छाीसगढ़ राज्य के पिछड़ा कहे जाने वाले सरगुजा आदिवासी क्षेत्र की महिलाएं हो रही सशक्त
अंबिकापुर, 08 जनवरी 2023 (घटती-घटना)। छाीसगढ़ राज्य के पिछड़ा कहे जाने वाले सरगुजा आदिवासी क्षेत्र की महिलाएं रोजगार व व्यापार से जुड़ कर सशक्त हो रहीं हैं। जो महिलाएं दूसरे के खेतों व घरों में मजदूरी का काम करतीं थी वह आज समूह से जुड़ कर सजी की खेती कर बड़े पैमाने पर व्यापार कर रहीं हैं। समूह से जुड़ कर प्रति महिलाएं 4 से 5 हजार रुपए कमा रहीं हैं और घर परिवार को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं।
गौरतलब है कि सरगुजा में सजी उत्पादन काफी तेजी से बढ़ रहा है। यहां के किसान सजी उत्पादन कर बड़े पैमाने पर व्यापार कर रही हैं। वहीं इस क्षेत्र में महिलाएं भी अब आगे बढ़ रहीं हैं। जो महिलाएं पूर्व में दूसरे के खेतों या घरों में मजदूरी का काम करतीं थीं आज व सजी उत्पादन कार्य में लगे हुए हैं। मजदूरी करने से घर परिवार चलाने में परेशानी होने के कारण महिलाएं समूह से जुड़ कर खुद की जमीन या किराए पर जमीन खरीद कर विभिन्न तरह की सजी उत्पादन करतीं हैं। इस कार्य में महिलाएं दिन रात मेहतन कर सजी का उत्पादन कर बड़े पैमाने पर कारोबार कर रही हैं। इस लिए सरगुजा में सजी का उत्पाद ज्यादा हो रहा है और यहां की सजी दूसरे प्रदेशों में भी निरयात हो रहा है। बात करें तो लुण्ड्र क्षेत्र में 40 महिला स्व सहायता समूह काम कर रहा है। प्रत्यक समूह में महिलाओं की संख्या दस है।
सजी उत्पादन कर बैंक का ऋण समय पर किया वापस
सजी उत्पादन कर रहीं महिलएं बतातीं हैं कि हम सभी सदस्य की आर्थिक स्थिति में बहुत सुधार हुआ है। आज हम सबभी महिला सदस्य सजी उत्पादन कर महीने का लगभग 4 से 6 हजार रुपए आर्थिक लाभ कमा रहीं हैं। घर की भी माली हालत में सुधार हो रही है। बैंक से लिए गए कर्ज भी सजी उत्पादन कर समय पर चुका दिए हैं।
महिलाएं पूरे साल कर रही सजी का उत्पादन
महिलाएं पूरे साल सजी का उत्पादन करतीं हैं। आलू, मिर्च, भिंडी, मेथी एवं सरसो भाती, करेला, डोड़का, टमाटर, अदरक सहित अन्य सजी मौसम के अनुसार करतीं रहती हैं। इससे पूरे साल सजी का उत्पादन होते रहता है और अच्छा व्यापार होता है। महिला समूहों के संपर्क में दूसरे प्रदेश के भी सजी व्यापारी रहते हैं और इनका सजी बाहर ले जाते हैं।
प्रोड्यूसर गु्रप के माध्यम से करतीं हैं सजी निर्यात
महिलाओं से औने-पौने दामों पर सजी खरीदने के लिए कोचियों का एजेंट सक्रिय रहता है। इस स्थिति में स्थानीय स्तार पर इनका एक प्रोड्यूसर ग्रुप बनाया गया है। सभी समूह की महिलाए अपने-अपने खेतों से सजी तोड़कर एक जगह जमा कर प्रोड्यूसर गु्रप को दे देतीं हैं। जो बाजारों में जाकर उचित दामों पर सजी बेचा जाता है। इससे महिलाओं को नुकसान नहीं होता है।
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