उज्जैन,05 नवम्बर 2026। देशभर में दीपावली की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। परंपरानुसार देश में सबसे पहले मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के आंगन में पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होगी। आज तड़के धनतेरस के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजन होगा। भगवान महाकाल को केवल आराध्य देव नहीं, बल्कि अवंतिका का राजा माना जाता है। यही वजह है कि मान्यता के अनुसार प्रजा से पहले राजा के दरबार में त्योहार मनाया जाता है। इस बार भी सदियों से चली आ रही इस परंपरा के तहत महाकाल के आंगन से दीपोत्सव का शुभारंभ होगा। पुरोहित समिति के सदस्य लोकेश व्यास ने गुरुवार को बताया कि शुक्रवार को धनतेरस के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में परंपरानुसार विशेष पूजन किया जाएगा। पुजारी-पुरोहित भगवान महाकाल के साथ धन कुबेर और चांदी के सिक्कों का पूजन-अभिषेक करेंगे। बाबा महाकाल को चांदी का सिक्का भी अर्पित किया जाएगा। इस दौरान सुबह भस्म आरती में विशेष पूजन होगा। पंडे-पुजारी गर्भगृह में फुलझड़ी जलाकर दीपावली पर्व की शुरुआत करेंगे। उन्होंने बताया कि बताया कि पूजन में उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा सहित करीब दो दर्जन पंडे-पुजारी शामिल होंगे। इसी दिन सुबह करीब नौ बजे नंदीहाल में पुरोहित समिति की ओर से गणपति और महालक्ष्मी पूजन के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत और रुद्राभिषेक किया जाएगा। इस पूजन में सुख-समृद्धि, आरोग्य और विश्व कल्याण की कामना की जाएगी। महाकाल मंदिर की दीपावली दूसरे मंदिरों से कई मायनों में अलग होती है। यहां दीपावली सिर्फ दीप जलाने और आतिशबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि भगवान को परिवार के सदस्य और नगर के राजा के रूप में मानकर उनकी दिनचर्या में उत्सव को शामिल किया जाता है। धनतेरस से लेकर दीपावली तक विशेष पूजन,अभिषेक,शृंगार और भोग की परंपराएं निभाई जाती हैं। महाकाल मंदिर की मान्यता है कि उज्जैन के राजा भगवान महाकाल हैं। इसी परंपरा के चलते यहां हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहार नगरवासियों से पहले मंदिर में मनाए जाते हैं।
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