रायपुर,05 नवम्बर 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और मैनपावर घोटाले में आबकारी विभाग के पूर्व एमडी रहे अरुणपति त्रिपाठी को राहत मिली है। दोनों को बिलासपुर हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। बता दें कि रामगोपाल अग्रवाल को शराब घोटाला मामला में जमानत मिली है। कोल और चावल घोटाले में अभी उन्हें जेल में ही रहना पड़ेगा। वहीं मैनपावर घोटाला मामले में अरुणपति त्रिपाठी रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। 95 दिन बाद उन्हें जमानत मिली है। इस मामले में वकील शशांक मिश्रा ने पैरवी की है। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा खुलासा किया था। एजेंसी के मुताबिक, शराब सिंडिकेट से जुटाए गए करीब 860 से 880 करोड़ रुपए रायपुर के शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन पहुंचाए गए थे। ईडी का दावा था कि रामगोपाल अग्रवाल की निगरानी में यह पैसा कांग्रेस कार्यालय पहुंचाया गया। इस मामले में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है। इन संपत्तियों की कीमत करीब 9.06 करोड़ रुपए बताई गई है। ईडी ने 8 अक्टूबर को संपत्तियों को अटैच करने का आदेश जारी किया था। इसके बाद 9 अक्टूबर को रायपुर की विशेष पीएमएलए कोर्ट में रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की। रामगोपाल अग्रवाल को 11 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी की जांच के मुताबिक, शराब सिंडिकेट से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल संभालता था। आरोप है कि रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर यह पैसा रायपुर के शंकर नगर स्थित कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन पहुंचाया जाता था। वहां रामगोपाल अग्रवाल के साथ काम करने वाले अकाउंटेंट देवेंद्र डढ़सेना को कैश सौंपे जाने का दावा किया गया है। ईडी के मुताबिक, इस पूरे लेनदेन में करीब 72 करोड़ रुपए रामगोपाल अग्रवाल के नियंत्रण में थे। इस रकम को उनके निर्देश पर रखने, इस्तेमाल करने या बांटने का आरोप है।
28.80 लाख कैश मिलने के बाद शुरू हुई जांच
मैनपावर घोटाले में जांच की शुरुआत 29 नवंबर 2023 को हुई थी। उस दिन प्रवर्तन निदेशालयने रायपुर में कार्रवाई के दौरान तीन लोगों से 28.80 लाख रुपए कैश जब्त किए थे। जांच एजेंसी को संदेह था कि यह रकम मैनपावर एजेंसियों के लंबित बिल पास कराने के बदले दिए जाने वाले कथित कमीशन से जुड़ी है। इसके बाद मिली जानकारी के आधार पर राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और एंटी करप्शन ब्यूरो ने केस दर्ज कर जांच शुरू की।
182.98 करोड़ के अतिरिक्त
भुगतान का आरोप
मैनपावर घोटाले में जांच एजेंसियों के मुताबिक, साल 2019-20 से 2023-24 के बीच मैनपावर एजेंसियों को ओवरटाइम, बोनस, चार अतिरिक्त कार्य दिवस और सर्विस चार्ज के नाम पर करीब 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया। आरोप है कि कर्मचारियों को इन मदों का वास्तविक लाभ नहीं मिला, जबकि एजेंसियों ने फर्जी और बढ़े हुए रिकॉर्ड के आधार पर भुगतान हासिल किया। जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि इस रकम का एक हिस्सा नकद कमीशन के रूप में अधिकारियों और कथित सिंडिकेट तक पहुंचाया गया। अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल के दौरान करीब 152.40 करोड़ रुपए के अतिरिक्त भुगतान की बात भी जांच में सामने आई है।
मैनपावर एजेंसियों के संचालकों पर भी कार्रवाई
श्वह्रङ्ख-्रष्टख् ने इस मामले में मैनपावर एजेंसियों के संचालकों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी का आरोप है कि बिल तैयार करने, भुगतान मंजूर कराने और कथित कमीशन के लेनदेन में कई लोगों की भूमिका रही है। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं में कार्रवाई की गई है।
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