अंबिकापुर,18 मई 2023 (घटती-घटना)। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एजेंट सक्रिय हैं। बेहतर इलाज करवाने का झांसा देकर गंभीर मरीज कों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। इतना ही नहीं मरीज के परिजनों से इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूलने के बाद जब मरीज की स्थिति में सुधार नहीं होता है तो उसे पुनः मेडिकल कॉलेज अस्पताल जाने के लिए बोल दिया जाता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। सरजपुर जिले के जोरबंजा निवासी विजेन्द्र विश्वकर्मा सडक¸ दुर्घटना में घायल हो गया था। उसे सिर में गंभीर चोट लगी थी। परिजन उसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में भर्ती कराया। यहां चिकित्सकों ने इलाज शुरू किया पर सिर में गंभीर चोट लगने के कारण न्यूरोलॉजिस्ट की जरूरत थी। पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण चिकित्सकों ने बेतहर इलाज के लिए रायपुर रेफर कर दिया। परिजन उसे रायपुर ले जाने की तैयारी में थे। इसी बीच इसके पीछे शहर के निजी अस्पताल के एक एजेंट पीछे लग गया और रायपुर से बेहतर अंबिकापुर में निजी अस्पताल में इलाज कराने का झांसा देकर अस्पताल ले कर चला गया। यहां भी चिकित्सकों ने रुपए के लालच में आकर गंभीर मरीज का इलाज शुरू कर दिया। जबकि उक्त अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट नहीं थे। यहां उसका पांच दिनों तक इलाज चला। इस बीच उसे 55 हजार रुपए वसूली की गई। 55 हजार का इलाज होने के बाद भी मरीज की स्थिति में कोई सुधार नहीं होने निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने पुन: मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया। इधर परेशान परिजन गंभीर मरीज को लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। इसके बाद पुन: उसे रायपुर ले जाया गया।
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