अम्बिकापुर,25 फरवरी 2023 (घटती-घटना)। प्रदेश सरकार को उसके घोषणा पत्र में किये वादों को पूरा करवाने भारतीय किसान संघ पुनः सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहा है,प्रदेश के सभी जिलों में संगठन के कार्यकर्ता गाँव गाँव जाकर किसानों से संपर्क कर पत्रक बांटकर बैठके ले रहे हैं । भारतीय किसान संघ किसानों की मांगों को लेकर 27 फरवरी को धरना स्थल, बुढ़ा तालाब में आंदोलन करेगा। भारतीय किसान संघ ने बजट सत्र को ध्यान में रखकर प्रदेश के सभी सांसद, विधायकों को ज्ञापन भी सौंपा है। वर्तमान प्रदेश सरकार को छाीसगढ़ में शासन करते हुए चार वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। परंतु इस सरकार ने अपने घोषणा पत्र में जो घोषणाएं की थी वह अभी तक आधी अधूरी है। जैसे भाजपा शासन काल का दो वर्ष का बोनस, ओनहारी फसलों को उचित मूल्य पर लेने की बात, सिंचाई परियोजनाएं, किसानों का पूरा धान खरीदना आदि विषयों पर सरकार ने चुप्पी साध? रखी है।
सरकार अपनी ही पीठ थपथपा रही है और छाीसगढ़ को धानवान छाीसगढ़ बता रही हैं परंतु क्या सही मायनों में छाीसगढ़ का किसान आत्मनिर्भर हुआ है ? चार वर्षों में 640 किसानों ने आत्महत्या किया है अगर अनुपात निकाले तो प्रतिदिन 3 किसान आत्महत्या कर रहा है , सरकार ने अपने चार वर्षों के कार्यकाल में दो वर्ष के बोनस जैसे विषयों को लेकर किसी भी प्रकार कोई चर्चा तक नहीं की है। इन बातों से सरकार की मंशा पर प्रश्न उठ रहे हैं। सरकार द्वारा शराबबंदी नहीं होने से किसान परिवार ही अधिक भुगत रहा है। गांव का युवा नशे की लत में डूबा हुआ है। गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक रही है। गांव गांव में एक नई संस्कृति जन्म ले रही वह दारु संस्कृति है। गौठान गौवंश के लिए बनाए गए हैं परंतु सही क्रियान्वयन नहीं होने से सभी गौवंश सड़कों पर खुले घूम रहे हैं, फसलों को बचाना किसानों को कठिन हो गया है। बंदरों, जंगली सुअरों की समस्या बढ़ती जा रही है। राजस्व विभाग का भ्रष्टाचार चरम पर है बगैर पैसों के राजस्व के कोई कार्य नहीं हो रहे हैं। किसान परेशान है और प्रशासन में बैठे अधिकारियों की मौज है।
सरकार की ओर से कहा गया की हमने गंगाजल की सौगंध मात्र कर्जमाफी के लिए खाई थी। तो क्या किसान यह माने जो वादे गंगाजल को उठाकर किये जायेंगे वहीं वादे पूरे किए जायेंगे तथा जो वादे गंगाजल को हाथ में लेकर नहीं किये गए हैं वे कभी पूरे नहीं किए जायेंगे। भविष्य में होने वाले चुनावों में सभी दल गंगाजल की सौगंध खाकर घोषणापत्र पढ़ेंगे तो ही प्रदेश के किसान दलों के घोषणापत्रों पर विश्वास करेंगे। यदि वास्तविकता में यह किसानों की सरकार है तो सरकार 1 मार्च को पेश होने वाले बजट में किसानों से संबंधित सभी विषयों को ले एवं अपने वादों एवं किसानों की मांगों को पूरा करे।
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