अंबिकापुर, 06 दिसम्बर 2022 (घटती-घटना)। एटीएम कार्ड जाम कर आरक्षक के खाते से 50 हजार रुपए निकालने के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को झारखंड के पलामू से गिरफ्तार कया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर जेल दाखिल कर दिया है।
इस मामले का खुलासा करते हुए एसपी भावना गुप्ता ने बताया कि प्रार्थी अमित कुजूर जो कि आरक्षक के पद पर पदस्थ है। वह 30 नवंबर की सुबह प्रतिक्षा बस स्टैंड के पास एचडीएफसी बैंक के एटीएम में रुपए निकालने गया था। प्रोसेस के दौरान इसका एटीएम कार्ड मशीन में फंस गया था। इस दौरान मदद करने के नाम पर दो युवकों ने धोखाधड़ी कर इसके खाते से 50 हजार रुपए निकाली कर लिए थे। अमित कुजूर ने मामले की रिपोर्ट मणिपुर चौकी में दर्ज कराया था। पुलिस अज्ञात के खिलाफ अपराध दर्ज कर मामले की जांच कर रही थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला, नगर पुलिस अधीक्षक स्मृतिक राजनाला, एसडीओपी अखिलेश कौशिक के नेतृत्व में चौकी प्रभारी मणिपुर उपनिरीक्षक सरफराज फिरदौशी एवं पुलिस टीम विवेचना की जा रही थी। घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी फुटेज व घटना में प्रयुक्त कार के संबंध में जानकारी प्राप्त कर साइबर तकनीकी से विशेष टीम आरोपियों की धरपकड़ के लिए झारखंड के पलामू रवाना हुई थी। पुलिस टीम के सतत प्रयास से आरोपी अहमद रजा एवं खालिद अंसारी निवासी चैनपुर जिला पलामु झारखंड को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो ये अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर इनके कजे से 36 हजार रुपए नकद, 7 एटीएम कार्ड व घटना में प्रयुक्त कार को जत किया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर जेल दाखिल कर दिया है। कार्रवाई में सहायक उप निरीक्षक विवेक पाण्डेय, प्रधान आरक्षक सुधीर कुसह, इम्तियाज अली, बृजेश राय, सत्येन्द्र दुबे, वीरेंद्र पैकरा शामिल रहे।
इस तरह करते थे ठगी
एसपी ने बताया कि आरोपियों द्वारा घूम-घूम कर लोगों का एटीएम कार्ड जाम कर धोखधड़ी करते हैं। आरोपी पहले से एटीएम मशीन में फेवीक्यूक या अन्य पदार्थों चिपका कर छोड़ देते थे। जैसे ही लोग उक्त एटीएम में पैसा निकालने जाते थे उनका एटीएम कार्ड मशीन में फंस जाता था। इस दौरान मदद के नाम पर पहुंचते थे और टॉल फ्री नंबर पर बात करने के लिए पीडि़त को बोलते थे। टॉल फ्री नंबर भी ये खुद ही देते थे जो इनके ही गिरह का रहता था। टॉल फ्री नंबर पर बात करने के दौरान पीन कोर्ड पूछा जाता था। इस दौरान ये आरोपी पीन कोर्ड देख लेते थे। इसके बाद भी जब कार्ड मशीन से नहीं निकलता था तो पीडि़त वापस चला जाता था। इसके बाद आरोपी पलास या किसी चीज से कार्ड को खिंच कर निकाल लेते थे और पुन: उसी कार्ड से पैसा निकाल कर लोगों को धोखड़ी करते थे।
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