कोरोना के दूसरे लहर के बीच ६६४ मोतियाबिंद ऑपरेशन कर प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा सरगुजा

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नेत्र विभाग के चिकित्सक व स्टाफ नर्स के बदौलत मिली सफलता,लगातार तीन वर्षों से तीसरे नंबर पर था सरगुजा


अम्बिकापुर १९ जुलाई २०२१ (घटती-घटना)। कोरोना की दूसरी लहर में लॉकडाउन की वजह से जब लोग घरो से बाहर निकलने में भी कतरा रहे थे, इस दौरान प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में लोों की आंखों की रौशनी लौटाने का काम तेजी से चल रहा था। अकेले अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ६६४ मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन कर उनके जीवन को फिर से रौशन किया। कुछ को बिल्कुल भी नजर नहीं आ रहा था लेकिन ऑपरेशन के बाद अब वे साफ व अच्छी तरह से देख सकते हैं। मोतियाबिंद ऑपरेशन में प्रदेश में सरगुजा जिला दूसरे स्थान पर रहा है। खास बात यह है कि ये सभी ऑपरेशन निःशुल्क हुए और मरीजों को सरकार की तरफ से सारी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गईं। आंकड़ों के लिहाज से प्रदेश में पहला जगदलपुर चिकित्सा महाविद्यालय ९५९, दूसरे स्थान पर सरगुजा मेडिकल कॉलेज 6६४ ऑपरेशन हुए हैं। वहीं तीसरे स्थान पर धमतरी जिला अस्पताल 426 है। इसी तरह चौथे स्थान पर कोरिया 392 तो पांचवें स्थान पर सूरजपुर जिला अस्पताल 390 है। जबकि छठे स्थान पर राजनांदगांव चिकित्सा महाविद्यालय में ३५७ लोगों का ऑपरेशन किया गया है। फलस्वरूप जिला सरगुजा में राष्ट्रीय अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा एवं महाविद्यालय नेत्र विभाग के चिकित्सकों एवं नोडल अधिकारी डॉ. रजत टोप्पो के प्रयास से विगत ३ वर्षों से अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल तीसरे स्थान पर था। नोडल अधिकारी डॉ. रजत टोप्पो ने बताया कि कोविड काल होने के बावजूद २०२०-२१ में प्रदेश स्तर पर जिला सरगुजा द्वितीय स्थान पर रहते हुए ६६४ मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन कर लोगों को रोशनी दी है। कोविड कॉल के बावजूद मोतियाबिंद का काम रूक नहीं है। और इस कार्य में लगे रहे नेत्र चिकित्सकों वं नेत्र सहायक अधिकारी एवं नर्सिंग स्टाफ का अहम रोल रहा है। नेत्र चिकित्सक डॉ. रजत टोप्पो नोडल एवं नेत्र सर्जन डॉ. संतोष एक्का, डॉ. प्रियंका गुप्ता नेत्र सहायक चिकित्सक अधिकारी एसके वर्मा, रमेश घृतकर, मो. शाहिद हुसैन एवं फिल्ड के नेत्र सहायक अधिकारी जिन्होंने अपने कार्य के साथ-साथ कोविड-१९ में भी कार्य किया है।


निजी अस्पताल में
१५-३० हजार रुपए खर्च

नेत्र विभाग के चिकित्सकों एवं नोडल अधिकारी डॉ. रजत टोप्पो ने बताया कि अगर मोतियाबिंद का ऑपरेशन निजी अस्पताल में करवाया जाता है, तो लगभग 15 से 30 हजार रुपए का खर्च मरीज को पड़ता है। निजी अस्पताल अलग-अलग लेंस का उपयोग करते हैं। ऐसे में मरीजों से इस ऑपरेशन के लेंस के हिसाब से 15 से 30 हजार का खर्च होता है।
कई चिकित्सक हो
चुके हैं कोरोना संक्रमित

नोडल अधिकारी डॉ. रजत टोप्पो ने बताया कि अप्रैल व मई का महीने कोरोना पीक पर था। सरगुजा में भी केसें ज्यादा मिल रहे थे। काम करने के दौरान मैं स्वयं संक्रमित हो गई थी। इसी तरह नेत्र विभाग के लगभग हर डॉक्टर व स्टाफ कोरोना संक्रमित हो गए थे। इसके बावजूद भी लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और स्वस्थ्य होकर अपने कामों को बखुबी निभाया और आज प्रदेश में मोतियाबिंद ऑपरेशन में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।


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