Breaking News

बैकुंठपुर@आरक्षण के बाद मतदाता सूची में वार्ड बदलने का खेल? बैकुंठपुर और शिवपुर-चरचा में शिकायत से मचा हड़कंप

Share


किस वार्ड में किसका नाम? मतदाता सूची पर कांग्रेस की शिकायत,निर्वाचन कार्यालय ने जांच का दिया निर्देश
वार्ड आरक्षण के बाद मतदाताओं के नामों में कथित फेरबदल,नगरीय चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल
गलत वार्डों में नाम दर्ज कराने और मतदाताओं के स्थानांतरण के लगाए आरोप, शिकायत पर जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने जांचका दिया निर्देश
मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायत,10 नवंबर तक दावा-आपत्ति बढ़ाने की मांग, प्रशासन ने मांगी जांच रिपोर्ट
जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने कलेक्टर से की निष्पक्ष जांच की मांग

–रवि सिंह-
बैकुंठपुर,02 नवम्बर 2026 (घटती-घटना)।
कोरिया जिले के दो नगरीय निकायों—बैकुंठपुर और शिवपुर-चरचा—में आगामी नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच प्रारंभिक मतदाता सूची को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने मतदाता सूची के प्रकाशन और दावा-आपत्ति प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की आशंका जताते हुए कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी को शिकायत सौंपी है, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वार्डों का आरक्षण घोषित होने के बाद कुछ मतदाताओं के नाम उनकी वास्तविक निवास वाली वार्ड सीमा के बजाय दूसरे वार्डों में दर्ज किए जा रहे हैं,कुछ मतदाताओं के नाम कथित तौर पर मनमाने ढंग से पसंदीदा वार्डों में स्थानांतरित कराने का दबाव बनाए जाने की शिकायत भी की गई है,यह मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि नगरीय निकाय चुनाव में वार्डवार मतदाता सूची और आरक्षण की स्थिति का सीधा संबंध चुनावी प्रक्रिया से है,यदि मतदाताओं के नाम निर्धारित वार्डों के बजाय दूसरे वार्डों में दर्ज किए जाते हैं या नियमों के विपरीत स्थानांतरण होता है, तो इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो सकते हैं,ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच और प्रत्येक विवादित नाम का भौतिक सत्यापन आवश्यक हो गया है।
आरक्षण के बाद वार्डों में नाम बदलने के आरोप
जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने 30 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर को दिए गए शिकायत पत्र में कहा है कि बैकुंठपुर और शिवपुर-चरचा की प्रारंभिक मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आ रही हैं,शिकायत के अनुसार, निर्धारित वार्ड सीमाओं के अनुरूप नाम दर्ज होने के बजाय बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम दूसरे और दूरस्थ वार्डों में दर्ज होने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं,शिकायतकर्ता ने यह आशंका भी जताई है कि कुछ मतदाताओं के नाम जानबूझकर दूसरे वार्डों में जोड़ने तथा कुछ नामों को प्रभावित करने के लिए दबाव बनाए जाने की जानकारी मिली है,इसके अलावा, चुनिंदा मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से पसंदीदा वार्डों में स्थानांतरित कराने के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है, यदि इन शिकायतों की पुष्टि होती है तो यह केवल मतदाता सूची की सामान्य त्रुटि नहीं होगी,बल्कि मतदाताओं के वार्ड निर्धारण और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर मामला बन सकता है, हालांकि, अभी ये शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं,इनकी पुष्टि जांच और संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
वार्ड आरक्षण के बाद नामों के स्थानांतरण का आरोप क्यों गंभीर?
नगरीय निकाय चुनाव में वार्डों का आरक्षण घोषित होने के बाद प्रत्येक वार्ड की राजनीतिक और चुनावी परिस्थितियां बदल जाती हैं, ऐसे में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या एक वार्ड से दूसरे वार्ड में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी
तरह निर्धारित नियमों के अनुरूप होनी चाहिए,शिकायत में इसी बिंदु को प्रमुखता से उठाया गया है,आरोप है कि वार्डों की निर्धारित सीमाओं के अनुसार नाम दर्ज करने के बजाय कुछ मतदाताओं को दूसरे वार्डों में स्थानांतरित करने की शिकायतें सामने आ रही हैं,यदि किसी मतदाता का नाम वास्तविक निवास स्थान से अलग वार्ड में दर्ज होता है तो उसे अपने मताधिकार के प्रयोग में परेशानी हो सकती है, वहीं,यदि ऐसा बदलाव जानबूझकर और किसी चुनावी लाभ के उद्देश्य से किया गया हो तो मामला और गंभीर हो जाता है,इसलिए केवल कार्यालयीन रिकॉर्ड देखकर निर्णय लेना पर्याप्त नहीं होगा। विवादित मतदाताओं के वास्तविक निवास स्थान का भौतिक सत्यापन और संबंधित आवेदन तथा दस्तावेजों की जांच भी जरूरी है।
प्रदीप गुप्ता ने रखीं पांच प्रमुख मांगें
कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत पत्र में प्रदीप गुप्ता ने मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पांच प्रमुख मांगें रखी हैं, पहली मांग दावा-आपत्ति की अवधि 10 नवंबर तक बढ़ाने की है,शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रारंभिक मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नामों के स्थानांतरण और गलत वार्ड में नाम दर्ज होने की शिकायतों को देखते हुए मौजूदा अवधि पर्याप्त नहीं है,उन्होंने अवकाश और अन्य कारणों से प्रभावित लोगों को अपने नामों में सुधार कराने तथा आवश्यक आवेदन प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की है,दूसरी मांग प्रत्येक शिकायत का अनिवार्य फील्ड वेरिफिकेशन कराने की है, शिकायत में कहा गया है कि केवल कार्यालयीन रिकॉर्ड के आधार पर निर्णय लेने के बजाय संबंधित मतदाताओं के वास्तविक निवास स्थान का भौतिक सत्यापन कराया जाए, तीसरी मांग गलत वार्ड में दर्ज मतदाताओं के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित करने की है,ताकि जिन मतदाताओं के नाम गलत वार्ड में दर्ज हुए हैं,वे नियमों के तहत अपने नाम का सुधार करा सकें और किसी पात्र मतदाता का मतदान अधिकार प्रभावित न हो,चौथी मांग नाम जोड़ने, हटाने और एक वार्ड से दूसरे वार्ड में स्थानांतरण की प्रक्रिया की जांच वरिष्ठ अधिकारियों से कराने की है, शिकायतकर्ता ने किसी भी प्रकार के अनुचित दबाव, पक्षपात अथवा नियमविरुद्ध कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की है,पांचवीं मांग संशोधित मतदाता सूची पर दोबारा दावा-आपत्ति का अवसर देने की है, उनका कहना है कि शिकायतों का निराकरण और आवश्यक सुधार करने के बाद संशोधित सूची प्रकाशित की जाए तथा उस पर भी दावा-आपत्ति का अवसर दिया जाए।
शिकायत के बाद निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने दिया जांच का निर्देश
इस शिकायत पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई भी सामने आई है, जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय, स्थानीय निर्वाचन,बैकुंठपुर की ओर से 1 नवंबर 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तथा पंजीयन अधिकारी,बैकुंठपुर एवं शिवपुर-चरचा को पत्र जारी किया गया, पत्र में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता के 30 अक्टूबर 2026 के शिकायत पत्र का संदर्भ देते हुए संबंधित शिकायत का अवलोकन कर जांच करने,नियमानुसार कार्रवाई करने और प्रतिवेदन तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं,यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिकायत को केवल राजनीतिक आरोप मानकर छोड़ने के बजाय निर्वाचन कार्यालय ने संबंधित अधिकारियों से जांच और प्रतिवेदन मांगा है,अब यह देखना होगा कि जांच में किन वार्डों में कितने नामों को लेकर आपत्तियां सामने आती हैं और उनका निराकरण किस प्रकार किया जाता है।
दावा-आपत्ति की तारीख को लेकर भी महत्वपूर्ण स्थिति
शिकायत पत्र में दावा-आपत्ति की अवधि 10 नवंबर तक बढ़ाने की मांग की गई थी, वहीं,1 नवंबर 2026 को जारी जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के पत्र में राज्य निर्वाचन आयोग के संशोधित आदेश क्रमांक एक-53-1/तीन(दो)/न.पा./निर्वा. नाम/ 2026/1 190,दिनांक 30 अक्टूबर 2026 का उल्लेख है। इस पत्र के अनुसार नगरपालिकाओं की मतदाता नामावली के लिए दावा-आपत्ति की अवधि 3 नवंबर 2026 तक बढ़ाए जाने की जानकारी दी गई है,इस प्रकार शिकायतकर्ता की 10 नवंबर तक अवधि बढ़ाने की मांग की है, इसलिए इस संबंध में आगे की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
अब जांच की निष्पक्षता पर टिकी नजरें
बैकुंठपुर और शिवपुर-चरचा में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर उठा यह विवाद प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है, मतदाता सूची ही चुनाव की बुनियाद होती है,यदि प्रारंभिक सूची में नामों की त्रुटियां, गलत वार्ड में प्रविष्टियां या अनियमित स्थानांतरण की शिकायतें हैं तो उनका समय रहते निराकरण होना चाहिए,सबसे जरूरी यह है कि शिकायत में जिन वार्डों और मतदाताओं का उल्लेख किया गया है,उनका निष्पक्ष सत्यापन कराया जाए, यह भी देखा जाए कि नाम जोड़ने अथवा स्थानांतरित करने के लिए आवेदन किसने दिया,किस दस्तावेज के आधार पर कार्रवाई हुई और संबंधित मतदाता का वास्तविक निवास किस वार्ड में है,यदि कहीं नियमों के विपरीत नाम जोड़ने या स्थानांतरित करने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए,मतदाता सूची में एक नाम की गलती भी किसी नागरिक के मताधिकार को प्रभावित कर सकती है, जबकि बड़े पैमाने पर अनियमितता की पुष्टि होने पर पूरे चुनावी तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं,इसलिए बैकुंठपुर और शिवपुर-चरचा की मतदाता सूची की शिकायत को महज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रखा जा सकता,अब जिला निर्वाचन अधिकारी और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएं,ताकि चुनाव से पहले मतदाता सूची शुद्ध और विवादमुक्त हो सके।


Share

Check Also

अंबिकापुर@गाय-बैलों को हडिय़ा और घुघरी खिलाकर मनाया सोहराई पर्व, जूठा प्रसाद मानकर ग्रहण करते हैं परिवार के लोग

Share दीपावली के दूसरे दिन निभाई जाती है सदियों पुरानी परंपरा, पशुधन की पूजा से …

Leave a Reply