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नई दिल्ली,@पुलिस की मीडिया ब्रीफिंग पर मैनुअल होगा तैयार

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को दिया निर्देश


नई दिल्ली,13 सितम्बर 2023 (ए)।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पुलिस अधिकारियों द्वारा दी जाने वाली मीडिया ब्रीफिंग पर एक व्यापक मैनुअल तैयार करने का निर्देश दिया है। इसमें कहा गया कि जांच एजेंसियों द्वारा जारी किए गए प्रेस नोट आरोपियों पर अपराध को प्रभावित करने वाली व्यक्तिपरक राय पर आधारित नहीं होने चाहिए।


समस्त डीजीपी देंगे अपना सुझाव


सीजेआई डीवाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा और मनोज मिश्रा की पीठ ने यह आदेश दिया, हम निर्देश देते हैं कि सभी पुलिस महानिदेशक एक महीने के भीतर उचित दिशानिर्देश तैयार करने के लिए अपने सुझाव देंगे। इसके बाद, गृह मंत्रालय दिशानिर्देश तैयार करने के लिए आगे बढ़ेगा।


आरोपी को फंसाने वाली रिपोर्ट अनुचित


पीठ ने कहा कि किसी आरोपी को फंसाने वाली मीडिया रिपोर्टें अनुचित है क्योंकि वे सार्वजनिक संदेह को जन्म देती हैं कि उस व्यक्ति ने केवल जांच के चरण में ही अपराध किया है, जब हर आरोपी निर्दोष होने का अनुमान लगाने का हकदार है। शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि दिशानिर्देश जनवरी 2024 के मध्य तक उसके समक्ष रखे जाएंगे।


जांच पर असर डालता है खुलासा


वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायणन ने सीबीआई सहित अन्य न्यायालयों में पुलिस द्वारा अपनाई जाने वाली मीडिया संबंधी प्रथाओं का मिलान करने के बाद मसौदा दिशानिर्देशों के रूप में अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पुलिस द्वारा मीडिया में किया गया कोई भी खुलासा न सिर्फ अपराध बल्कि जांच पर भी असर डालता है। इससे पहले 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए मीडिया ब्रीफिंग पर पुलिस दिशा-निर्देशों का एक नया ज्ञापन तैयार करने का आदेश दिया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मुकदमे के दौरान उनके बचाव में पूर्वाग्रह न हो।


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