायसवाल का फुटकर रोना साबित कर गया कि गलतियों की वजह से कांग्रेस की यह हार तय हुई।
अशोक जायसवाल को मिलती कमान,परिणाम कांग्रेस के पक्ष में होते
बैकुंठपुर नगरपालिका में अध्यक्ष पद के चुनाव की कमान यदि प्रत्यासी बतौर पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष जिनकी धर्मपत्नी को उम्मीदवार बनाया गया था को मिला होता तो परिणाम कांग्रेस के पक्ष में होते यह अब कांग्रेस के अंदर से आवाज आ रही है। अशोक जायसवाल खुद पार्षदों से बात करते अपने पक्ष में उन्हें करने का प्रयास करते तो शायद पार्षद उनकी बातों से उनके आश्वासनों से आश्वास्त होते यह भी अब आंकलन किया जा रहा है। अशोक जायसवाल पूर्व में नगरपालिका की कमान सम्हाल चुके थे और उनके सामने आकर प्रयास करने से कांग्रेस का अध्यक्ष बन सकता था यह भी लोगों का कहना है।
अंतिम समय मे अध्यक्ष के नाम की घोषणा भी बनी हार की वजह
कांग्रेस के अंदर अब यह भी बातें चल रहीं हैं कि 8 दिनों तक पूरे पार्षदों को अज्ञातवाश में रखने के बाद भी घरों से दूर रखने के बाद भी आखिर क्या ऐसी वजह बनी की अंतिम समय अंतिम दिन वह भी बिल्कुल मतदान के समय अध्यक्ष के नाम को कांग्रेस ने तय किया, आखिर 8 दिनों तक पार्षदों को कहां रखा गया और क्या उनके बीच सामंजस्य बनाया गया कि आखिरी समय मे कांग्रेस में अंतर्कलह खुलकर सामने आ गया और कांग्रेस जिला मुख्यालय में अध्यक्ष पद से हांथ धो बैठी। कांग्रेस के अंदर यह भी चर्चा जारी है कि यदि अध्यक्ष उम्मीदवार का नाम पहले ही सामने रखते हुए सामंजस्य बनाने का प्रयास किया गया होता तो विरोध पहले सामने आ जाता और विरोध को शांत भी किया जा सकता।
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